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सेहत की बात: थायरॉइड पर खूब होती है बात, पर क्या पैराथायरॉइड के बारे में जानते हैं आप? क्या हैं इसके काम

Sat, 31 Oct 2026 07:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Parathyroid Gland: पैराथायरॉइड गर्दन में थायरॉइड के पीछे मौजूद छोटी ग्रंथियां हैं, जो पीटीएच हार्मोन बनाकर शरीर में कैल्शियम का स्तर नियंत्रित करती हैं। इनके ज्यादा या कम सक्रिय होने से हड्डियों, किडनी, मांसपेशियों और नसों पर असर पड़ सकता है। सही पहचान के लिए खून की जांच जरूरी है।
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पैराथायरॉइड की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
थायरॉइड की समस्या वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर चिंता का विषय रही है। एक रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 20 करोड़ लोग थायरॉयड संबंधी विकारों से प्रभावित हैं। इनमें से लगभग 5% आबादी को क्रॉनिक समस्याएं हैं, जबकि अन्य 5% लोगों में इन विकारों का अभी तक पता ही नहीं चल पाया है। ये बीमारी दुनियाभर में सबसे आम एंडोक्राइन विकारों में से एक हैं। ये पुरुषों की तुलना में महिलाओं को काफी अधिक प्रभावित करती हैं, महिलाओं में यह पुरुषों के मुकाबले लगभग 5 गुना अधिक देखा जा रहा है।

मसलन थायरॉइड विकार सभी उम्र के लोगों में बहुत आम है। थायरॉइड का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में वजन बढ़ने या घटने, थकान, बाल झड़ने और दिल की धड़कन तेज होने जैसी समस्याओं का ख्याल आता है। गर्दन में मौजूद तितली के आकार की ये ग्रंथि कई ऐसे जरूरी हार्मोन्स रिलीज करती है जो संपूर्ण शरीर के व्यवस्थित कामकाज के लिए जरूरी है।

थायरॉइड की समस्या के बारे में हम सभी अक्सर सुनते और बातचीत करते रहते हैं, पर क्या आपको पैराथायरॉइड की समस्या के बारे में जानकारी है?
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पैराथायरॉइड के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
पैराथायरॉइड ग्रंथियां और उसके काम

थायरॉइड की स्थिति कॉमन है, पर गर्दन में मौजूद एक और छोटी-सी ग्रंथि पैराथायरॉइड के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं। नाम मिलता-जुलता होने के कारण कई लोग इसे थायरॉइड का ही हिस्सा समझ लेते हैं, जबकि दोनों के काम अलग-अलग हैं।
 
  • पैराथायरॉइड ग्रंथियां शरीर में कैल्शियम का संतुलन बनाए रखने में अहम भूमिका निभाती हैं।
  • कैल्शियम सिर्फ हड्डियों और दांतों के लिए ही नहीं, बल्कि मांसपेशियों के काम करने, नसों से संदेश पहुंचाने और दिल की धड़कन सामान्य रखने के लिए भी जरूरी है।
  • ऐसे में इन छोटी ग्रंथियों में गड़बड़ी होने पर शरीर में कई तरह की परेशानियां हो सकती हैं।

आइए समझते हैं कि पैराथायरॉइड क्या है और इसकी बीमारी के संकेत कैसे पहचानें।
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पैराथायरॉइ़ड की समस्या का खतरा - फोटो : Adobe Stock
पैराथायरॉइड के बारे में जान लीजिए

पैराथायरॉइड, थायरॉइड ग्रंथि के पीछे मौजूद चार छोटी ग्रंथियां होती हैं। ये पैराथायरॉइड नाम का हार्मोन (पीटीएच) बनाती हैं। यह हार्मोन खून में कैल्शियम के स्तर को संतुलित रखने में मदद करता है। पीटीएच हार्मोन हड्डियों को संकेत देता है कि वे थोड़ी मात्रा में कैल्शियम और फॉस्फेट को खून में रिलीज करें ताकि ब्लड में कैल्शियम का स्तर सामान्य हो सके। इतना ही नहीं ये किडनी को पेशाब के जरिए कैल्शियम को बाहर जाने से रोकता है और उसे वापस शरीर (खून) में खींच लेता है। 
 
  • मसलन अगर पैराथायरॉइड ग्रंथियों में कोई दिक्कत होती है या फिर इससे हार्मोन्स का संतुलन प्रभावित होता है तो इसका सीधा असर शरीर में कैल्शियम के स्तर पर पड़ सकता है।
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हड्डियों की समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
पैराथायरॉइड में गड़बड़ी से क्या दिक्कतें होती हैं?

पैराथायरॉइड ग्रंथि की समस्याएं शरीर पर कई प्रकार से नकारात्मक असर डाल सकती हैं।
 
  • जरूरत से ज्यादा पीटीएच हार्मोन बनने पर खून में कैल्शियम बढ़ सकता है। इससे किडनी में पथरी, हड्डियों में कमजोरी, कब्ज, थकान और अधिक प्यास लगने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
  • पीटीएच कम बनने पर कैल्शियम का स्तर घट सकता है। इसके कारण हाथ-पैरों में झनझनाहट, मांसपेशियों में ऐंठन और गंभीर स्थिति में दौरे पड़ सकते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जिन लोगों में कैल्शियम का स्तर कंट्रोल में नहीं रहता, उनमें परेशानी का असली कारण समझने के लिए डॉक्टर कुछ जांच कराने की सलाह दे सकते हैं। इससे पैराथायरॉइड की स्थिति को समझा जाता है। अगर आपको बार-बार किडनी में स्टोन हो रहा हो, हड्डियों में कमजोरी, लगातार झनझनाहट या मांसपेशियों में ऐंठन की दिक्कत बनी रहती हो तो इस बारे में एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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