Right Way To Bath: सुनने में भले ही ये अजीब लगे लेकिन ये सच है। अगर आप गलत तरीके से नहाते हैं, या नहाते समय सीधा सर पर पानी डालते हैं तो ये आपके स्वास्थ्य के लिए काफी नुकसानदायक साबित हो सकता है। आज हम इसी बारे में आपसे बात करेंगे।
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शरीर के किस हिस्से से शुरू करें स्नान?
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Right Way To Bath: नहाना हमारी रोजमर्रा की जिंदगी का एक जरूरी हिस्सा है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि नहाने का सही तरीका भी आपकी सेहत को प्रभावित कर सकता है? आयुर्वेद में शरीर की देखभाल से जुड़ी कई ऐसी बातें बताई गई हैं, जिनमें नहाने की सही प्रक्रिया का भी जिक्र मिलता है।
कई लोग सुबह उठते ही सीधे सिर पर पानी डालकर नहाना शुरू कर देते हैं, लेकिन आयुर्वेद के अनुसार शरीर के तापमान और रक्त संचार को ध्यान में रखते हुए नहाने का एक सही क्रम माना जाता है। मान्यता है कि अचानक सिर पर ठंडा पानी डालने से शरीर पर असर पड़ सकता है, खासकर उन लोगों में जिन्हें सर्दी, सिरदर्द या ब्लड प्रेशर जैसी समस्या रहती है।
हालांकि, हर व्यक्ति का शरीर अलग होता है और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार आदतों में बदलाव जरूरी हो सकता है। आइए जानते हैं आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका और किस अंग पर सबसे पहले पानी डालना चाहिए।
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शरीर के किस हिस्से से शुरू करें स्नान?
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आयुर्वेद के अनुसार नहाते समय किस अंग पर सबसे पहले पानी डालना चाहिए?
1. सबसे पहले पैरों पर पानी डालने की सलाह
आयुर्वेदिक परंपरा के अनुसार नहाते समय शुरुआत पैरों से करना बेहतर माना जाता है। इसके पीछे तर्क यह है कि पैरों से पानी डालने पर शरीर धीरे-धीरे पानी के तापमान के अनुसार खुद को एडजस्ट करता है।पैरों से पानी डालने के बाद धीरे-धीरे हाथ, शरीर और फिर सिर पर पानी डालना शरीर के लिए आरामदायक माना जाता है।
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2. सीधे सिर पर पानी डालने से क्यों बचने की सलाह दी जाती है?
कई लोग नहाते समय सबसे पहले सिर पर पानी डालते हैं, लेकिन आयुर्वेद में इसे सही तरीका नहीं माना जाता। अचानक सिर पर ठंडा पानी पड़ने से कुछ लोगों को सिरदर्द, चक्कर या असहज महसूस हो सकता है। खासकर ठंडे मौसम में या जिन लोगों को माइग्रेन, साइनस या ब्लड प्रेशर की समस्या रहती है, उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
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3. शरीर के तापमान को संतुलित रखने में मदद
पैरों से नहाने की शुरुआत करने से शरीर को धीरे-धीरे पानी के तापमान के साथ तालमेल बैठाने का समय मिलता है। इससे अचानक तापमान में बदलाव से होने वाली परेशानी को कम किया जा सकता है।
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आयुर्वेद के अनुसार नहाने का सही तरीका
आयुर्वेद में सुबह का समय शरीर और मन को तरोताजा करने के लिए अच्छा माना गया है।
बहुत ज्यादा गर्म पानी त्वचा की प्राकृतिक नमी को कम कर सकता है, वहीं बहुत ठंडा पानी हर व्यक्ति के लिए सही नहीं होता। मौसम और शरीर की जरूरत के अनुसार पानी का तापमान चुनना चाहिए।
नहाने से पहले हल्की तेल मालिश करने से त्वचा को नमी मिल सकती है और शरीर को आराम महसूस हो सकता है।
बहुत देर तक पानी में रहने से त्वचा रूखी हो सकती है, इसलिए नहाने के बाद शरीर को अच्छी तरह सुखाना और मॉइस्चराइजर लगाना जरूरी है।
नहाने के बाद साफ और सूखे तौलिए का इस्तेमाल करें। गीले तौलिए में बैक्टीरिया पनप सकते हैं, जो त्वचा संबंधी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।