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Headache Risk: अक्सर बना रहता है सिर में दबाव और दर्द? कहीं ये TTH की समस्या तो नहीं

Sat, 06 Jun 2026 07:59 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ऑफिस का दबाव, नींद की कमी, मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन पर घंटों समय बिताने के चलते लोगों में कई तरह की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। क्या आपको भी बार-बार सिर में दर्द होता रहता है? क्या आप जानते हैं कि हर बार दर्द होना सामान्य नहीं है?
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सिर में अक्सर रहता है दर्द? - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आप भी अक्सर सिर में दर्द से परेशान रहते हैं, ऐसा लगता है जैसे सिर को किसी ने तेजी से जकड़ रखा हो? अगर हां तो आप ऐसा महसूस करने वाले अकेले नहीं हैं। दुनियाभर में बड़ी संख्या में लोग रोजाना इस समस्या से दो-चार हो रहे होते हैं।

लगातार सिर में एक भारीपन सा बना रहना सभी उम्र के लोगों में देखी जाने वाली समस्या है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, ऑफिस के दबाव के साथ नींद की कमी, बढ़े हुए स्क्रीन टाइम, रिश्तों के तनाव और लगातार मानसिक थकान ने इस खतरे को काफी बढ़ा दिया है। अगर आप भी इसे सामान्य समझकर नजरअंदाज करते आ रहे हैं तो सावधान हो जाइए, कई बार इस तरह का सिरदर्द, टीटीएच यानी टेंशन टाइप हेडेक का संकेत हो सकता है। 

अगर आप भी इस समस्या से परेशान रहते हैं तो आइए जान लेते हैं कि टीटीएच होता क्या है और इसके खतरे को कैसे कम किया जा सकता है?
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आप भी रहते हैं सिरदर्द से परेशान? - फोटो : Freepik.com
टेंशन टाइप हेडेक के बारे में जानिए?

टेंशन टाइप हेडेक मौजूदा समय की सबसे आम समस्याओं में से एक है। इसमें पूरे सिर में एक समान दबाव और जकड़न महसूस होता है। 
 
  • इसमें सिर में हल्का से लेकर मध्यम दर्द हो रहता है।
  • विशेषज्ञों का मानना था कि चेहरे, गर्दन और सिर की त्वचा की मांसपेशियों में खिंचाव के कारण ये दिक्कत होती है। 
  • आमतौर पर माना जाता है कि भावनाओं, तनाव या स्ट्रेस की वजह से मांसपेशियों में खिंचाव बढ़ता है जो सिर में दर्द का कारण बनती है। 

कई लोग इसे सिर्फ थकान या नींद की कमी मानकर पेनकिलर ले लेते हैं, लेकिन जब यह समस्या बार-बार होने लगती है, तो यह संकेत होता है कि शरीर और दिमाग दोनों लगातार तनाव में हैं। यह सिर्फ सिर का दर्द नहीं है, बल्कि यह आपके मानसिक और शारीरिक संतुलन का एक अलार्म है जिसे नजरअंदाज करना आगे चलकर गंभीर समस्याओं को जन्म दे सकता है।
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स्ट्रेस के कारण होने वाला सिरदर्द - फोटो : Adobe stock photos
कैसे जानें कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार?

टेंशन टाइप सिरदर्द में आपको कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं।
 
  • सिर में हल्का, लगातार दर्द बना रहना।
  • माथे पर या सिर के किनारों और पिछले हिस्से में दबाव महसूस होना।
  • सिर, गर्दन और कंधे की मांसपेशियों में छूने पर दर्द या संवेदनशीलता महसूस होना।

कई बार ये सिरदर्द 30 मिनट से लेकर एक हफ्ते तक रह सकता है और यह कभी-कभी या बार-बार हो सकता है। अक्सर लोग इस तरह के सिरदर्द को माइग्रेन समझने लगते हैं पर यहां जानना जरूरी है कि टीटीएच और माइग्रेन दोनों अलग-अलग स्थितियां हैं।

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हेडेक के क्या कारण हैं? - फोटो : Freepik.com
एक ही नहीं है माइग्रेन और टेंशन हेडेक

माइग्रेन में दर्द अक्सर एक तरफ तेज चुभन जैसा होता है, जबकि टेंशन हेडेक में पूरा सिर एक समान दबाव में जकड़ा हुआ महसूस होता है। यह दर्द हल्का से मध्यम हो सकता है, लेकिन इसकी सबसे बड़ी समस्या यह है कि यह बार-बार लौटकर आता है और लंबे समय तक बना रह सकता है।
 
  • माइग्रेन में सिर में दर्द के साथ मितली-उल्टी जैसा भी महसूस होता है जबकि टेंशन हेडेक में ये दिक्कतें नहीं होती हैं। 
  • टेंशन टाइप हेडेक मुख्य रूप से शारीरिक और मानसिक तनाव के कारण होता है। लंबे समय तक मानसिक दबाव, चिंता और डिप्रेशन की स्थिति में इसका जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। 
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बार-बार सिरदर्द होता है तो क्या करें? - फोटो : Adobe stock
टेंशन टाइप हेडेक हो तो क्या करें?

टेंशन टाइप हेडेक के खतरों को कम करने और इससे बचने के लिए जीवनशैली में बदलाव सबसे जरूरी है।
 
  • अच्छी नींद यानी रोजाना कम से कम 7-8 घंटे की नींद दिमाग को रिलैक्स करने में मदद करती है।
  • तनाव कम करने के लिए योग, मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग एक्सरसाइज बहुत प्रभावी मानी जाती हैं। ये मांसपेशियों के तनाव को कम करके दर्द में राहत देती हैं।
  • स्क्रीन टाइम कम करना और आंखों को आराम देना भी जरूरी है।
  • पर्याप्त पानी पीना और संतुलित आहार लेना ब्लड सर्कुलेशन को बेहतर बनाता है, जिससे सिरदर्द को कम किया जा सकता है।
  • यदि दर्द बार-बार होता रहता है तो डॉक्टर की सलाह जरूर ले लेनी चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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