What is Telephobia: बदलते जमाने में ये टर्म काफी ज्यादा वायरल हो रहा है। ये क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और ये किनसे जुड़ा हुआ है, आज के लेख में हम आपसे इसी बारे में डिटेल में बात करेंगे।
What is Telephobia: आज के डिजिटल दौर में लोग घंटों चैटिंग और सोशल मीडिया पर सक्रिय रहते हैं, लेकिन जब बात फोन कॉल करने या रिसीव करने की आती है तो कई लोग असहज महसूस करने लगते हैं। यही वजह है कि हाल के वर्षों में "टेलीफोबिया" शब्द तेजी से चर्चा में आया है।
टेलीफोबिया से पीड़ित लोग अक्सर कॉल रिसीव करने से बचते हैं, फोन बजते ही तनाव महसूस करते हैं या जरूरी बातचीत को भी मैसेज के जरिए करना पसंद करते हैं।
बदलती डिजिटल लाइफस्टाइल, सोशल मीडिया पर बढ़ती निर्भरता और आमने-सामने संवाद में कमी को इसके पीछे की प्रमुख वजहों में गिना जाता है। आइए जानते हैं टेलीफोबिया क्या है, इसके लक्षण क्या हैं और इससे कैसे निपटा जा सकता है।
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टेलीफोबिया क्या है?
- फोटो : AI
क्या है टेलीफोबिया?
टेलीफोबिया फोन कॉल करने या रिसीव करने से जुड़ा डर है। ऐसे लोग फोन पर बात करते समय घबराहट, तनाव या असहजता महसूस करते हैं। कई बार यह डर इतना बढ़ जाता है कि व्यक्ति जरूरी कॉल्स से भी बचने लगता है।
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टेलीफोबिया क्या है?
- फोटो : AI
टेलीफोबिया के लक्षण
1. फोन बजते ही घबराहट महसूस होना।
2. कॉल रिसीव करने से बचना।
3. फोन पर बात करने से पहले अत्यधिक चिंता होना।
4. कॉल की बजाय मैसेज या ईमेल को प्राथमिकता देना।
5. बातचीत के दौरान पसीना आना या दिल की धड़कन तेज होना।
6. महत्वपूर्ण फोन कॉल को बार-बार टालना।
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टेलीफोबिया क्या है?
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टेलीफोबिया के कारण
सोशल एंग्जायटी या आत्मविश्वास की कमी।
गलत बोलने या जज किए जाने का डर।
पिछले किसी नकारात्मक फोन अनुभव का असर।
डिजिटल मैसेजिंग पर अत्यधिक निर्भरता।
लोगों से सीधे संवाद की कम आदत।
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टेलीफोबिया क्या है?
- फोटो : AI
इससे कैसे निपटें?
छोटी और आसान कॉल्स से शुरुआत करें।
बातचीत से पहले जरूरी बातें नोट कर लें।
नियमित रूप से फोन पर बात करने की आदत बनाएं।
आत्मविश्वास बढ़ाने वाली गतिविधियों में हिस्सा लें।
अगर समस्या गंभीर हो तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से सलाह लें।
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टेलीफोबिया क्या है?
- फोटो : AI
क्या टेलीफोबिया सिर्फ Gen Z में ही देखने को मिलता है?
टेलीफोबिया केवल Gen Z तक सीमित नहीं है, लेकिन यह समस्या इस पीढ़ी में अपेक्षाकृत अधिक देखी जा रही है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि Gen Z ने डिजिटल दुनिया में परवरिश पाई है, जहां बातचीत का बड़ा हिस्सा टेक्स्ट मैसेज, सोशल मीडिया और चैटिंग के जरिए होता है।
फोन कॉल में तुरंत जवाब देना पड़ता है, जबकि मैसेज में सोचने और जवाब तैयार करने का समय मिल जाता है। यही कारण है कि कई युवा फोन पर बातचीत को असहज महसूस करते हैं। हालांकि, टेलीफोबिया किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है, खासकर उन लोगों को जो सोशल एंग्जायटी, आत्मविश्वास की कमी या नकारात्मक संवाद अनुभवों से गुजर चुके हों। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल कम्युनिकेशन पर बढ़ती निर्भरता ने इस समस्या को और अधिक आम बना दिया है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।