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क्या होता है 'साइलेंट हार्ट अटैक', कहीं आपको भी तो नहीं आया है कभी?

Fri, 17 Jul 2020 06:59 PM IST
सोनू शर्मा बीबीसी हिंदी
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दिल के दौरे का सबसे बड़ा लक्षण माना जाता है- सीने में तेज दर्द। अक्सर किसी फिल्मी दृश्य में जब कभी किसी को दिल का दौरा पड़ता है तो वो अपना सीना जोर से जकड़ लेता है, दर्द के मारे उनकी आंखों में घबराहट दिखने लगती है और वो जमीन पर गिर पड़ते हैं। हम सभी को लगता है कि दिल का दौरा पड़ने पर ऐसा ही अहसास होगा जैसे हमारे सीने को कुचला जा रहा है। ऐसी अनुभूति होती भी है, लेकिन हमेशा नहीं। 

जब दिल तक खून की आपूर्ति नहीं हो पाती तो दिल का दौरा पड़ता है। आमतौर पर खून के किसी थक्के के बीच में आने की वजह से खून दिल तक नहीं पहुंच पाता, इसीलिए सीने में तेज दर्द होता है, लेकिन कभी-कभी दिल के दौरे में दर्द नहीं होता। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
कई बार बहुत हल्का दर्द होता है और लोगों को लगता है कि अपच के कारण गैस की वजह से ये दर्द हो रहा है और फिर जब कभी अस्पताल में ईसीजी होता है तब पता चलता है कि उन्हें दिल का दौरा पड़ा था। इसे साइलेंट हार्ट अटैक कहा जाता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
सीने में दर्द नहीं होता

2016 में प्रकाशित एक शोध अध्ययन के मुताबिक दिल के दौरे के 45 फीसदी मामले साइलेंट हार्ट अटैक के हो सकते हैं। हालांकि, शोध के लिए ये आंकड़े 1990 से इकट्ठे किए जा रहे हैं और तब से अब तक दिल के दौरों के निदान में काफी सुधार आया है। इसलिए हो सकता है कि सच्चाई इतनी भयावह न हो, लेकिन अब भी बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें पता ही नहीं चल पाता कि उन्हें दिल का दौरा पड़ रहा है।

कई बार मरीज को जबड़े, गर्दन, बांह, पेट या पीठ में दर्द होता है, सांस लेने में तकलीफ होती है, कमजोरी महसूस होती है, चक्कर आते हैं, पसीना आता है, उल्टियां आती हैं- लेकिन सीने में भयंकर दर्द नहीं होता और वे समझ नहीं पाते कि दरअसल उन्हें दिल की बीमारी है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
महिलाओं में अधिक दर्द

आमतौर पर माना जाता है कि सीने में दर्द के बिना दिल का दौरा पड़ने के मामले महिलाओं में ज्यादा होते हैं, जिससे उन्हें देर से डॉक्टरी मदद मिल पाती है और उनके बचने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। इस मान्यता की सच्चाई जांचने के लिए कनाडा के शोधकर्ताओं ने 2009 में दिल के दौरे के लक्षणों को मापने के लिए एंजियोप्लास्टी कराने वाले 305 मरीजों का अध्ययन किया था। 

एंजियोप्लास्टी में बंद रक्तवाहिनी में एक छोटा गुब्बारा डालकर उसे फुलाया जाता है ताकि उसे फिर से खोला जा सके। इस प्रक्रिया के लक्षण दिल के दौरे के लक्षण से कुछ मिलते-जुलते हैं। इसलिए शोध के दौरान जब रक्तवाहिनी के अंदर गुब्बारा फुलाया गया तो मरीजों से पूछा गया कि उन्हें क्या महसूस हो रहा है। सीने में बेचैनी, बांह में दर्द, सांस लेने में तकलीफ, पसीना आने या मतली आने जैसे लक्षण पुरुषों और स्त्रियों में एक जैसे थे, लेकिन महिलाओं ने सीने में दर्द के साथ-साथ गर्दन और जबड़े में दर्द की शिकायत पुरुषों के मुक़ाबले ज्यादा की। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pexels.com
कुछ और भी अध्ययन किए गए, लेकिन इस मान्यता को लेकर कोई ठोस नतीजे नहीं निकले। फिर 2011 में एक व्यापक समीक्षा की गई, जिसका एकमात्र उद्देश्य यह समझना था कि क्या दिल के दौरे के संबंध में महिलाओं और पुरुषों के अनुभव में कोई अंतर है। समीक्षा में अमेरिका, जापान, स्वीडन, जर्मनी, ब्रिटेन, जापान और कनाडा के अध्ययनों को शामिल किया गया था। इस सबसे बड़े अध्ययन में 9 लाख से भी अधिक दिल के रोगियों की समीक्षा की गई थी। 26 सर्वोत्तम अध्ययनों के आंकड़े लिए गए, उन्हें आपस में मिलाया गया और फिर उनका दोबारा विश्लेषण किया गया। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
इस समीक्षा का निष्कर्ष था कि दिल का दौरा पड़ने पर महिलाओं में सीने के दर्द की शिकायत पुरुषों के मुकाबले कम होती है, लेकिन थकान, मतली, चक्कर, गर्दन, जबड़े या बांह में दर्द की शिकायत पुरुषों के मुकाबले ज्यादा होती है। लेकिन यह भी पाया गया कि अधिकांश मामलों में महिलाएं और पुरुष दोनों ही को सीने में दर्द की शिकायत होती है, लेकिन करीब 33 फीसदी महिलाओं और लगभग 25 फीसदी पुरुषों को दिल के दौरे के वक्त सीने में किसी दर्द या जलन या बेचैनी का अहसास नहीं हुआ और इस वजह से उन्हें यह समझने में भी मुश्किल हुई कि आखिर उनके साथ हो क्या रहा है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉक्टरी मदद लेने में कोताही

सीधी-सी बात है जब आप लक्षणों की गंभीरता को समझेंगे ही नहीं तो आप मदद भी नहीं मांगेंगे। औसतन लोग डॉक्टरी मदद लेने से पहले 2 से 5 घंटे इंतजार करते हैं। एक नए अध्ययन में लोगों की विचार प्रक्रिया को समझने की कोशिश की गई कि लोग कैसे तय करते हैं कि हालत बहुत गंभीर है और डॉक्टर की मदद ली जानी चाहिए। दिल का दौरा झेल चुकी कुछ महिलाओं का साक्षात्कार लिया गया। उनमें से आधी महिलाओं को दिल के दौरे के समय महसूस हुआ कि उनके साथ कुछ गड़बड़ हो रही है और उन्होने तुरंत डॉक्टरी सहायता ली जबकि आधी महिलाओं को पता ही नहीं चला कि उनके लक्षण दिल के दौरे के हैं। उन्होंने किसी को कुछ नहीं बताया और इंतजार करने का निर्णय लिया। 

तो सबक यह है कि सीने में भयंकर दर्द तो खतरनाक है ही और इसकी वजह दिल का दौरा हो सकता है, लेकिन इतने ही खतरनाक बाकी लक्षण भी हैं जैसे जबड़े, बांह या गर्दन में दर्द, जी मितलाना या चक्कर आना। इसलिए इन लक्षणों को भी नजरअंदाज न करें और तुरंत डॉक्टर की मदद लें। 
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