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Sarcopenia: क्या है सार्कोपेनिया की समस्या? तेजी से कम होने लगती हैं मांसपेशियां, कहीं आप भी तो नहीं हैं शिकार

Thu, 12 Feb 2026 08:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का धीरे-धीरे कमजोर होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसी उम्र से जुड़ी मांसपेशियों की कमजोरी को मेडिकल भाषा में सार्कोपेनिया कहा जाता है। 
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वजन कम होना - फोटो : Freepik.com
कौन नहीं चाहता कि हमारा शरीर एकदम फिट और तंदुरुस्त रहे, मांसपेशियां एकदम सुड़ौल बनी रहें? इसके लिए खान-पान ठीक रखने के साथ नियमित रूप से व्यायाम की आदत बनाना जरूरी है।

मांसपेशियों का स्वस्थ और मजबूत रहना अच्छी सेहत, शारीरिक संतुलन और सक्रिय जीवन के लिए भी बेहद जरूरी है। मांसपेशियां न सिर्फ शरीर को ताकत देती हैं, बल्कि चलने-फिरने, उठने-बैठने, संतुलन बनाए रखने के साथ मेटाबॉलिज्म को सही रखने में भी अहम भूमिका निभाती हैं। लोग जिम-योग पर रोज कई घंटे समय बिताते हैं ताकि इन्हें मजबूत रखा जा सके। पर क्या आप जानते हैं कि 30 की उम्र के बाद हर साल शरीर की मांसपेशियां 1% तक कम होती जाती है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, उम्र बढ़ने के साथ मांसपेशियों का धीरे-धीरे कमजोर होना एक प्राकृतिक प्रक्रिया है। इसी उम्र से जुड़ी मांसपेशियों की कमजोरी को मेडिकल भाषा में सार्कोपेनिया कहा जाता है। सार्कोपेनिया आमतौर पर 30 वर्ष की उम्र के बाद शुरू हो जाती है और 60 साल के बाद इसका असर तेजी से दिखने लगता है। कहीं आपकी मांसपेशियां भी तो कम नहीं होने लगी हैं? आइए इस बारे में जानते हैं।
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उम्र के साथ घटने लगती हैं मांसपेशियां - फोटो : Adobe Stock Images
सार्कोपेनिया की समस्या के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सार्कोपेनिया उम्र के साथ होने वाली मांसपेशियों और ताकत में कमी की समस्या है। अगर आपको भी ऐसा लगता है कि शरीर की मांसपेशियां कम हो रही हैं, ताकत भी घटती जा रही है, सीढ़ियां चढ़ने और चलने तक में भी दिक्कत हो रही है तो हो सकता है कि ये सार्कोपेनिया की वजह से हो।

 


वरिष्ठ गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट सौरभ सेठी कहते हैं, आमतौर पर 30 की उम्र के बाद हर साल हमारे शरीर का लगभग 1% मसल कम होना शुरू हो जाता है। अक्सर लोगों का इस तरफ ध्यान भी नहीं जाता है। सार्कोपेनिया के लक्षणों की समय रहते पहचान करना और इससे बचाव के लिए उपाय करना सभी लोगों के लिए जरूरी है।
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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
सार्कोपेनिया के कारण क्या दिक्कतें होती हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सार्कोपेनिया के कारण सिर्फ मांसपेशियों और शरीर की ताकत कम नहीं होती हैं। ये स्थिति आपके गिरने के खतरे, हड्डियों के फ्रैक्चर, चलने में परेशानी और दैनिक कार्यों को भी कठिन बनाने वाली हो सकती है। अच्छी बात यह है कि सही लाइफस्टाइल, पोषण और नियमित व्यायाम से सार्कोपेनिया की रफ्तार को धीमा किया जा सकता है और मांसपेशियों को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।

डॉ सौरभ सेठी बताते हैं, मांसपेशियां हमारे शरीर का सबसे बड़ा ग्लूकोज स्पंज होती हैं। यह खून से शुगर सोखती हैं और ब्लड शुगर को कंट्रोल रखने में मदद करतू है। महिलाओं में 35-40 की उम्र के बीच मांसपेशियां कम होनी शुरू हो जाती हैं।

जैसे-जैसे शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होता जाता है, मसल्स का टूटना तेज हो जाता है। यही कारण है कि कई पेरिमेनोपॉजल महिलाओं को तेजी से कमजोर महसूस होने लगती है, भले ही उनका वजन न कम हुआ हो।

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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
कैसे करें इस समस्या की पहचान?

सार्कोपेनिया का सबसे आम लक्षण मांसपेशियों में कमजोरी है। जैसे-जैसे मांसपेशियां कम होती हैं, शरीर में और भी कई तरह की दिक्कतें शुरू हो जाती हैं।
  • स्टैमिना में कमी।
  • रोजाना के काम करने में मुश्किल होना।
  • धीरे-धीरे चलना और सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी होना।
  • शरीर का बैलेंस बिगड़ना और गिरने का खतरा।
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मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत बनाए रखने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe stock
सार्कोपेनिया का खतरा और बचाव के तरीके

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सार्कोपेनिया का सबसे आम कारण उम्र बढ़ना है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि कुछ स्थितियां इसके खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती हैं। 
  • जिन लोगों की शारीरिक गतिविधियां कम होती हैं, मोटापे का शिकार हैं उनमें सार्कोपेनिया की समस्या जल्दी हो सकती है।  
  • क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी), किडनी की बीमारी, डायबिटीज, कैंसर की बीमारी में भी मांसपेशियां घटने लगती हैं।
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नियमित रूप से स्ट्रेंथ ट्रेनिंग जैसे वेट एक्सरसाइज मांसपेशियों को मजबूत बनाए रखने में मदद करती है। आहार में पर्याप्त प्रोटीन का सेवन, विटामिन-डी और कैल्शियम की सही मात्रा, और सक्रिय जीवनशैली सार्कोपेनिया के जोखिम को कम करती है। समय पर इसकी पहचान और सही आदतें अपनाकर उम्र के साथ भी मांसपेशियों को स्वस्थ और मजबूत रखा जा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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