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Blood Sugar: ब्लड शुगर टेस्ट करने का सही समय क्या है? सही रेंज भी जानिए ताकि डायबिटीज रहे कंट्रोल

Sat, 15 Nov 2025 05:36 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डॉक्टर कहते हैं, एक बार डायबिटीज हो जाने पर आपको जीवनभर इसके मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है। नियमित जांच से समय रहते बढ़ी हुई शुगर की स्थिति पकड़ में आ जाती है, इससे जटिलताएं होने से पहले रोकथाम की जा सकती है।
  • डायबिटीज के मरीजों के लिए फास्टिंग शुगर और पोस्ट मील शुगर जांच जरूरी है। 
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शुगर टेस्ट कब करें? - फोटो : Freepik.com
हाई ब्लड शुगर की समस्या भले ही लोगों में आम होती जा रही है पर ये सेहत के लिए बहुत खतरनाक मानी जाती है। जिन लोगों का शुगर लेवल अक्सर सामान्य से अधिक बना रहता है उनमें कई बार की बीमारियों, जैसे हृदय रोग, किडनी की समस्या, मेटाबॉलिज्म की दिक्कतें देखी जाती हैं। 

डॉक्टर कहते हैं, हाई ब्लड शुगर यानी हाइपरग्लाइसीमिया सिर्फ डायबिटीज की समस्या नहीं है, यह शरीर के तमाम अंगों को भी धीरे-धीरे नुकसान पहुंचाती है। लंबे समय तक शुगर हाई रहने से नसें कमजोर होती जाती हैं, खून के बहाव में रुकावट आने लगती है और कई जानलेवा बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है। यही कारण है कि डॉक्टर शुगर की नियमित जांच करते रहने और इसे कंट्रोल में रखने वाले उपाय करते रहने की सलाह देते हैं। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को डायबिटीज की दिक्कत रही है उन्हें इसको लेकर और भी अलर्ट रहना चाहिए।

आप ग्लूकोमीटर की मदद से घर पर भी आसानी से शुगर की जांच कर सकते हैं, पर सवाल ये है कि शुगर की जांच करने का सबसे अच्छा समय क्या है? सुबह का या शाम का?
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
कब करनी चाहिए शुगर की जांच

डॉक्टर कहते हैं, एक बार डायबिटीज हो जाने पर आपको जीवनभर इसके मैनेजमेंट की जरूरत पड़ती है। नियमित जांच से समय रहते बढ़े हुई शुगर की स्थिति पकड़ में आ जाती है, इससे जटिलताएं होने से पहले रोकथाम की जा सकती है।

अमर उजाला से बातचीत में एंडोक्रोनोलॉजिस्ट डॉ शेखर साहिनी बताते हैं, डायबिटीज के मरीजों के लिए फास्टिंग शुगर और पोस्ट मील शुगर जांच जरूरी है। 

सुबह नाश्ते से पहले शुगर चेक करने से समझा जा सके कि आपका शरीर रातभर में ग्लूकोज का प्रबंधन कैसे करता है। वहीं भोजन के 1-2 घंटे बाद जांच से पता चलता है कि आपका भोजन शरीर में ब्लड शुगर को कैसे प्रभावित करता है। 
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नियमित रूप से करें ब्लड टेस्ट - फोटो : Freepik.com
शुगर की जांच जरूरी

डॉ शेखर कहते हैं, शुगर के लेवल पर निगरानी रखना केवल रीडिंग की बात नहीं है। इसे एक फीडबैक टूल की तरह से देखा जाना चाहिए जो शरीर को बेहतर ढंग से समझने, बेहतर भोजन विकल्प चुनने और हृदय रोग, किडनी की समस्याओं और तंत्रिकाओं में होने वाली दिक्कतों से बचने में मदद करता है।

अगर आपका शुगर लेवल अक्सर सामान्य से अधिक बना रहता है तो समय रहते डॉक्टर से सलाह लेकर इलाज कराएं। जितनी जल्दी इलाज शुरू होता है, डायबिटीज के कारण होने वाली समस्याओं का खतरा उतना ही कम होता है।

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शुगर रेंज कितना होना चाहिए? - फोटो : Adobe Stock
शुगर लेवल कितना होना चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, फास्टिंग शुगर लेवल (भोजन से पहले) 80-100 मिग्रा/डीएल, वहीं भोजन के बाद 140 मिग्रा/डीएल से कम होना चाहिए। इसके अलावा डॉक्टर की सलाह पर हर तीन महीने में HbA1c टेस्ट भी कराते रहना चाहिए, ये 7% से कम होना चाहिए। 

मोटापा के शिकार, दिनभर बैठकर काम करने वाले या जिनके माता-पिता को डायबिटीज की दिक्कत रही है उन्हें शुगर लेवल की नियमित जांच कराते रहने की सलाह दी जाती है।
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डायबिटीज की समस्या और इसके जोखिम - फोटो : Freepik.com
ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट, ब्लड शुगर की जांच में कौन सा ज्यादा भरोसेमंद? 

आपके मन में भी अगर सवाल रहता है कि शुगर की जांच के लिए कौन सा टेस्ट सबसे भरोसेमंद होता है? ग्लूकोमीटर या HBA1C टेस्ट तो इस बारे में डॉक्टरों का कहना है कि ग्लूकोमीटर से आप रोज शुगर की स्थिति जान सकते हैं, ये रीडिंग नोट करने में मददगार है और उस दिन शुगर का स्तर बताता है। वहीं HbA1c  टेस्ट से बीमारी की सटीक जानकारी मिलती है। तीन महीने के औसत शुगर लेवल से जाना जा सकता है कि आपके डायबिटीज की स्थिति क्या है? डायबिटीज के मरीजों को हर तीन महीने में डॉक्टर  HbA1c  टेस्ट कराने की सलाह देते हैं। विस्तार से जानकारी के लिए यहां क्लिक करें



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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