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Rheumatoid Arthritis: सिर्फ गड़बड़ लाइफस्टाइल या मोटापा ही नहीं, शरीर की गलती से भी हो सकता है आर्थराइटिस

Mon, 17 Aug 2026 10:24 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

रूमेटाइड अर्थराइटिस सिर्फ उम्र बढ़ने या खराब लाइफस्टाइल की वजह से होने वाली समस्या नहीं है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से अपने ही जोड़ों पर हमला करने लगती है।
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आर्थराइटिस, गठिया - फोटो : Adobe Stock
आर्थराइटिस का नाम सुनते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में उम्रदराज लोगों की घुटने को पकड़े तस्वीर सामने आती है। पर आर्थराइटिस को सिर्फ बुजुर्गों की समस्या मानने की गलती नहीं करनी चाहिए। ये बीमारी कम उम्र के लोगों को भी तेजी से अपना शिकार बनाती जा रही है।

आमतौर पर लाइफस्टाइल और आनुवांशिकता के अलावा खान-पान में गड़बड़ी को गठिया रोग का प्रमुख कारण माना जाता रहा है। पर क्या आप जानते हैं कि हर जोड़ों का दर्द एक जैसा नहीं होता और हर गठिया सिर्फ गलत लाइफस्टाइल, ज्यादा वजन या उम्र बढ़ने की वजह से नहीं होती। आर्थराइटिस के कुछ प्रकार ऐसे भी हैं, जिनमें शरीर की अपनी प्रतिरक्षा प्रणाली ही गलती से शरीर के स्वस्थ कोशिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगती है। भले ही अपका लाइफस्टाइल ठीक हो फिर भी आप इसका शिकार हो सकते हैं। रूमेटाइड अर्थराइटिस ऐसी ही एक दिक्कत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता वायरस और बैक्टीरिया जैसे बाहरी दुश्मनों से मुकाबला करती है, जब वही गलती से जोड़ों की अंदरूनी परत को अटैक करने लगती है, तो इससे आपको जोड़ों में दर्द, चलने में दिक्कत होने के साथ कई मामलों में उठने तक में परेशानी होने लगती है। पर ये समस्या आखिर होती क्यों है?
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आर्थराइटिस-गठिया की दिक्कतों को जानिए - फोटो : Adobe Stock
रूमेटाइड अर्थराइटिस का बढ़ता खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रूमेटाइड अर्थराइटिस केवल किसी एक घुटने में दर्द का कारण नहीं बनती है, बल्कि  दोनों तरफ के जोड़ों को प्रभावित कर सकती है। कुछ मामलों में इसका असर जोड़ों के अलावा त्वचा, आंखों, फेफड़ों और दिल जैसे दूसरे अंगों पर भी पड़ सकता है।

सबसे बड़ी समस्या यह है कि रूमेटाइड अर्थराइटिस को लोग अक्सर सामान्य गठिया समझ लेते हैं। वैसे तो दोनों में जोड़ों का दर्द और परेशानी होती है, लेकिन इनके पीछे की वजह और शरीर में होने वाली प्रक्रिया अलग होती है।

इसलिए जोड़ों में बार-बार दर्द, सूजन या सुबह लंबे समय तक अकड़न रहती है तो इसे केवल उम्र का असर मानकर छोड़ना ठीक नहीं। सही समय पर पहचान और डॉक्टर की सलाह से बीमारी को नियंत्रित करने में मदद मिल सकती है। 
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आर्थराइटिस की समस्या - फोटो : Freepik.com
रूमेटाइड अर्थराइटिस क्या होता है?

रूमेटाइड अर्थराइटिस एक प्रकार की ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें कई बार घुटनों के अलावा हाथों, कलाई, पैरों और दूसरी जगहों के कई छोटे-बड़े जोड़ भी प्रभावित हो सकते हैं। 
 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  हर तरह के गठिया के पीछे खराब लाइफस्टाइल ही जिम्मेदार नहीं होती। ज्यादा वजन, शारीरिक गतिविधि की कमी, जोड़ों पर ज्यादा दबाव या पुरानी चोट भी कुछ प्रकार के गठिया में जोखिम बढ़ा सकते हैं। 
  • हालांकि रूमेटाइड अर्थराइटिस में शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली ही इसके लिए जिम्मेदार मानी जाती है।
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि धूम्रपान जैसे कुछ कारक रूमेटाइड अर्थराइटिस के खतरे को बढ़ाने वाले सकते हैं। 

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घुटने का दर्द - फोटो : Adobe Stock
रूमेटाइड अर्थराइटिस की पहचान कैसे की जाती है?

रूमेटाइड अर्थराइटिस में भी गठिया की आम समस्याएं जैसे जोड़ों में दर्द, सूजन और अकड़न की दिक्कत हो सकती है। सुबह उठने के बाद जोड़ों में लंबे समय तक जकड़न रहने की समस्या सबसे ज्यादा देखी जाती रही है। इसके अलावा कई बार हाथों की उंगलियों, कलाई, पैरों के छोटे जोड़ों में भी परेशानी हो सकती है। 
 
  • कुछ लोगों को लगातार थकान, कमजोरी या हल्का बुखार जैसा भी महसूस हो सकता है। 
  • कुछ लोगों में त्वचा, आंखों, फेफड़ों और दिल से जुड़ी समस्याएं भी बीमारी के साथ देखी जा सकती हैं। 
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गठिया के दर्द की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
रूमेटाइड अर्थराइटिस और सामान्य गठिया में क्या अंतर है?

रूमेटाइड अर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस दोनों में जोड़ों का दर्द हो सकता है, लेकिन दोनों की वजह अलग होती है। 

1. रूमेटाइड अर्थराइटिस में प्रतिरक्षा प्रणाली की गड़बड़ी के कारण होने वाली समस्या है। जबकि ऑस्टियोआर्थराइटिस जोड़ों के बीच मौजूद कार्टिलेज केघिसने और जोड़ पर लंबे समय तक पड़ने वाले दबाव के कारण होता है।
2. रूमेटाइड अर्थराइटिस में अक्सर शरीर के दोनों तरफ समान जोड़ों में सूजन और अकड़न देखने को मिल सकती है। ऑस्टियोआर्थराइटिस में घुटने, कूल्हे, रीढ़ या हाथों के कुछ जोड़ अधिक प्रभावित हो सकते हैं। 
3. रूमेटाइड अर्थराइटिस किसी भी उम्र में हो सकता है, हालांकि कुछ उम्र वालों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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