फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Nautapa Alert: नौतपा बढ़ा सकता है सेहत के लिए मुश्किलें, बीमार होने से बचने के लिए जानिए क्या करें-क्या नहीं?

Mon, 25 May 2026 07:48 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Nautapa me kya kare: नौतपा के दौरान बढ़ती गर्मी शरीर पर गंभीर असर डाल सकती है। थोड़ी सी भी लापरवाही आपको बीमार कर सकती है। नौतपा क्या है, इसमें किस तरह के खतरे होते हैं, नौतपा के दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं? आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।
विज्ञापन
1 of 5
हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
बीते एक-दो महीनों से जारी गर्मी अब और भी विकराल रूप लेने वाली है। आज यानी 25 मई से नौतपा शुरू हो रहा है, ये 2 जून तक जारी रहेगा। नौतपा यानी खतरनाक ताप वाली गर्मी के नौ दिन। हिंदू पंचांग के मुताबिक इन दिनों में ग्रहों की स्थिति ऐसी होती कि  सूरज की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं। इससे तापमान बढ़ने लगता है।

वैसे तो नौतपा को कई मामलों में जरूरी माना जाता है। इससे खेतों में मौजूद हानिकारक कीड़े-मकौड़े नष्ट हो जाते हैं और फसल खराब नहीं होती। पर सेहत के लिहाज से ये नौ दिन काफी चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। पहले से ही भीषण गर्मी के बीच नौतपा के कारण तापमान में और वृद्धि होने की आशंका है, जो लू और डिहाइड्रेशन जैसी समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।

आमतौर पर कई इलाकों में नौतपा में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार चला जाता है जिससे शरीर के कई अंगों पर खतरनाक असर हो सकता है। अब बड़ा सवाल ये है कि इन दिनों में सेहत का ध्यान कैसे रखें, नौतपा में बीमार होने से बचने के लिए क्या करें और क्या नहीं?
विज्ञापन

2 of 5
नौतपा में हीट स्ट्रोक का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
नौतपा बढ़ा सकता है लू का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नौतपा वैसे तो सभी के लिए खतरनाक माना जाता है, पर इन दिनों में बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाओं और पहले से हार्ट-डायबिटीज के मरीजों को खास सावधानी रखनी चाहिए। शरीर का तापमान सामान्य से अधिक होने पर हीट स्ट्रोक का खतरा बढ़ जाता है, जो जानलेवा भी हो सकती है।
 
  • हीट स्ट्रोक और लू के कारण शरीर में पानी की कमी, थकान, नींद की समस्या और चिड़चिड़ापन काफी बढ़ सकता है।
  • अत्यधिक गर्मी हर साल हजारों लोगों की मौत का कारण बनती है। 
  • हृदय और किडनी रोगियों के लिए यह मौसम खतरनाक माना जाता है। तेज गर्मी में दिल की धड़कन और हार्ट अटैक का खतरा बढ़ सकता है।
विज्ञापन

3 of 5
हीट स्ट्रोक के खतरे को कैसे कम करें? - फोटो : Adobe Stock Photos
नौतपा में सेहत का कैसे ख्याल रखा जाए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, नौतपा के दौरान शरीर को ठंडा रखना, पानी और इलेक्ट्रोलाइट्स वाली चीजें लेना और धूप से बचना बेहद जरूरी है। थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर स्वास्थ्य समस्या पैदा कर सकती है। बच्चे-बुजुर्ग और गर्भवती महिलाओं को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि उनके शरीर की तापमान नियंत्रित करने की क्षमता कमजोर होती है।

लू के खतरे को कम करने के लिए दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें। हल्के रंग के कपड़े पहनना, खूब पानी पीना और शरीर को ठंडा रखना इस दौरान जरूरी माना जाता है।

4 of 5
लू से बचने के लिए क्या करें? - फोटो : Adobe Stock Photos
नौतपा में क्या करें?

नौतपा के दौरान सही दिनचर्या अपनाना बेहद जरूरी है। 
 
  • दिनभर में पर्याप्त मात्रा में पानी पीना चाहिए, भले ही प्यास न लगे। ये हीट स्ट्रोक के खतरे को कम करने के लिए जरूरी है।
  • पानी के अलावा नारियल पानी, नींबू पानी, छाछ और ओआरएस भी लेते रहें। ये शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करते हैं।
  • हल्का भोजन लेना बेहतर माना जाता है। तरबूज, खीरा, खरबूजा और दही जैसी चीजें शरीर को ठंडा रखने में मदद करती हैं। 
  • बाहर निकलते समय छाता, टोपी या गमछे का इस्तेमाल करना चाहिए।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हीटवेव की समस्या - फोटो : Adobe stock
नौतपा के दौरान क्या न करें?

नौतपा के दौरान चूंकि तापमान काफी बढ़ा रहता है इसलिए कुछ सावधानियां बहुत जरूरी हैं।
 
  • तेज धूप में निकलने से बचें, खाली पेट बाहर न निकलें। 
  • अगर किसी काम से बाहर जाना ही है तो शरीर को अच्छे से ढककर रहें। छाता का इस्तेमाल करें।
  • ज्यादा चाय, कॉफी और शराब शरीर में पानी की कमी बढ़ा सकते हैं। 
  • लंबे समय तक बंद और गर्म कमरे में रहना भी खतरनाक हो सकता है।
  • अगर तेज बुखार, चक्कर, बेहोशी, उल्टी या सांस लेने में परेशानी हो तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ये हीट स्ट्रोक के संकेत हो सकते हैं।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें