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Stomach Problems: कहीं आपको भी तो नहीं हो गई है इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या? कैसे करें इसकी पहचान

Thu, 09 Jul 2026 07:22 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इरिटेबल बॉवेल सिंड्रोम पाचन संबंधी समस्या है, जो व्यक्ति की रोजमर्रा की जिंदगी को बुरी तरह प्रभावित कर सकती है। सही खानपान, जीवनशैली में बदलाव, तनाव को नियंत्रित करने जैसे उपाय इसमें आराम दिला सकते हैं।
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पेट की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com
क्या आप भी पेट की दिक्कतों से परेशान रहते हैं? अक्सर पेट में मरोड़-दर्द बना रहता है, खाना खाते ही पेट फूल जाता है और दिनभर बेचैनी महसूस होती रहता है? अगर हां तो इसे सिर्फ कमजोर पाचन या गैस की दिक्कत समझकर नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। कई बार ऐसी परेशानियां इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आईबीएस) जैसी बीमारी का भी संकेत हो सकती है।

इरिटेबल बाउल सिंड्रोम सुनने में भारी-भरकम बीमारी लगती है। इसे पेट और आंतों से जुड़ी क्रॉनिक बीमारी माना जाता है। वैसे तो हर बार पेट की दिक्कत होने का मतलब आईबीएस ही नहीं है लेकिन यदि आपको महीने में तीन-चार बार ऐसे लक्षण महसूस होते हैं और लंबे समय से ऐसी ही समस्या बनी हुई है, तो यह आईबीएस हो सकता है।

आइए जान लेते हैं कि ये समस्या होती क्यों है और इससे कैसे बचा जा सकता है?
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गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
इरिटेबल बाउल सिंड्रोम की समस्या

आईबीएस वाले लोगों को पेट में दर्द और ऐंठन जैसे लक्षण महसूस होते हैं। हालांकि इससे आपके गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ट्रैक्ट के टिश्यू को कोई नुकसान नहीं पहुंचता और न ही इससे कोलन कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ता है। यह एक क्रॉनिक बीमारी है जिसे ज्यादातर लोग अपनी दिनचर्या और खान-पान में बदलाव करके कंट्रोल कर सकते हैं।
 
  • अंतरराष्ट्रीय गैस्ट्रोएंटरोलॉजी संगठन के अनुसार, दुनिया की लगभग 5 से 10 प्रतिशत आबादी आईबीएस से प्रभावित हो सकती है। महिलाओं में इसके मामले पुरुषों की तुलना में अधिक देखे जाते हैं।
  •  वैसे तो ये किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित कर सकता है हालांकि अधिकतर मरीजों में इसकी शुरुआत 50 वर्ष की उम्र से पहले हो जाती है। 
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पाचन स्वास्थ्य की समस्याएं - फोटो : adobe stock images
आईबीएस की पहचान कैसे की जाती है?

आईबीएस का सबसे प्रमुख लक्षण बार-बार होने वाला पेट दर्द है। ये अक्सर शौच के बाद कम हो जाता है। 
 
  • इसके अलावा मरीजों को पेट फूलने, गैस, कब्ज, बार-बार दस्त होने और शौच के बाद भी पेट पूरी तरह साफ न होने का एहसास हो सकता है।
  • आईबीएस में आमतौर पर शौच के साथ खून आने, लगातार बुखार, वजन कम होने और एनीमिया जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।


क्यों होती है ये दिक्कत?

वैज्ञानिक अभी तक आईबीएस का कोई एक निश्चित कारण समझ नहीं सके हैं, हालांकि शोध बताते हैं कि गट ब्रेन एक्सिस में गड़बड़ी से इसका खतरा हो सकता है। इसमें मस्तिष्क और आंतों के बीच संदेशों का आदान-प्रदान सामान्य तरीके से नहीं हो पाता।
 
  • आंतों की असामान्य गति, आंतों के माइक्रोबायोम में बदलाव और कुछ लोगों में पेट के संक्रमण के बाद ये समस्या हो सकती है।
  • तनाव-चिंता, अनियमित भोजन, नींद की कमी और ज्याद फैट-मसालेदार भोजन से भी इसका खतरा बढ़ जाता है।
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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
इससे कैसे करें बचाव?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सही जीवनशैली और उपचार से इसके लक्षणों को नियंत्रित किया जा सकता है। अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के अनुसार, मरीज की समस्या के अनुसार उपचार तय किया जाता है। संतुलित भोजन करना, नियमित समय पर खाना खाने, पर्याप्त मात्रा में पानी पीने जैसे उपाय इसमें मददगार हो सकते हैं। 

तनाव कम करने के लिए नियमित व्यायाम, योग-ध्यान से भी कई मरीजों में लक्षण कम करने में मदद मिल सकती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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