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Blood Pressure: किस हाथ की बीपी रीडिंग सबसे अच्छी होती है? और किन बातों का रखें ध्यान, यहां जानिए सबकुछ

Thu, 09 Jul 2026 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आखिर सही और सबसे सटीक ब्लड प्रेशर रीडिंग पाने के लिए कौन-सा हाथ चुनना चाहिए, पहली बार दोनों हाथों में बीपी क्यों मापना चाहिए और एक्सपर्ट्स किन बातों का पालन करने की सलाह देते हैं?
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हाई ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
हाई ब्लड प्रेशर अब सिर्फ बढ़ती उम्र की बीमारी नहीं रही है, कम उम्र में यहां तक कि 20 से कम आयु वालों में भी ये दिक्कत बढ़ती देखी जा रही है।

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ऑफिस का तनाव, घंटों बैठे रहने की आदत, जंक फूड्स, ज्यादा नमक का सेवन और मोटापा जैसी स्थितियां ब्लड प्रेशर की समस्या को बढ़ाती जा रही हैं। हाई ब्लड प्रेशर को 'साइलेंट किलर' कहा जाता है, क्योंकि कई बार यह बिना किसी स्पष्ट लक्षण के शरीर के अंदर दिल, दिमाग, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचाता रहता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में लगभग 1.28 अरब वयस्क हाई ब्लड प्रेशर से प्रभावित हैं और इनमें से लगभग आधे लोगों को यह पता ही नहीं होता कि उनका बीपी बढ़ा हुआ है। भारत में भी स्थिति तेजी से गंभीर हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर जांच और सही जीवनशैली अपनाकर इस बीमारी से होने वाले गंभीर खतरे को कम किया जा सकता है।

क्या आप भी हाई ब्लड प्रेशर का शिकार हैं?
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हाई ब्लड प्रेशर हो सकता है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
नियमित रूप से बीपी की करें जांच

डॉक्टर कहते हैं, जिस तरह से ये दिक्कत सभी उम्र वालों में देखी जा रही है ऐसे में सभी लोगों को नियमित रूप से बीपी रीडिंग लेते रहना चाहिए। इससे बीमारी के खतरे को समझा जा सकता है। हालांकि, सिर्फ बीपी मशीन खरीद लेना या कभी-कभार जांच करा लेना पर्याप्त नहीं है। अगर ब्लड प्रेशर गलत तरीके से मापा जाए तो उसकी रीडिंग भी गलत आ सकती है, जिससे बीमारी का सही आकलन नहीं हो पाता।

डॉक्टर कहते हैं, बीपी मापने से पहले शरीर की स्थिति, बैठने का तरीका और कैफीन जैसी छोटी-छोटी बातें भी रीडिंग को प्रभावित करती हैं। इसलिए यह जानना बेहद जरूरी है कि ब्लड प्रेशर कब, कैसे और किस हाथ में मापना चाहिए? ताकि सही रीडिंग मिले और समय रहते इलाज शुरू किया जा सके।
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Freepik.com
पहले जानिए नियमित ब्लड प्रेशर जांच क्यों जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हाई ब्लड प्रेशर वाले अधिकांश लोगों में लंबे समय तक कोई लक्षण दिखाई नहीं देते। व्यक्ति सामान्य महसूस करता रहता है, लेकिन अंदर ही अंदर बढ़ा हुआ रक्तचाप धमनियों, हृदय, मस्तिष्क, किडनी और आंखों को नुकसान पहुंचाता रहता है।
 
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की गाइडलाइन के अनुसार, 18 वर्ष या उससे अधिक उम्र के प्रत्येक व्यक्ति को समय-समय पर ब्लड प्रेशर की जांच करानी चाहिए। 
  • यदि किसी व्यक्ति का बीपी सामान्य है तो भी नियमित अंतराल पर जांच जरूरी है। 
  • जबकि हाई बीपी, डायबिटीज, मोटापा या हृदय रोग के जोखिम वाले लोगों को डॉक्टर की सलाह के अनुसार अधिक बार जांच करनी चाहिए।
  • नियमित जांच से बीमारी की शुरुआती अवस्था में पहचान हो जाती है, जिससे हार्ट अटैक-स्ट्रोक जैसे गंभीर खतरों को कम किया जा सकता है।

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सही तरीके से लें बीपी की रीडिंग - फोटो : अमर उजाला
किस हाथ में आती है अच्छी रीडिंग?

डॉक्टर कहते हैं, अक्सर लोगों के मन में ये सवाल बना रहता है कि ब्लड प्रेशर दाएं हाथ में मापना चाहिए या बाएं हाथ में?
 
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, शुरुआती जांच में दोनों हाथों की रीडिंग लें। फिर दोनों रीडिंग का औसत निकालें और उसे ही अपना ब्लड प्रेशर मानें। 
  • यदि दोनों हाथों में अंतर मिलता है तो जिस हाथ में ब्लड प्रेशर अधिक हो, भविष्य की जांच उसी हाथ में की जानी चाहिए ताकि रीडिंग की तुलना सही तरीके से हो सके।
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ब्लड प्रेशर की जांच - फोटो : Adobe Stock
सही रीडिंग लेने के लिए इन बातों का भी रखें ध्यान

ब्लड प्रेशर मापने का तरीका गलत होने पर भी रीडिंग गलत आ सकती है। 
 
  • अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार, जांच से कम से कम 30 मिनट पहले चाय-कॉफी, धूम्रपान-शराब और भारी व्यायाम से बचना चाहिए।
  • बीपी मापने से पहले कम से कम 5 मिनट शांत बैठकर आराम करना चाहिए।
  • कुर्सी पर बैठते समय पीठ को सहारा दें, पैर जमीन पर सीधे रखें और पैर क्रॉस न करें। 
  • जिस हाथ में बीपी मापा जा रहा हो, उसे मेज पर इस तरह रखें । सही आकार का कफ इस्तेमाल करना भी जरूरी है, क्योंकि छोटा या बड़ा कफ गलत रीडिंग दे सकता है।



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स्रोत:
Home Blood Pressure Monitoring


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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