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Insulin Resistance: शरीर को धीरे-धीरे खोखला बना देती है इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति, आप भी न हो जाएं शिकार?

Sat, 16 Aug 2025 10:08 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इसका शररी पर कई प्रकार से असर हो सकता है।
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डायबिटीज और इंसुलिन रेजिस्टेंस की समस्या - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, जिसका जोखिम लगातार बढ़ता जा रहा है। भारत धीरे-धीरे 'डायबिटीज कैपिटल' बनाता जा रहा है, यहां सभी उम्र के लोगों में इस बीमारी के मामले बढ़ रहे हैं। डायबिटीज का आप जब भी जिक्र सुनते होंगे तो इंसुलिन रेजिस्टेंस का नाम जरूर आता होगा। क्या आप जानते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस होता क्या है और इसका शरीर पर क्या असर होता है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, इंसुलिन हमारे शरीर में कई कार्यों के लिए जरूरी एक अति आवश्यक हार्मोन है। यह हार्मोन हमारी कोशिकाओं में शुगर को अंदर जाने देता है, ताकि वह ऊर्जा बन सके। लेकिन जब इंसुलिन हार्मोन्स का असर कम हो जाता है या इसका प्रभाव नहीं होता है तो इस स्थिति को इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस चुपचाप बढ़ता है। शुरू में इससे न कोई दर्द होता है, न बड़ा लक्षण दिखता है हालांकि दीर्घकालिक रूप में ये शरीर को कई प्रकार से प्रभावित करने वाली समस्या हो सकती है और इसके कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस को सही समय पर पहचान लिया जाए, तो लाइफस्टाइल में छोटे-छोटे बदलाव करके इसे रोका जा सकता है। आइए जानते हैं कि इंसुलिन रेजिस्टेंस के कारण किस तरह की समस्याएं हो सकती हैं और इससे बचे रहने के लिए आप क्या उपाय कर सकते हैं?
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
पहले इंसुलिन के बारे में जान लीजिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, इंसुलिन एक हार्मोन है। हमारे अग्न्याशय द्वारा इसका निर्माण होता है। इसका सबसे बड़ा काम है भोजन से प्राप्त होने वाले शुगर (ग्लूकोज) को कोशिकाओं तक पहुंचाना।

जब हम खाना खाते हैं, तो शरीर उसे तोड़कर ग्लूकोज में बदल देता है। यही ग्लूकोज खून में घुल जाता है और खून से हमारे शरीर की कोशिकाओं तक पहुंचता है। लेकिन कोशिकाएं सीधे इस शुगर को नहीं ले सकतीं, यहीं इंसुलिन काम आता है। इंसुलिन कोशिकाओं में शुगर के प्रवेश को आसान बनाता है ताकि वे अंदर जाकर ऊर्जा में बदल सकें।

अगर इंसुलिन ठीक से काम न करे, तो शुगर कोशिकाओं में नहीं जाएगी और खून में ही बढ़ने लगेगी। इससे ब्लड शुगर हाई हो जाती है और डायबिटीज जैसी बीमारियां होने लगती हैं।
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इंसुलिन रेजिस्टेंस का शरीर पर होने वाला असर - फोटो : Adobe stock photos
अध्ययनों से पता चलता है कि इंसुलिन हार्मोन हमारे शरीर में ऊर्जा के निर्माण के लिए बहुत जरूरी है। 

अब समझिए इंसुलिन रेजेस्टेंस क्या है?

इंसुलिन रेजिस्टेंस का मतलब है कि हमारी कोशिकाएं इंसुलिन के संकेतों को नहीं सुन रही हैं। सरल भाषा में समझें तो इंसुलिन रेजिस्टेंस एक ऐसी स्थिति है जिसमें शरीर की कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति ठीक से प्रतिक्रिया नहीं करती हैं, जिससे रक्त में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। ये स्थिति सिर्फ हाई शुगर का कारण नहीं बनती हैं बल्कि धीरे-धीरे मोटापा, हृदय रोग और फैटी लिवर तक का कारण बन सकती है।

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डायबिटीज की गंभीर स्थिति - फोटो : Freepik.com
इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत हो क्यों है?

अब सवाल है कि ये समस्या क्यों होती है? इस बारे में एंडोक्रिनोलॉजिस्ट डॉ राजीव सिंह बताते हैं, इंसुलिन रेजिस्टेंस धीरे-धीरे हमारी लाइफस्टाइल और गड़बड़ आदतों के कारण बनती है। जिन लोगों के पेट के आस-पास अधिक चर्बी होती है उनको इसका खतरा अधिक रहता है। बेली फैट की समस्या इंसुलिन को ब्लॉक करने वाले कैमिकल्स रिलीज करती है, जिससे इंसुलिन का कार्य प्रभावित हो जाता है।

इसके अलावा जंक फूड्स और चीनी वाली चीजें जैसे कोल्ड ड्रिंक, तैलीय और प्रोसेस्ड फूड खाने से भी इंसुलिन रेजिस्टेंस की दिक्कत हो सकती है। 
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इंसुलिन रेजिस्टेंस से बचाव कैसे करें? - फोटो : Adobe stock
फिर इससे बचाव के लिए क्या करें?

डॉक्टर बताते हैं, जीवनशैली और खानपान की आदतों में बदलाव लाकर इसे रोका जा सकता है। स्वस्थ आहार अपनाना, नियमित शारीरिक गतिविधि करना, वजन को कंट्रोल रखना और तनाव-नींद को नियंत्रित करना आपके लिए जरूरी है।
  • इस समस्या से बचे रहने के लिए पौष्टिक खाद्य पदार्थों पर ध्यान दे। आहार में फलों-सब्जियों, लीन प्रोटीन और साबुत अनाज को शामिल करें। इसके अलावा प्रोसेस्ड चीजों से बचाव करें। 
  • जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये समस्या रही है उन्हें पहले से ही सावधानी बरतनी चाहिए।
  • इंसुलिन रेजिस्टेंस की गंभीर स्थिति में रोगियों को नियमित रूप से इंसुलिन का इंजेक्शन लेने की आवश्यकता हो सकती है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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