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Cholestrol: गुड-बैड कोलेस्ट्रॉल क्या है, इसका क्या काम होता है और मात्रा कितनी होनी चाहिए? जानिए सबकुछ

Tue, 09 Sep 2025 10:30 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल, बाहर का तला-भुना खाना, व्यायाम की कमी और तनाव, ये सब धीरे-धीरे हमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल बढ़ा देते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को कम कर देते हैं।
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बैड-गुड कॉलेस्ट्रॉल - फोटो : Adobe Stock
Good Vs Bad Cholesterol: रोजमर्रा की जिंदगी में हम जो कुछ भी करते हैं उसका असर सीधे हमारे शरीर पर पड़ता है। यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को सावधानी बरतते रहने की सलाह देते हैं। गड़बड़ लाइफस्टाइल और खराब खानपान के कारण जो समस्या तेजी से बढ़ती जा रही है उनमें से कोलेस्ट्रॉल भी एक है। कोलेस्ट्रॉल वैसे तो हमारे शरीर के लिए जरूरी होता है पर अगर ये जरूरत से ज्यादा हो जाए तो दिल की सेहत को नुकसान पहुंचा सकता है। 

भागदौड़ भरी लाइफस्टाइल, बाहर का तला-भुना खाना, व्यायाम की कमी और तनाव, ये सब धीरे-धीरे हमारे शरीर में बैड कोलेस्ट्रॉल यानी एलडीएल बढ़ा देते हैं और गुड कोलेस्ट्रॉल यानी एचडीएल को कम कर देते हैं।

कौन सा कोलेस्ट्रॉल अच्छा है, कौन सा नुकसान करता है, इसकी मात्रा कितनी होनी चाहिए, ये सब समझकर आप अपने शरीर को सुरक्षित रख सकते हैं। आइए इस बारे में विस्तार से समझते हैं।
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हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : Freepik.com
पहले जानिए कोलेस्ट्रॉल क्या है?

कोलेस्ट्रॉल एक प्रकार का वसायुक्त पदार्थ या फैट है जो हमारे शरीर में कोशिकाओं की झिल्ली बनाने, हार्मोन निर्माण और पाचन के लिए जरूरी होता है। लेकिन जब शरीर में इसका स्तर अधिक हो जाता है, तो यह सेहत के लिए खतरा बन सकता है। खासकर आज की जीवनशैली, जंक फूड, तनाव, और शारीरिक गतिविधि की कमी के कारण कई लोग उच्च कोलेस्ट्रॉल की समस्या से जूझ रहे हैं।

हाई कोलेस्ट्रॉल की वजह से दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। यह धमनियों की दीवारों पर जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है, जिससे रक्त का प्रवाह बाधित होता है। परिणामस्वरूप हार्ट अटैक और स्ट्रोक जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, यह समझना जरूरी है कि कोलेस्ट्रॉल पूरी तरह से खराब नहीं होता। यह शरीर के लिए आवश्यक है, लेकिन जब इसका संतुलन बिगड़ता है तभी यह सेहत के लिए खतरा बनता है। कोलेस्ट्रॉल दो प्रकार का होता है– गुड कोलेस्ट्रॉल और बैड कोलेस्ट्रॉल। दोनों का शरीर में अलग-अलग काम होता है, इसलिए इनके संतुलन को समझना जरूरी है।
 
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कोलेस्ट्रॉल का हृदय स्वास्थ्य पर असर - फोटो : adobe stock
क्या होता है बैड कोलेस्ट्रॉल

जैसा कि नाम से ही पता चलता है, बैड कोलेस्ट्रॉल (एलडीएल) नुकसानदायक है, यह धमनियों में जमा होकर उन्हें संकरा कर देता है। इससे रक्त प्रवाह कम हो सकता है और दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जब एलडीएल का स्तर ज्यादा हो, तो इसे कम करने के लिए भोजन में संतुलन और व्यायाम के साथ दवाओं की जरूरत हो सकती है।

डॉक्टर बताते हैं कि एलडीएल का स्तर 100 mg/dL से कम होना चाहिए। 130-159 mg/dL ‘बॉर्डरलाइन’ माना जाता है और 160 mg/dL से ऊपर खतरनाक है।
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हृदय को स्वस्थ रखने वाला कोलेस्ट्रॉल - फोटो : adobe stock images
गुड कोलेस्ट्रॉल क्या है?

यहां भी नाम से स्पष्ट होता है कि ये गुड कोलेस्ट्रॉल (एचडीएल) है। यह शरीर में जमा अतिरिक्त फैट को साफ करने में मदद करता है और हृदय को स्वस्थ रखता है। एचडीएल जितना ज्यादा होगा, दिल की सेहत उतनी ही अच्छी मानी जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार एचडीएल का स्तर 60 mg/dL या उससे ऊपर होना चाहिए। 40 mg/dL से कम होने पर दिल की बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है।

डॉक्टर कहते हैं, स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर बैड कोलेस्ट्रॉल को कम और गुड कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाया जा सकता है। कम उम्र से ही संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम, धूम्रपान से बचाव, वजन नियंत्रित रखना और तनाव कम करना आपके लिए मददगार हो सकता है। वहीं जिन लोगों को बैड कोलेस्ट्रॉल अक्सर बढ़ा रहता है उन्हें डॉक्टर की सलाह से दवा जरूर लेनी चाहिए।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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