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Brain Dead: क्यों होती है ब्रेन डेथ, जानिए इसके लक्षण और कारण, क्या ब्रेन डेथ के बाद व्यक्ति ठीक हो सकता है?

Fri, 26 Aug 2022 02:42 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ब्रेन डेड की स्थिति के बारे में जानिए - फोटो : Pixabay
पिछले कुछ हफ्तों में हम सभी ने खबरों के माध्यम से कुछ मेडिकल टर्म्स के बारे में जरूर सुना होगा। राजधानी दिल्ली के सबसे कम उम्र के ऑर्गन डोनर (16 माह) बने निशांत को डॉक्टर्स ने ब्रेन डेड घोषित किया था। एम्स दिल्ली में भर्ती मशहूर कॉमेडियन राजू श्रीवास्तव को भी ब्रेन डेड घोषित किए जाने की खबरें सामने आई थीं, हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं है। ब्रेन डेड की स्थिति क्या होती है, क्या यह मौत का सूचक है? ऐसे कई सवाल हम सभी के मन में जरूर होंगे। इस लेख में हम ब्रेन डेथ के बारे में विस्तार से समझने की कोशिश करेंगे।

डॉक्टर्स बताते हैं, ब्रेन डेथ को मेडिकल की भाषा में मृत्यु के कानूनी परिभाषा का तौर पर जाना जाता है। किसी को ब्रेन डेड घोषित करने का मतलब है कि उसके मस्तिष्क ने सभी तरह से कार्य करने बंद कर दिए हैं, यानि कि शरीर को सिग्नल भेजने से लेकर समझने या बोलने की क्षमता तक हर किसी शारीरिक और मानसिक क्रिया पर मस्तिष्क द्वारा विराम लग गया है।

ब्रेन डेथ को ठीक नहीं किया जा सकता है, यह स्थाई स्थिति है। आखिर क्यों और कैसे होती है ब्रेन डेथ की स्थिति? आइए इस बारे में समझते हैं।
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ब्रेन डेड में मस्तिष्क हो जाता है निष्क्रिय - फोटो : istock

ब्रेन डेथ की स्थिति के बारे में जानिए


मस्तिष्क पर गंभीर चोट लगने, गंभीर स्ट्रोक या कुछ ऐसी शारीरिक स्थितियां जिसमें मस्तिष्क गंभीर रूप से प्रभावित होता हो, यह ब्रेन डेथ का कारण बन सकती हैं। जब डॉक्टर किसी को ब्रेन डेड घोषित कर देते हैं तो इसका मतलब होता है कि  मस्तिष्क अब किसी भी तरह से काम नहीं कर रहा है। यदि वह व्यक्ति वेंटिलेटर पर है तो कृत्रिम तरीक से सांस देकर हृदय, किडनी, लिवर आदि अंगों को जीवित रखा जा सकता है। हालांकि यह अंग भी तभी तक जीवित रह सकते हैं, जब तक व्यक्ति वेंटिलेटर पर है और उसके शरीर में कृत्रिम तरीक से ऑक्सीजन पहुंचाई जा रही है।

इसे ऐसे भी समझा जा सकता है कि ब्रेन डेथ का मतलब मस्तिष्क की तो मृत्यु हो गई है पर कृत्रिम तरीक से ऑक्सीजन के माध्यम से शरीर के कुछ अंग काम कर रहे हैं। 
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मस्तिष्क को गंभीर चोट की स्थिति - फोटो : Pixabay

ब्रेन डेथ क्यों होता है?

कई स्थितियां है जिनके कारण व्यक्ति की ब्रेन डेथ हो सकती है। 
  • मस्तिष्क पर गंभीर चोट ( वाहन दुर्घटना के कारण सिर में गंभीर चोट, बंदूक की गोली का घाव, सिर के बल तेजी से गिरने से लगी चोट)
  • सेरेब्रोवास्कुलर इंजरी (स्ट्रोक या एन्यूरिज्म)
  • एनोक्सिया (दिल का दौरा पड़ना जिसके कारण मस्तिष्क में रक्त प्रवाह/ऑक्सीजन की कमी आ जाती है।)
  • मस्तिष्क का ट्यूमर।

डॉक्टर्स कहते हैं, ब्रेन डेथ आकस्मिक चोट या गंभीर बीमारी से हो सकती है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण मस्तिष्क में होने वाले रक्तस्राव की स्थिति भी इसका कारण हो सकती है।

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ब्रेन डेथ की स्थिति के लिए होता है परीक्षण - फोटो : istock

ब्रेन डेथ की स्थिति के क्या लक्षण होते हैं?


डॉक्टर्स बताते हैं कि वैसे तो किसी व्यक्ति को ब्रेन डेथ घोषित करने से पहले कई प्रकार के परीक्षणों के आधार पर पुष्टि की जाती है, पर कुछ स्थितियां और लक्षण ऐसे हैं जिससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि व्यक्ति ब्रेन डेड हो चुका है।
  • पुलतियों का प्रकाश पर प्रतिक्रिया न देना।
  • दर्द होने पर कोई प्रतिक्रिया न दिखना ।
  • आंख की सतह को छूने पर आंखों का न झपकना (कॉर्नियल रिफ्लेक्स)।
  • कान में बर्फ का पानी डालने पर भी आंखों का न हिलना।
  • इलेक्ट्रोएन्सेफलोग्राम परीक्षण में मस्तिष्क की कोई गतिविधि न दिखाना।

 
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ब्रेन डेथ को ठीक नहीं किया जा सकता - फोटो : pixa

क्या ब्रेन डेथ को ठीक किया जा सकता है?


डॉक्टर्स बताते हैं, ब्रेन डेथ की स्थिति स्थाई है इसे ठीक नहीं किया जा सकता है। किसी रोगी के ब्रेन डेड घोषित होने के बाद परिवार के साथ बात करके अंगदान का निर्णय लिया जाता है, जिससे व्यक्ति के जीवित अंग किसी और के काम आ सकें। वेंटिलेटर से हटने के बाद जैसी ही शरीर को ऑक्सीजन मिलना बंद हो जाता है, शरीर के अन्य अंग भी निष्क्रिय होने लगते हैं और उसे मृत मान लिया जाता है।


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स्रोत और संदर्भ
Understanding Brain Death

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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