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Biological Clock: क्या होती है जैविक घड़ी? स्वस्थ जीवन जीने के लिए क्या है बॉडी क्लॉक का महत्व, यहां जानें

Mon, 07 Jul 2025 02:24 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

जैविक घड़ी शरीर के कार्यों को दिन-रात के चक्र के साथ समन्वयित करती है। इसका मुख्य कार्य हमारे सोने-जागने के पैटर्न, भूख, पाचन क्रिया, विभिन्न हार्मोनों के स्राव और शरीर के तापमान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करना है। आइए इस लेख में इसके बारे में विस्तार से जानते हैं।
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बॉयोलाजिकल क्लॉक - फोटो : Adobe Stock
What is Biological Clock? : रात होते ही हमें अपने आप नींद आने लगती है, और सुबह जैसे ही उजाला होता है हम जाग जाते हैं। उठने के बाद हमें अपनी दैनिक क्रियाएं करनी होती हैं और फिर हमें भोजन करने की इच्छा होती है। आपने ध्यान दिया होगा कि हम ये सभी काम एक तय समय पर ही करते हैं। हमें कब क्या करना है, हमारा शरीर खुद ही समझ जाता है, और इन सब के पीछे काम करती है हमारे शरीर की जैविक घड़ी।

दरअसल, हमारे शरीर के अंदर एक खास सिस्टम होता है, जिसे जैविक घड़ी कहते हैं। इसे सर्केडियन रिदम या बॉडी क्लॉक जैसे नामों से भी जाना जाता है। यह घड़ी हमारे शरीर और दिमाग को 24 घंटे के एक तय टाइम-टेबल पर चलाने में मदद करती है।

जैविक घड़ी का मुख्य कार्य हमारे सोने-जागने के पैटर्न, भूख, पाचन क्रिया, कई हार्मोनों के स्राव और शरीर के तापमान जैसे महत्वपूर्ण कार्यों को नियंत्रित करना है। यह विशेष रूप से उजाला और अंधेरा के आधार पर काम करती है, जैसे सुबह की रोशनी हमें जागने का संकेत देती है और रात का अंधेरा हमें सोने का संकेत देती है। एक स्वस्थ और संतुलित जीवन के लिए इस जैविक घड़ी का सही तालमेल बनाए रखना बेहद जरूरी है, क्योंकि इसका असंतुलन कई स्वास्थ्य समस्याओं को जन्म दे सकता है।
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बॉयोलाजिकल क्लॉक - फोटो : Adobe Stock
जैविक घड़ी कैसे काम करती है?
हमारी जैविक घड़ी शरीर के कामों को दिन-रात के हिसाब से चलाती है। सुबह सूरज की रोशनी हमारे दिमाग को जगाती है, जिससे कॉर्टिसोल जैसे हार्मोन ज्यादा बनते हैं और हम तरोताजा महसूस करते हैं। रात में अंधेरा होने पर मेलाटोनिन हार्मोन बढ़ता है, जिसकी वजह से हमें नींद आने लगती है। अगर हम देर रात तक जागते हैं, अनियमित सोते हैं, या बहुत ज्यादा स्क्रीन देखते हैं, तो ये आदतें इस चक्र को बिगाड़ सकती हैं। इसका बुरा असर हमारी संपूर्ण सेहत पर पड़ता है, जैसे हमें थकान, चिड़चिड़ापन होने लगता है, साथ ही हमारा इम्यूनिटी सिस्टम भी कमजोर होने लगता है।

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बॉयोलाजिकल क्लॉक - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य के लिए क्यों जरूरी है?
जैविक घड़ी का संतुलन शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। यह नींद की गुणवत्ता को बेहतर बनाती है, जो तनाव, चिंता और अवसाद को कम करती है। यह पाचन तंत्र को नियंत्रित करती है, जिससे खाना समय पर खाने से पाचन एंजाइम्स बेहतर काम करते हैं। यह हार्मोन जैसे इंसुलिन और कॉर्टिसोल को संतुलित रखती है, जो डायबिटीज और अन्य हार्मोनल समस्याओं को रोकने में मदद करता है।

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बॉयोलाजिकल क्लॉक - फोटो : Adobe Stock
असंतुलन के नुकसान
जब जैविक घड़ी बिगड़ती है, तो कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अनियमित नींद से मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग और कमजोर इम्यूनिटी का जोखिम बढ़ता है। देर रात तक मोबाइल या लैपटॉप का उपयोग मेलाटोनिन के स्राव को कम करता है, जिससे नींद की कमी होती है। अनियमित खानपान मेटाबॉलिक सिंड्रोम का कारण बन सकता है। लंबे समय तक जैविक घड़ी का असंतुलन मानसिक स्वास्थ्य पर भी असर डालता है, जैसे चिड़चिड़ापन और एकाग्रता में कमी।
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डॉक्टर - फोटो : Freepik.com
जैविक घड़ी को स्वस्थ रखने के उपाय
जैविक घड़ी को संतुलित रखने के लिए नियमित दिनचर्या अपनाएं। रोजाना एक ही समय पर सोएं और जागें। सुबह सूरज की रोशनी लें और रात में नीली रोशनी (मोबाइल, टीवी) से बचें। निश्चित समय पर भोजन करें और रात को हल्का खाना खाएं। नियमित व्यायाम, खासकर सुबह, और योग या ध्यान तनाव को कम करते हैं। अगर नींद या अन्य समस्याएं बनी रहें, तो डॉक्टर से सलाह लें। नियमित जैविक घड़ी स्वस्थ, ऊर्जावान और बीमारी-मुक्त जीवन की कुंजी है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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