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ADHD Risk: बच्चे का नहीं लग रहा पढ़ाई में मन, बार-बार भूल जाता है चीजें? कहीं ये एडीएचडी तो नहीं

Mon, 22 Jun 2026 06:56 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

एडीएचडी किसी व्यक्ति की बुद्धिमत्ता का पैमाना नहीं है। उचित सहायता, व्यवहारिक रणनीतियों, स्कूल और परिवार के सहयोग तथा जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय उपचार से प्रभावित व्यक्ति सामान्य और सफल जीवन जी सकता है।
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बच्चों में एडीएचडी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपके बच्चे को भी ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई होती है, एक काम में ज्यादा देर तक मन नहीं लगा पाता, अत्यधिक सक्रिय रहता है? अगर हां तो तुरंत किसी डॉक्टर से संपर्क करें, ये एडीएचडी की समस्या का संकेत हो सकता है।

एडीएचडी यानी अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिसऑर्डर, मस्तिष्क से जुड़ी तंत्रिका संबंधित विकार है। एडीएचडी के शिकार बच्चों को आमतौर पर शरारती, अनुशासनहीन मान लिया जाता है।  यह समस्या केवल बच्चों तक सीमित नहीं है। किशोरों और वयस्कों में भी इसके लक्षण बने रह सकते हैं जिसका उनकी पढ़ाई, नौकरी, रिश्तों तथा दैनिक जीवन पर प्रभाव पड़ सकता है।

हाल के वर्षों में एडीएचडी के मामलों में बढ़ोतरी की खूब चर्चा रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि इसका एक कारण बेहतर जागरूकता और निदान भी है। अनुमानित तौर पर 7.1% बच्चे और किशोर प्रभावित हैं। भारत की विशाल आबादी को देखते हुए, इस दर का मतलब है कि लाखों बच्चे इस स्थिति के साथ जी रहे हैं। 
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एडीएचडी की समस्या - फोटो : Freepik.com
एडीएचडी को समझिए

एडीएचडी न्यूरोडेवलपमेंटल डिसऑर्डर है जिसमें ध्यान बनाए रखने में कठिनाई, अत्यधिक सक्रियता और आवेगपूर्ण व्यवहार जैसे लक्षण हो सकते हैं। हर मरीज में तीनों लक्षण हों ये भी जरूरी नहीं होते। 
 
  • कुछ लोगों में केवल ध्यान केंद्रित करने में दिक्कत होती है, जबकि कुछ में हाइपरएक्टिविटी अधिक दिखाई देती है।
  • यह स्थिति बचपन में शुरू होती है और कई लोगों में वयस्क अवस्था तक बनी रह सकती है।
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मस्तिष्क में होने वाले बदलावों को पहचानिए - फोटो : Freepik.com
क्यों होती है ये समस्या?

एडीएचडी की दिक्कत क्यों होती है इसे पूरी तरह से समझा नहीं जा सका है।
 
  • मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि इसका जेनेटिक्स और दिमाग के विकास से गहरा संबंध है। जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को ये दिक्कत रही है, उनमें खतरा ज्यादा हो सकता है।
  • दिमाग की बनावट का भी इसमें बड़ा योगदान माना जाता है।
  • कम उम्र में जहरीले पदार्थों जैसे लेड या रसायनों के अधिक संपर्क में आना भी इसका खतरा बढ़ा देता है।
  • समय से पहले डिलीवरी या जन्म के समय कम वजन वाले बच्चों में भी ये दिक्कत ज्यादा देखी जाती रही है।

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मोबाइल से होने वाले नुकसान - फोटो : Freepik.com
क्या ज्यादा मोबाइल चलाने से एडीएचडी होता है?

अध्ययनों से पता चलता है मोबाइल या सोशल मीडिया सीधे एडीएचडी का कारण नहीं बनते हैं। हालांकि अत्यधिक स्क्रीन का उपयोग, नींद की कमी की समस्या का आपके ध्यान और व्यवहार पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे एडीएचडी के लक्षण ट्रिगर हो सकते हैं।
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बच्चों में एडीएचडी की समस्या - फोटो : Freepik.com
बच्चे को ये समस्या है तो क्या करें?

एडीएचडी वाले बच्चों को होमवर्क पूरा करने, चीजों को याद रखने और कक्षा में ध्यान बनाए रखने में कठिनाई हो सकती है। यदि समय रहते सहायता न मिले तो आत्मविश्वास कम हो सकता है।

वैसे तो एडीएचडी का कोई इलाज नहीं है और इसे पूरी तरह ठीक नहीं किया जा सकता। लेकिन इसे अच्छी तरह से मैनेज किया जा सकता है। दवा, बिहेवियरल थेरेपी और जीवनशैली से जुड़े तरीकों के सही तालमेल से इसके लक्षणों को काफी हद तक कम किया जा सकता है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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