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Swine Flu Alert: कर्नाटक में H1N1 से एक व्यक्ति की मौत, जानिए कैसे फैलता है संक्रमण और कैसे करें बचाव

Mon, 22 Jun 2026 05:24 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

कर्नाटक के उत्तर कन्नड़ जिले के ग्रामीण क्षेत्र कारवार के 41 वर्षीय एक व्यक्ति की एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण से मौत हो गई है। इस घटना ने राज्य में मौसमी फ्लू (सीजनल इन्फ्लूएंजा) को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ा दी है।
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स्वाइन फ्लू का संक्रमण - फोटो : Amarujala.com/AI
केरल में शिगेला और निपाह के जारी जोखिमों के बीच अब कर्नाटक में संक्रामक रोग के बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट किया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सोमवार को कर्नाटक के उत्तर कन्नड़  जिले में एक व्यक्ति की एच1एन1 (स्वाइन फ्लू) संक्रमण से मौत हो गई है। मृतक की उम्र  41 वर्ष थी। रविवार  को उसे मंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उसकी मौत हुई है। 

एहतियात के तौर पर स्वास्थ्य विभाग उसके परिवार के करीबी सदस्यों की निगरानी कर रहा है, ताकि संक्रमण के फैलने की आशंका को रोका जा सके।

इस मामले के सामने आने के बाद लोगों को अलर्ट किया गया है। स्वाइन फ्लू एक संक्रामक श्वसन रोग यानी सांस से जुड़ी ऐसी बीमारी जो एक व्यक्ति से दूसरे में फैल सकती है। यह हर साल फैलने वाले मौसमी फ्लू का ही प्रकार है, हालांकि कुछ मामलों में इसके गंभीर परिणाम भी रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। 

आइए जान लेते हैं कि एच1एन1 का संक्रमण कितना खतरनाक होता है और इससे कैसे बचाव किया जा सकता है?
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स्वाइन फ्लू और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
एच1एन1 को लेकर देश में अलर्ट

स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार, मृतक के संपर्क में आए लोगों की जांच शुरू कर दी गई है। अगर किसी में लक्षण दिखते है तो उसे तुरंत इलाज दिया जाएगा। हर साल स्वाइन फ्लू के कुछ मामले सामने आते हैं, मौसम बदलने के दौरान इसकी गतिविधि बढ़ सकती है। इसलिए इस समय लोगों को विशेष सतर्क रहने की सलाह दी जाती है।  स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि एच1एन1 समेत मौसमी इन्फ्लूएंजा वायरस समय-समय पर फैलते रहते हैं।


स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, स्वाइन फ्लू, इन्फ्लूएंजा ए वायरस का एक बहुत तेजी से फैलने वाला सब-टाइप है। एच1एन1 अब कोई नई बीमारी नहीं है। 2009 में इसे पहली बार वैश्विक महामारी फैलाने वाले स्ट्रेन के तौर पर पहचाना गया था। अब यह मौसमी फ्लू वायरस के रूप में फैलता है और समय-समय पर इसके प्रकोप देखने को मिलते हैं। 
 
  • यह मुख्य रूप से खांसने या छींकने से निकलने वाली ड्रॉपलेट्स के जरिए फैलता है।
  • इसके अलावा, यदि कोई व्यक्ति संक्रमित सतह को छूने के बाद अपनी आंख, नाक या मुंह को छू ले, तो संक्रमण हो सकता है। 
  • डॉक्टरों के मुताबिक ज्यादातर मरीज एक सप्ताह के भीतर ठीक हो जाते हैं, लेकिन कुछ लोगों में यह फेफड़ों, हृदय और शरीर के अन्य अंगों को प्रभावित कर गंभीर जटिलताएं पैदा कर सकता है।
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स्वाइन फ्लू के कारण क्या दिक्कतें होती है? - फोटो : Freepik.com
स्वाइन फ्लू के लक्षणों को जानिए

सबसे दिलचस्प बात यह है कि एच1एन1 के शुरुआती लक्षण सामान्य फ्लू जैसे ही लग सकते हैं। यही कारण है कि कई लोग देर से अस्पताल पहुंचते हैं। इसलिए जागरूकता सही जानकारी और समय पर चिकित्सा सलाह इस बीमारी से बचाव के लिए जरूरी हैं। 
 
  • वायरस के शिकार लोगों के बुखार, खांसी, गले में खराश, नाक बहना, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, थकान और कभी-कभी उल्टी या दस्त हो सकते हैं। 
  • कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों में यह निमोनिया जैसी गंभीर स्थिति पैदा कर सकता है।
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फ्लू से कैसे बचें? - फोटो : Adobe Stock
एच1एन1 कैसे फैलता है और इससे कैसे बचें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं भीड़भाड़ वाले स्थानों और खराब वेंटिलेशन वाले कमरों में इसका प्रसार तेजी से हो सकता है। संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए नियमित रूप से हाथ धोना, बीमार होने पर मास्क पहनना और खांसते समय मुंह ढंकना बहुत जरूरी हो जाता है।
 
  • गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों, छोटे बच्चों में इसका खतरा अधिक देखा जाता है। इन्हें विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।
  • इसके अलावा पहले से ही हृदय, फेफड़े, डायबिटीज वाले मरीजों में ये संक्रमण गंभीर रूप ले सकता है। ऐसे मामलों में निमोनिया, सांस लेने में कठिनाई और अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ सकती है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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