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Health Alert: डॉक्टर ने बताए पुरुषों में बढ़ती प्रजनन समस्याओं के चार चौंकाने वाले कारण, आप भी जान लीजिए

Mon, 15 Jun 2026 07:54 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान करने वाले पुरुषों में स्पर्म काउंट कम हो सकता है, स्पर्म की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है और डीएनए क्षति का जोखिम बढ़ सकता है। इसके कई और कारण भी हो सकते हैं, जिसके बारे में जानना जरूरी है।
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पुरुषों में प्रजनन की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
क्या आपने भी ध्यान दिया है कि पिछले एक-दो दशकों में प्रजनन संबंधी समस्याओं का खतरा काफी तेजी से बढ़ा है? पहले की तुलना में अब इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) की मांग तेजी से बढ़ गई है? वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाजेशन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में लगभग 6 में से 1 कपल को बांझपन की दिक्कत हो सकती है। विश्व भर में बांझपन से पीड़ित 6-8 करोड़ कपल्स में से 15-20 मिलियन यानी करीब दो करोड़ (25%) भारत से हैं।

आमतौर पर संतान न होने पर अक्सर उंगलियां महिलाओं की ओर उठती हैं, पर अध्ययनों से पता चलता है कि इनफर्टिलिटी के 50% मामलों के लिए पुरुष जिम्मेदार होते हैं। 1970 के दशक से वैश्विक स्तर पर स्पर्म काउंट में लगभग 50% की गिरावट आई है, जिसने इंफर्टिलिटी के जोखिमों को बढ़ा दिया है।

अब सवाल ये है कि आखिर कौन सी चीजें हैं जिन्होंने पुरुषों में इस खतरे को काफी बढ़ा दिया है?
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पुरुषों में प्रजनन की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
क्यों बढ़ गई हैं प्रजनन की समस्याएं?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि प्रजनन क्षमता में कमी या इंफर्टिलिटी के मामले सिर्फ उम्र बढ़ने से जुड़े नहीं होते। खराब जीवनशैली, तनाव, मोटापा, खानपान में गड़बड़ी और प्रदूषण ने भी जोखिमों को बढ़ा दिया है। 

अमर उजाला से एक बातचीत में आईवीएफ एक्सपर्ट डॉ गार्गी चौहान बताती हैं जब जीवनशैली बिगड़ती है तो उसका असर सिर्फ दिल, दिमाग या वजन पर नहीं बल्कि प्रजनन क्षमता पर भी दिखाई देता है। अच्छी बात यह है कि समय रहते कुछ आदतों में बदलाव कर जोखिम को कम किया जा सकता है। 

आइए पुरुषों में इस समस्या को बढ़ाने वाले कारणों को जान लेते हैं।
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वजन बढ़ने की समस्या - फोटो : Freepik.com
मोटापा बड़ा खतरा

डॉ गार्गी कहती हैं, मोटापा सिर्फ शरीर के बनावट की समस्या नहीं है, यह हार्मोनल संतुलन को भी प्रभावित कर सकता है। 
 
  • अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक वजन वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो जाता है। टेस्टोस्टेरोन पुरुष प्रजनन क्षमता और स्पर्म उत्पादन के लिए महत्वपूर्ण हार्मोन माना जाता है।
  • शोध में मोटापे को लो स्पर्म काउंट, स्पर्म की गतिशीलता में कमी और प्रजनन संबंधी कठिनाइयों का बड़ा कारण पाया गया है।

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मानसिक तनाव और इसके खतरे - फोटो : Adobe Stock
ज्यादा तनाव है खतरनाक

तनाव की समस्या हर उम्र के व्यक्ति में देखी जा रही है। हालांकि अगर आपको अक्सर तनाव रहता है तो इसका प्रजनन स्वास्थ्य पर भी असर पड़ सकता है।
 
  • तनाव के दौरान शरीर में कोर्टिसोल हार्मोन का स्तर बढ़ जाता है।
  • अध्ययनों में हाई कोर्टिसोल को टेस्टोस्टेरोन उत्पादन को प्रभावित करने वाला पाया गया है। 
  • तनाव नींद की गुणवत्ता भी खराब कर देता है, इसका भी पुरुषों के प्रजनन स्वास्थ्य पर असर पड़ता है।
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धूम्रपान से होने वाली दिक्कतें - फोटो : Freepik.com
स्मोकिंग और शराब की आदत

धूम्रपान पुरुष प्रजनन क्षमता को प्रभावित करने वाले जोखिम कारकों में से एक माना जाता है। 
 
  • सिगरेट के धुएं में हजारों रसायन मौजूद होते हैं, जो कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं।
  • अध्ययनों में पाया गया है कि धूम्रपान करने वाले पुरुषों में स्पर्म काउंट कम हो सकता है और स्पर्म की गतिशीलता प्रभावित हो सकती है।
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पौष्टिक चीजों का करिए सेवन - फोटो : Freepik.com
पोषण की कमी तो नहीं?

शरीर को स्वस्थ स्पर्म उत्पादन के लिए कई पोषक तत्वों की जरूरत होती है। 
 
  • जिंक, सेलेनियम, फोलेट, विटामिन सी और डी के साथ ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रजनन स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
  • अध्ययनों में खराब डाइट को प्रजनन स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं के कारणों में से माना जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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