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Health Alert: ये गड़बड़ आदतें 'साइलेंटली' बढ़ाती जा रही हैं बैड कोलेस्ट्रॉल, दिल को बना रही हैं कमजोर

Sat, 09 Aug 2025 08:02 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर की दुश्मन नहीं है बल्कि इसकी कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। लेकिन जब बैड कोलेस्ट्रॉल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) अधिक हो जाता है, तो यह हमारी धमनी की दीवारों पर जमा होकर उन्हें कठोर और संकरी बना देता है। 
  • स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारे दिनचर्या की कुछ गड़बड़ आदतें साइलेंटली कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती जा रही हैं, हालांकि इस तरफ अक्सर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है।
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कोलेस्ट्रॉल और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
हाई कोलेस्ट्रॉल की समस्या के बारे में हम सभी अक्सर सुनते रहते हैं, इसे हृदय रोग-हार्ट अटैक का प्रमुख कारण माना जाता है। जिन लोगों का कोलेस्ट्रॉल लेवल अक्सर सामान्य से अधिक बना रहता है ऐसे लोगों में हार्ट अटैक-स्ट्रोक होने का जोखिम भी अधिक होता है।

वैसे तो कोलेस्ट्रॉल हमारे शरीर का दुश्मन नहीं है बल्कि इसकी कई कार्यों में महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यह हार्मोन बनाने, सेल की संरचना बनाए रखने और विटामिन डी उत्पादन में मदद करता है। लेकिन जब खून में बैड कोलेस्ट्रॉल (लो-डेंसिटी लिपोप्रोटीन) की मात्रा अधिक हो जाती है, तो यह हमारी धमनी की दीवारों पर जमा होकर उन्हें कठोर और संकरी बना देता है। यही ‘प्लाक’ हार्ट अटैक और स्ट्रोक का कारण बनता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हमारे दिनचर्या की कुछ गड़बड़ आदतें साइलेंटली कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाती जा रही हैं, हालांकि इस तरफ अक्सर हमारा ध्यान ही नहीं जाता है।
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ब्लड कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : Freepik.com
बैड कोलेस्ट्रॉल और इसके कारण होने वाली समस्याएं

आंकड़ों पर गौर करें तो पता चलता है कि साल 1990 से 2019 के बीच हाई बैड कोलेस्ट्रॉल और इसके कारण होने वाली समस्याओं से वार्षिक मौतें 30 लाख से बढ़कर 44 लाख से अधिक हो गईं, भारत में भी इसका खतरा तेजी से बढ़ा है। आईसीएमआर के राष्ट्रीय सर्वे के मुताबिक, देश के कई राज्यों में 30-40% वयस्क किसी न किसी रूप में हाई कोलेस्ट्रॉल-ट्राइग्लिसराइड्स से प्रभावित हैं और उनमें से कई को इसका पता भी नहीं।

कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली आदतें अक्सर साइलेंट होती हैं और ये चुपचाप हमारे लिपिड प्रोफाइल को बिगाड़ रही होती हैं। समय रहते इसपर ध्यान देना और बचाव के लिए उपाय करते रहना जरूरी है। 
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डीप फ्राइड फूड्स के नुकसान - फोटो : Freepik.com
सैचुरेटेड व ट्रांस-फैट वाली चीजें तो नहीं खाते हैं आप

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के मुताबिक आहार में गड़बड़ी कोलेस्ट्रॉल को बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में से एक है। सैचुरेटेड व ट्रांस-फैट वाली चीजें कोलेस्ट्रॉल बढ़ाने वाली मानी जाती हैं।

सैचुरेटेड फैट को कम करके, हेल्दी फैट जैसे ऑलिव ऑयल, नट्स को अगर आहार में शामिल कर लिया जाए तो इससे बैड कोलेस्ट्रॉल में कमी आ सकती है और इससे दिल की बीमारियों का खतरा भी घटता है। अध्ययनों से पता चलता है कि ट्रांस-फैट बहुत हानिकारक है, इससे हार्ट अटैक का खतरा बढ़ता है।

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बैड कोलेस्ट्रॉल और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
दिनभर बैठे रहकर करते रहते हैं काम?

ऑफिस में लंबे समय तक कुर्सी पर बैठना, टीवी-मोबाइल के सामने घंटों बिताना भी सेहत के लिए ठीक नहीं है। ये आदतें धीरे-धीरे हमारे गुड कोलेस्ट्रॉल को घटाती हैं और ट्राइग्लिसराइड को बढ़ाती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, हफ्ते में कम से कम 150 मिनट मध्यम-स्तर का व्यायाम जैसे तेज चलना, साइकिलिंग करने से कोलेस्ट्रॉल में सुधार आता है और दिल की बीमारियों का खतरा कम होता है।
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धूम्रपान और इसके कारण होने वाली समस्याएं - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान और शराब नुकसानदायक

सिगरेट और तंबाकू सिर्फ फेफड़ों को नहीं, बल्कि आपके ब्लड लिपिड को भी बिगाड़ते हैं। धूम्रपान की आदत से गुड कोलेस्ट्रॉल कम होता है बैड कोलेस्ट्रॉल बढ़ता है। अध्ययन बताते हैं कि धूम्रपान छोड़ने के कुछ हफ्तों में ही बैड कोलेस्ट्रॉल का स्तर बेहतर हो जाता है और हार्ट अटैक का खतरा धीरे-धीरे कम होने लगता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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