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हेल्थ अलर्ट: नमक खाना बिल्कुल कम कर देने से क्या होता है? जानिए लो सोडियम लेवल कितना खतरनाक

Fri, 02 Oct 2026 07:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

शरीर में सोडियम कम होना कई तरह की समस्याओं को बढ़ाने वाला हो सकता है। कुछ दवाएं, उल्टी-दस्त, किडनी, लिवर या हृदय की बीमारी इसका खतरा बढ़ा देती है। लो सोडियम के कारण  कमजोरी और सिरदर्द हो सकते हैं, जबकि गंभीर स्थिति में भ्रम, दौरे और बेहोशी का भी खतरा देखा जाता रहा है।
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लो बीपी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
खान-पान की जिन चीजों को सेहत के लिए सबसे नुकसानदायक माना जाता है, नमक और चीनी उनमें शीर्ष पर है। ज्यादा चीनी वाली चीजें शरीर में कैलोरी बढ़ाती हैं और ब्लड शुगर बढ़ने का कारण बन सकती है, जबकि ज्यादा नमक खाने से शरीर में सोडिम का स्तर बढ़ता है जिससे ब्लड प्रेशर बढ़ने का खतरा हो सकता है।

ऐसे में अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि खाने में नमक कितना होना चाहिए? खासकर हाई ब्लड प्रेशर, दिल और किडनी की बीमारी वाले लोगों को नमक कम से कम खाने की सलाह दी जाती है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि सोडियम को जरूरत से ज्यादा कम कर देना भी शरीर के लिए परेशानी खड़ी कर सकता है?

शरीर में लो-सोडियम की दिक्कत कई प्रकार की समस्याओं का खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। आइए जान लेते हैं कि इससे आपको क्या दिक्कतें हो सकती हैं?
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खून में सोडियम की कमी का खतरा - फोटो : Freepik.com
लो-सोडियम की समस्या के बारे में जानिए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, सोडियम शरीर में पानी का संतुलन बनाए रखने, नसों तक संदेश पहुंचाने और मांसपेशियों के सामान्य कामकाज में मदद करता है। इसकी अधिकता और कमी दोनों ही सेहत के लिए मुश्किलों का कारण बन सकती है।
 
  • ज्यादा सोडियम जहां ब्लड प्रेशर बढ़ाने समेत हार्ट और किडनी के लिए खतरनाक हो सकता है, वहीं सोडियम की कमी होने पर भी शरीर का संतुलन बिगड़ सकता है।
  • बुजुर्गों, कुछ प्रकार की बीमारियों से जूझ रहे लोगों में इसके कारण चक्कर आने से लेकर, बेहोशी, भ्रम और कई अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याएं हो सकती हैं। 
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चक्कर आने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
सोडियम की सामान्य मात्रा क्या है?
 
आम तौर पर खून में सोडियम का स्तर 136 से 144 एमईक्यू/लीटर के आसपास रहना सामान्य माना जाता है। 125-129 के स्तर को मध्यम और 125 से कम को गंभीर समस्या माना जाता है। लो सोडियम से शरीर की कोशिकाओं में पानी का संतुलन बिगड़ सकता है और गंभीर स्थितियों में इसका असर दिमाग पर पड़ सकता है।


सोडियम लो होना कितना खतरनाक?

शरीर में सोडियम कम होने की बात सुनते ही कई लोग इसे सिर्फ नमक की कमी समझ लेते हैं, लेकिन मामला इतना सीधा नहीं है। सोडियम लो होने की समस्या को हाइपोनेट्रेमिया कहा जाता है। 
 
  • वैसे तो लो सोडियम की समस्या ज्यादातर लोगों में हल्के लक्षणों वाली होती है, लेकिन इसका बहुत ज्यादा या तेजी से लो होना दिमाग और नसों को प्रभावित कर सकता है। 
  • शुरुआत में लो सोडियम के कारण सिरदर्द, कमजोरी और मितली जैसी समस्या हो सकती है। 
  • वहीं खून में सोडियम का लेवल बहुत ज्यादा कम होने के कारण दौरे पड़ने और कन्फ्यूजन से लेकर झटके आने तक की दिक्कतें हो सकती हैं।
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लो सोडियम में लें डॉक्टरी सलाह - फोटो : Adobe stock
लो सोडियम की समस्या से कैसे बचें?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि मूत्रवर्धक दवाएं लेने वाले, बार-बार उल्टी या दस्त से पानी और इलेक्ट्रोलाइट की कमी और पहले से किडनी, लिवर या हार्ट फेलियर से जूझ रहे लोगों में लो सोडियम का जोखिम अधिक देखा जाता रहा है। कुछ लोगों में एसआईएडीएच नाम की स्थिति होती है, जिसमें शरीर जरूरत से ज्यादा पानी रोककर रखता है और सोडियम का स्तर प्रभावित हो सकता है।
 
  • सोडियम लो होने पर मरीज को नींबू पानी में नमक डालकर देने से कुछ समय के लिए आराम मिल सकता है।  
  • गंभीर स्थितियों में मरीजों के सोडियम लेवल को कंट्रोल करने के लिए नस के जरिए फ्ल्यूड दिया जाता है।
  • सोडियम को बहुत तेजी से बढ़ाना भी खतरनाक हो सकता है और दिमाग को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए खुद से नमक की गोलियां या ज्यादा नमक लेने से बचना चाहिए। 
  • यदि भ्रम, दौरे, बेहोशी या बहुत ज्यादा कमजोरी जैसे लक्षण हों तो तुरंत डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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