हृदय की समस्याएं
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पेशाब से जुड़ी परेशानी
- मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने से योनि की त्वचा और ऊतक में बदलाव हो सकते हैं। इससे सूखापन, जलन, खुजली या संभोग के दौरान दर्द जैसी समस्या हो सकती है। यह समस्या कई महिलाओं के रोजमर्रा के जीवन की गुणवत्ता को भी प्रभावित कर सकती है। कुछ महिलाओं में बार-बार पेशाब आने, पेशाब रोकने में परेशानी या मूत्र संक्रमण का खतरा भी बढ़ सकता है।
वजन और दिल की सेहत पर असर
- मेनोपॉज के आसपास शरीर में फैट बढ़ने का खतरा भी अधिक देखा जाता है। इससे कमर के आसपास चर्बी बढ़ने, मांसपेशियों में कमी और वजन बढ़ने की दिक्कत हो सकती है। हार्मोनल बदलाव के कारण मूड की दिक्कत, चिड़चिड़ापन और ध्यान- याददाश्त से जुड़ी परेशानी भी हो सकती है। मेनोपॉज के बाद दिल की बीमारी और स्ट्रोक का जोखिम भी बढ़ जाता है। इस तरह के खतरे को कम करने के लिए संतुलित भोजन, नियमित शारीरिक गतिविधि और वजन को कंट्रोल रखना बहुत जरूरी है।
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।
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