फ़िर ख़तरा बन रही है भुखमरी
मैसाचुसेट्स के बोस्टन स्थित टफ्ट्स विश्वविद्यालय के वर्ल्ड पीस फाउंडेशन के कार्यकारी निदेशक एलेक्स डी वॉल के अनुसार 1980 के दशक के पहले सौ सालों में भुखमरी के कारण हर वर्ष दस लाख लोग मारे जाते थे। डी वॉल बताते हैं, "तब से मृत्यु की दर केवल पांच से दस प्रतिशत रह गई है। अब समूचा समाज भुखमरी का शिकार नहीं बनता। वैश्विक बाज़ारों, बेहतर बुनियादी ढांचों और मानवीय सहायता की व्यवस्थाओं ने भुखमरी को लगभग समाप्त कर दिया था, अब से कुछ वर्ष पहले तक।" लेकिन अगर भुखमरी एक बार फिर से ख़तरा बन कर उभर रही है- तो आखिर इसका कारण क्या है? इसका कारण युद्ध और खराब राजनीति है। डी वॉल का मानना है, "दरअसल लोगों को भूखा मारना बड़ा कठिन काम है क्योंकि लोग बहुत जुझारू होते हैं। लोगों को उनकी आवश्यकता से वंचित करना और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए लागू की जाने वाली नीतियां एक बहुत खराब सरकार अपना सकती है।" "यही बात सीरिया, दक्षिणी सूडान और यमन जैसे देशों में फैली भुखमरी की जड़ में है।"