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Liver Diseases: तला-भुना खाना ही नहीं ये चीजें भी डाल रही हैं लिवर को खतरे में, हो जाइए सावधान

Thu, 11 Jun 2026 05:53 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

लोग अक्सर सोचते हैं कि केवल तला-भुना खाना ही लिवर का दुश्मन है, लेकिन सच्चाई इससे कहीं ज्यादा जटिल है। लाइफस्टाइल की भी कई गड़बड़ियां आपकी लिवर के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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लिवर की बीमारियों का खतरा - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, पर ये कहना गलत नहीं होगा कि लिवर की सेहत सबसे ज्यादा खतरे में भी है। लाइफस्टाइल और खान-पान संबंधी गड़बड़ियों ने लिवर के लिए दिक्कतें काफी बढ़ा दी हैं। ये अंग भोजन को ऊर्जा में बदलने, विषैले पदार्थों को बाहर निकालने से लेकर खून को साफ करने जैसे कई महत्वपूर्ण कार्य करता है।

पहले जहां लिवर की बीमारियां उम्र बढ़ने के साथ हुआ करती थीं वहीं अब कम उम्र के लोग और बच्चे भी इसका शिकार हो रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आधुनिक जीवनशैली ने इस अंग के लिए सबसे ज्यादा मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

आंकड़े बताते हैं कि हर 10 में से चार भारतीय युवाओं में फैटी लिवर की बीमारी देखी जा रही है। 'द लैंसेट रीजनल हेल्थ' में प्रकाशित रिपोर्ट से पता चला है कि भारत में 38.9% वयस्कों को मेटाबोलिक डिसफंक्शन-एसोसिएटेड स्टीटोटिक लिवर डिजीज हो सकती है। आखिर इसका कारण क्या है?
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लिवर की बीमारियों का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
 फैटी लिवर का बढ़ता खतरा

मेडिकल रिपोर्ट्स पर गौर करें तो पता चलता है कि फैटी लिवर दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ने वाली स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुकी है। पहले इसे केवल शराब पीने वालों की बीमारी माना जाता था, लेकिन अब बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी इसकी चपेट में आ रहे हैं जिन्होंने जीवन में कभी शराब नहीं पी। इसकी सबसे बड़ी वजह बदलता खान-पान और बिगड़ती जीवनशैली है।
 
  • लिवर की बीमारियों का जिक्र होते ही अक्सर लोगों को लगता है कि केवल तला-भुना खाना ही लिवर का दुश्मन है, हालांकि डॉक्टर बताते हैं, इसके जोखिम बस यहीं तक सीमित नहीं हैं।
  • हमारी कई और भी आदतें सेहत के लिए मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं, जिनपर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।
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जंक फूड्स से सेहत का खतरा - फोटो : Freepik.com
खान-पान की गड़बड़ी सबसे बड़ा कारण

वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि शरीर में अतिरिक्त कैलोरी खासकर चीनी और रिफाइंड कार्बोहाइड्रेट से मिलने वाली कैलोरी लिवर में जमा होने लगती है। यही जमा हुआ फैट आगे चलकर फैटी लिवर रोग का कारण बनता है। 
 
  • फास्ट फूड, चिप्स, बर्गर, पिज्जा, फ्रेंच फ्राइज और डीप फ्राइड खाद्य पदार्थों में ट्रांस फैट, सैचुरेटेड फैट और अतिरिक्त कैलोरी की मात्रा बहुत अधिक होती है। 
  • जब शरीर जरूरत से ज्यादा कैलोरी मिलती है तो अतिरिक्त ऊर्जा लिवर में फैट के रूप में जमा होने लगती है।
  • अध्ययनों में पाया गया है कि अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड का अधिक सेवन नॉन-अल्कोहॉलिक फैटी लिवर डिजीज का खतरा बढ़ा देता है। 

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पैक्ड जूस है नुकसानदायक - फोटो : Freepik.com
कोल्ड ड्रिंक और एनर्जी ड्रिंक खतरनाक

कोल्ड ड्रिंक, पैकेज्ड जूस, एनर्जी ड्रिंक्स जैसी चीनी से भरपूर चीजें फैटी लिवर के सबसे बड़े कारणों में से मानी जाती हैं। 
 
  • इनमें फ्रुक्टोज की अधिकता होती है जिसका लिवर पर सीधा प्रभाव पड़ता है।
  • अध्ययनों के अनुसार फ्रुक्टोज का मेटाबॉलिज्म मुख्य रूप से लिवर में होता है। जब इसकी मात्रा बहुत अधिक हो जाती है तो लिवर अतिरिक्त फ्रुक्टोज को फैट में बदलने लगता है
  • इससे लिवर में ट्राइग्लिसराइड्स का जमाव बढ़ता है और फैटी लिवर हो सकता है।
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वजन बढ़ने और फैटी लिवर का खतरा - फोटो : Freepik.com
मोटापे का शिकार तो नहीं हैं आप?

मोटापा भी फैटी लिवर का सबसे बड़ा कारण माना जाता है।
 
  • पेट के आसपास जमा होने वाली चर्बी इंसुलिन रेजिस्टेंस को बढ़ाती है। इंसुलिन रेजिस्टेंस की स्थिति में शरीर ग्लूकोज को प्रभावी ढंग से उपयोग नहीं कर पाता और फैट का जमाव बढ़ने लगता है।
  • मोटापे से ग्रस्त लोगों में फैटी लिवर की संभावना सामान्य वजन वाले लोगों की तुलना में कई गुना अधिक होती है। 
  • डॉक्टर कहते हैं,  शरीर के कुल वजन का केवल 7-10 प्रतिशत कम करना भी लिवर में जमा फैट को कम करने में मदद कर सकता है।
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नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
नींद की कमी भी नुकसानदायक

अध्ययन बताते हैं कि नींद की कमी और अनियमित दिनचर्या भी फैटी लिवर के जोखिम को बढ़ा देती है। 
 
  • पर्याप्त नींद न लेने से शरीर के हार्मोनल संतुलन और ग्लूकोज मेटाबॉलिज्म पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
  • कम नींद लेने वाले लोगों में मोटापा, इंसुलिन रेजिस्टेंस और सूजन की समस्या अधिक देखी गई है। ये सभी स्थितियां लिवर में फैट जमा होने की संभावना बढ़ाती हैं। 
  • देर रात तक जागना, अनियमित भोजन करना और लगातार तनाव में रहना भी इस समस्या को बढ़ा सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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