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Anger Problem: क्या आपको भी आता है बहुत ज्यादा गुस्सा? जानिए शरीर पर क्या-क्या होता है इसका असर

Fri, 10 Jul 2026 07:32 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 अत्यधिक गुस्सा आने वाले लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम सामान्य लोगों की तुलना में अधिक हो सकता है। गुस्सा मानसिक स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। आइए जानते हैं कि गुस्सा शरीर के अलग-अलग अंगों और स्वास्थ्य पर किस तरह असर डालता है।
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गुस्से से रहते हैं परेशान? - फोटो : Amarujala.com/AI
आप भी ऐसे एक-दो लोगों को जरूर जानते होंगे जिन्हें बहुत ज्यादा गुस्सा आता है। अक्सर लोग ऐसे लोगों से बचते हैं। मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, गुस्सा एक स्वाभाविक और सर्वाइवल मैकेनिज्म है जो खतरों, पूरी न होने वाली जरूरतों या सीमाओं के उल्लंघन की स्थिति में आता है। पर अगर किसी को बार-बार या बहुत ज्यादा गुस्सा आता है तो न सिर्फ सामाजिक रूप से बल्कि सेहत के लिए भी ठीक नहीं है।

बार-बार या बहुत ज्यादा गुस्सा करना केवल रिश्तों को ही नहीं, बल्कि आपके पूरे शरीर को भी नुकसान पहुंचा सकता है? अक्सर लोग गुस्से को सिर्फ एक इमोशनल रिएक्शन मानते हैं, जबकि मेडिकल साइंस इसे शरीर में होने वाली कई जैविकऔर हार्मोनल प्रतिक्रियाओं से जोड़कर देखती है।

जब आप गुस्सा करते हैं, तो शरीर में एड्रेनालाईन  और कॉर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन तेजी से बढ़ते हैं। इसका असर सीधे दिल-दिमाग और ब्लड प्रेशर के साथ सांस लेने की गति और यहां तक कि पाचन तंत्र पर भी पड़ता है। कई अध्ययनों में ये भी पाया गया है कि जिन लोगों को ज्यादा गुस्सा आता है उनमें हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा भी अधिक होता है। ऐसे में सवाल ये है कि गुस्से को कंट्रोल कैसे करें?
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गुस्सा आने की स्थिति - फोटो : Freepik.com
ज्यादा गुस्सा आना ठीक नहीं

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ मिनट का गुस्सा वैसे तो नुकसानदायक नहीं है, लेकिन यदि आपको बार-बार या अक्सर गुस्सा आता है तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, दिल की बीमारियों, स्ट्रोक, डिप्रेशन और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि गुस्से को कंट्रोल करने वाले तरीके अपनाकर नियंत्रित किया जा सकता है। नियमित व्यायाम, पर्याप्त नींद, मेडिटेशन, गहरी सांस लेने की तकनीक मददगार हो सकती है।

आइए जानते हैं कि गुस्से का शरीर पर क्या असर होता है?
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हार्ट पर प्रभाव - फोटो : Adobe stock Images
बढ़ जाता है ब्लड प्रेशर

गुस्से के समय रक्त वाहिकाएं सिकुड़ने लगती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर अचानक बढ़ जाता है। लंबे समय तक अनियंत्रित ब्लड प्रेशर रहने से दिल, किडनी, आंखों और मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए जिन लोगों का पहले से हाई ब्लड प्रेशर रहता है उन्हें तनाव और गुस्से को नियंत्रित करने के उपाय नियमित रूप से अपनाने चाहिए।


हार्ट पर पड़ता है असर

गुस्से के दौरान हृदय को सामान्य से कहीं अधिक मेहनत करनी पड़ती है। एड्रेनालिन बढ़ने से दिल तेजी से रक्त पंप करता है, जिससे हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर दोनों बढ़ जाते हैं। 
 
  • यदि किसी व्यक्ति को पहले से हाई ब्लड प्रेशर, हृदय रोग या ब्लॉकेज की समस्या है, तो गुस्सा हार्ट अटैक या एंजाइना का ट्रिगर बन सकता है। 
  • कई अध्ययनों में यह भी पाया गया है कि तेज गुस्से के तुरंत बाद कुछ घंटों तक हार्ट अटैक और स्ट्रोक का जोखिम बढ़ जाता है। 
  • हृदय रोगियों को गुस्से पर नियंत्रण रखना जरूरी है।

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ब्रेन पर क्या असर होता है? - फोटो : Freepik.com
दिमाग पर क्या होता है असर?

अत्यधिक गुस्से की स्थिति में मस्तिष्क तर्क और सही निर्णय लेने वाला हिस्सा कम प्रभावी हो जाता है। 
 
  • यही कारण है कि गुस्से में लोग अक्सर जल्दबाजी में फैसले लेते हैं या ऐसी बातें कह देते हैं जिनका बाद में पछतावा होता है। 
  • लगातार तनाव और गुस्सा के कारण याददाश्त कम होने, ध्यान न लगने और मानसिक संतुलन पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। 
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तनाव-गुस्सा कैसे कंट्रोल करें? - फोटो : Freepik.com
कैसे कंट्रोल करें गुस्सा?

गुस्से को कंट्रोल करने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ 90 सेकंड का रूल बताते हैं।
 
  • किसी भी बात पर तुरंत रिएक्ट करने से पहले 90 सेकंड का ब्रेक लें और धीरे-धीरे गहरी सांसें लें।
  • वहां खुद को दूर करने की कोशिश करें, भले ही थोड़ी देर टहलने के लिए ही क्यों न जाएं। इससे स्ट्रेस हार्मोन कम हो सकते हैं।
  • भावनाओं पर तुरंत रिएक्ट करने से बचें।
  • गुस्से की असली वजह पता करें। अक्सर गुस्सा स्ट्रेस, निराशा, डर या दुख को छिपाने का एक तरीका होता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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