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हेल्थ अलर्ट: क्या बार-बार मीठा खाने का मन होना डायबिटीज का संकेत है? जानिए एक्सपर्ट की राय

Mon, 02 Nov 2026 07:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

बार-बार मीठा खाने की इच्छा के पीछे नींद की कमी, तनाव, लंबे समय तक भूखे रहना और हार्मोनल बदलाव जैसे कारण हो सकते हैं। शुगर क्रेविंग को नियंत्रित करने के लिए संतुलित डाइट, पर्याप्त नींद, नियमित व्यायाम जरूरी है।
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शुगर क्रेविंग की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
सेहत को ठीक रखने के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ खान-पान को ठीक रखने की सलाह देते हैं। विशेषतौर पर सभी लोगों को आहार में नमक और चीनी की मात्रा कम रखने की सलाह दी जाती है। ज्यादा मीठी चीजें खाने-पीने से न सिर्फ डायबिटीज का खतरा होता है, साथ ही ये मेटोबॉलिक हेल्थ को भी नुकसान पहुंचाने वाली हो सकती है।

क्या आप जानते हैं कि कुछ लोगों को शुगर की क्रेविंग ज्यादा होती है? खाना खाने के थोड़ी देर बाद ही कुछ मीठा खाने का मन होने लगता है। पर क्या आप जानते हैं कि बार-बार मीठा खाने की इच्छा के पीछे सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि शरीर और दिमाग से जुड़े कई कारण हो सकते हैं।

ज्यादा मीठा खाने की इच्छा को कई बार शरीर में पल रही बीमारियों का संकेत माना जाता है, जिसपर गंभीरता से ध्यान देते रहना और समय रहते इलाज कराना बहुत जरूरी है। क्या आपको भी शुगर की ज्यादा क्रेविंग होती है?
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आहार पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
मीठा खाने की इच्छा

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कई बार नींद की कमी, मानसिक तनाव, लंबे समय तक भूखे रहने और खानपान में पोषक तत्वों का असंतुलन शुगर क्रेविंग बढ़ा सकता है।

असल में मीठा खाने से दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम एक्टिव होता है जिससे आपको खुशी का अहसास मिलता है। इसलिए लोगों को बार-बार कुछ मीठा खाने की इच्छा होती रहती है। हालांकि परेशानी तब बढ़ती है, जब हर बार मीठे की तलब मिटाने के लिए हम चॉकलेट, मिठाई, बिस्किट या मीठे ड्रिंक्स ज्यादा लेने लगते हैं। इस तरह के खान-पान से शरीर में कैलोरी की मात्रा बढ़ने लग जाती है जिससे डायबिटीज, मोटापा और कई तरह की बीमारियों का जोखिम हो सकता है। 
 
  • कई बार प्री-डायबिटीज जैसी स्थितियों में मीठा खाने की इच्छा बढ़ जाती है। हालांकि इसे डायबिटीज का संकेत नहीं माना जाता, आपको अलर्ट हो जाना चाहिए।
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खान-पान को लेकर बरतें सावधानी - फोटो : Adobe stock photos
शुगर क्रेविंग और इसके क्या कारण हैं?

जब आपको बार-बार मीठा खाने की तेज इच्छा होती है, तो इसे शुगर क्रेविंग कहते हैं। इसमें आपको  चॉकलेट, मिठाई, केक या मिठाइयां खाने का मन करता है। मीठे खाद्य पदार्थ दिमाग के रिवॉर्ड सिस्टम को एक्टिव करते हैं। इससे डोपामाइन जैसे केमिकल से जुड़ी प्रतिक्रिया होती है, जो खुशी और आनंद का अहसास कराती है। इसी वजह से बार-बार मीठा खाने की इच्छा बढ़ सकती है। इसके लिए कई कारणों को जिम्मेदार माना जाता है।
 
  • अगर आप रोजाना पर्याप्त नींद नहीं लेते, तो भूख और पेट भरने का संकेत देने वाले हार्मोन प्रभावित हो सकते हैं। इससे ज्यादा खाने और मीठे की इच्छा बढ़ सकती है।
  •  लंबे समय तक तनाव रहने पर शरीर में कोर्टिसोल का स्तर प्रभावित हो सकता है। ऐसे में आपको मीठे और ज्यादा कैलोरी वाली चीजें खाने का मन करता है।
  • भोजन में प्रोटीन और फाइबर की कमी भी इसका कारण हो सकती है। इससे आपको पेट भरा हुआ महसूस नहीं होता है इससे भी बार-बार खाने का मन कर सकता है।
  • कुछ महिलाओं में पीरियड्स से पहले हार्मोनल बदलावों के कारण भी मीठा और कार्बोहाइड्रेट वाला खाना खाने की इच्छा बढ़ सकती है।
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शुगर की क्रेविंग कैसे कम करें - फोटो : Freepik.com
शुगर क्रेविंग को कैसे कंट्रोल करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको बार-बार मीठा खाने की इच्छा होती रहती है तो इसके लिए लाइफस्टाइल में कुछ बदलाव करने जरूरी हैं। 
 
  • सुबह का नाश्ता न छोड़ें और समय पर भोजन करें। खाने में दाल, पनीर, अंडे जैसी प्रोटीन वाली चीजों को शामिल करें।
  •  फल, सब्जियां और साबुत अनाज खाएं, ताकि फाइबर की पर्याप्त मात्रा मिले।
  • मीठे की इच्छा होने पर फल, शुगर फ्री चीजें या थोड़े मेवे खा सकते हैं।
  • पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं और रोजाना 7-9 घंटे सोने की कोशिश करें।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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