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हेल्थ की बात: अक्तूबर-नवंबर में क्यों बढ़ जाती है खांसी-जुकाम की परेशानी? मौसम बदलने पर इन बातों का रखें ध्यान

Mon, 02 Nov 2026 07:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अक्तूबर-नवंबर में आमतौर पर सुबह-शाम ठंड और दिन में गर्मी के कारण अस्थमा, एलर्जी और सांस संबंधी परेशानियां बढ़ सकती हैं। बुजुर्गों, बच्चों और क्रॉनिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। 
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सर्दी-खांसी की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
देश के ज्यादातर हिस्सों में मौसम तेजी से बदलने लगा है। सुबह-शाम की गुलाबी ठंड शुरू हो गई है, हालांकि दिन में धूप और गर्मी बनी रहती है। अक्तूबर-नवंबर के महीने में दिन और रात के तापमान का यह अंतर आम है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सर्दियों की शुरुआत वाला ये मौसम लोगों को काफी पसंद आता है, हालांकि मौसम में देखा जा रहा ये उतार-चढ़ाव कुछ लोगों के लिए परेशानी बढ़ा सकता है।

मौसम में बदलाव के साथ गले में खराश और खांसी की दिक्कत होने लगती है। इसके अलावा दिल्ली-एनसीआर में प्रदूषण का भी खतरा देखा जा रहा है जो अस्थमा और पहले से सांस की समस्याओं से परेशान लोगों की दिक्कतों को ट्रिगर करने वाला हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बदलते मौसम में सभी लोगों को थोड़ा ज्यादा सावधानी बरतने की जरूरत होती है। शरीर को स्वस्थ रखने के लिए छोटी-छोटी सावधानियां काफी मददगार हो सकती हैं। आइए जानते हैं किन लोगों को ज्यादा सतर्क रहना चाहिए और क्या उपाय अपनाने चाहिए?
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वायरल संक्रमण का खतरा - फोटो : Freepik.com
वायरल संक्रमण और इसके खतरे

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इन दिनों  दिन और रात के तापमान में अंतर देखा जा रहा है। ऐसी परिस्थितियों में शरीर को बदलते वातावरण के अनुसार खुद को ढालना होता है। ठंडी और शुष्क हवा कुछ लोगों के श्वसन मार्ग को प्रभावित करने वाली हो सकती है। इसके साथ, मौसम बदलने के साथ कई श्वसन वायरस भी सक्रिय होते हैं, जिसके कारण लोगों में आसानी से वायरल संक्रमण होने का खतरा भी काफी बढ़ जाता है।

सर्दी-जुकाम, फ्लू जैसे संक्रमण इंफ्लूएंजा वायरस से होते हैं। ये संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने और नजदीकी संपर्क से फैल सकते हैं। ठंड के समय लोग बंद कमरों में ज्यादा रहते हैं, जिससे संक्रमण फैलने का खतरा और बढ़ जाता है।
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सर्दी-खांसी की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
किन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बदलते मौसम में सभी लोगों को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की जरूरत होती है, हालांकि कुछ लोगों को इन दिनों अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। सबसे ज्यादा खतरा अस्थमा के मरीजों को होता है। ठंडी और शुष्क हवा सांस की नलियों में सिकुड़न पैदा कर सकती है। इससे खांसी, घरघराहट और सांस फूलने की समस्या बढ़ सकती है।

 
  • बुजुर्गों को भी अलर्ट रहना चाहिए। उम्र बढ़ने के साथ शरीर की संक्रमण से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। पहले से बीमार बुजुर्गों में संक्रमण से ज्यादा परेशानी हो सकती है।
  • बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता  विकसित हो रही होती है। स्कूल जैसी सामूहिक जगहों पर संक्रमण के संपर्क में आने की आशंका ज्यादा रहती है, इसलिए बच्चों को अलर्ट रहना चाहिए।
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सांस की समस्या - फोटो : Adobe Stock
मौसम के बदलाव में बीमारियों से कैसे बचें?

शरीर को स्वस्थ रखने और बीमारियों से बचे रहने के लिए कुछ उपाय मददगार हो सकते हैं।
 
  • सुबह और शाम बाहर निकलते समय मौसम के अनुसार कपड़े पहनें।
  • बहुत ठंडी हवा में सीधे सांस लेने से बचें। जरूरत पड़ने पर नाक और मुंह को स्कार्फ से ढकें।
  •  घर और आसपास साफ-सफाई रखें तथा धूल और धुएं से बचें।
  • हाथों को साबुन से नियमित धोएं। खांसी या छींक आने पर मुंह और नाक ढकें।
  • फ्लू के टीके और अन्य जरूरी टीकाकरण के बारे में डॉक्टर से सलाह लें।
  • अस्थमा के मरीज अपनी निर्धारित दवाएं और इनहेलर नियमित रूप से इस्तेमाल करें।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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