फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Eye Floaters: आंखों के सामने काले धब्बे दिखना कितना खतरनाक? ये किस बीमारी की ओर करते हैं इशारा

Mon, 10 Aug 2026 06:53 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eye Floaters Reason: अगर इनके साथ चमकती रोशनी दिखाई दे, नजर के किसी हिस्से पर काला पर्दा या परछाई आने लगे अथवा अचानक नजर धुंधली हो जाए, तो यह आंख के पर्दे यानी दृष्टिपटल में खिंचाव, छेद या उसके अपनी जगह से अलग होने का संकेत हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 4
आंखों में फ्लोटर्स की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
आंखें हमारे शरीर का सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं, जिनकी मदद से हम दुनिया की खूबसूरती का आनंद ले पाते हैं। हालांकि जिस तरह से अब बुजुर्गों से लेकर बच्चों तक, सभी उम्र के लोगों में आंखों की समस्याएं बढ़ती जा रही हैं, इसको लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ लगातार चिंता जता रहे हैं। मोबाइल-लैपटॉप जैसी स्क्रीन के कारण कम उम्र के लोगों यहां तक कि बच्चों में ड्राई आइज और आंखों की रोशनी कम होने की दिक्कत बढ़ती जा रही है।

आपने भी अपने आसपास कई लोगों में आई फ्लोटर्स की शिकायत सुनी होगी। इसमें अचानक आंखों के सामने छोटे-छोटे काले धब्बे, बिंदियां, धागे या मकड़ी के जाले जैसी आकृतियां तैरती हुई दिखाई देती है। आंख घुमाते ही वे भी दूसरी जगह खिसक जाती हैं। आखिर ये क्या समस्या है, क्या यह आंखों के खराब होने का संकेत है?

आइए इस बारे में विस्तार से जान लेते है।
विज्ञापन

2 of 4
आंखों की समस्या - फोटो : Adobe Stock Photo
आंखों के सामने तैरते हुए धब्बे की दिक्कत

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि आंखों के सामने तैरते हुए धब्बे कई बार आंख के अंदर मौजूद पारदर्शी जेल जैसे पदार्थ में होने वाले बदलावों के कारण दिखाई देते हैं। उम्र बढ़ने के साथ इसकी संरचना में बदलाव हो सकता है और उसमें मौजूद रेशे आपस में गुच्छे बना सकते हैं। इनकी छाया आंख के पर्दे पर पड़ती है और हमें धब्बे या जाल जैसी आकृतियां दिखाई देती हैं।
 
  • अधिकतर मामलों में ये धब्बे गंभीर समस्या का कारण नहीं होते। लेकिन अगर आंखों के सामने अचानक बहुत सारे नए धब्बे दिखाई देने लगें या फिर ये समस्या बार-बार हो रही हो तो सभी लोगों को अलर्ट हो जाना चाहिए। 
  • अगर इनके साथ चमकती रोशनी दिखाई दे, आंखों के सामने काला पर्दा या परछाई आने लगे या अचानक नजर धुंधली हो जाए, तो यह आंख के पर्दे में खिंचाव या इससे संबंधित कोई दिक्कत हो सकती है जिसपर समय रहते गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।
विज्ञापन

3 of 4
आंखों की दिक्कतों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ समीर सिन्हा बताते हैं, आई फ्लोटर्स तब होते हैं जब आंख के विट्रियस जेल के अंदर प्रोटीन या सेल्स के छोटे-छोटे गुच्छे बन जाते हैं और रेटिना पर परछाईं डालते हैं।

इसका सबसे आम कारण उम्र बढ़ना है। इसके अलावा पोस्टीरियर विट्रियस डिटेचमेंट, रेटिना के फटने, ब्लीडिंग या आंखों में सूजन की वजह से भी ये दिक्कत हो सकती है। उम्र बढ़ने के साथ ये दिक्कत हो रही है तो ज्यादा चिंता की बात नहीं है, हालांकि कम उम्र में होने वाली इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान दिया जाना चाहिए।


क्या ये किसी खतरनाक समस्या का संकेत है?

डॉक्टर कहते हैं, आमतौर पर इसे खतरनाक नहीं माना जाता है। बहुत से लोगों में ये उम्र से जुड़े सामान्य बदलावों के कारण दिखाई देते हैं और किसी उपचार की जरूरत नहीं होती। समय के साथ व्यक्ति इन धब्बों का आदी हो जाता है। लेकिन अचानक पहली बार बहुत सारे धब्बे दिखाई देना, उनकी संख्या तेजी से बढ़ना या उनके साथ चमकती रोशनी दिखाई दे रही हो तो ये चिंता का कारण हो सकता है। ऐसे में आंखों की तुरंत जांच जरूरी है।

अगर पहले कभी धब्बे नहीं दिखे और अचानक बड़ी संख्या में काले बिंदु या जाल जैसी आकृतियां दिखाई देने लगी हैं, तो इसे नजरअंदाज न करें।
विज्ञापन

4 of 4
आंखों की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
इन बातों का भी रखें ध्यान

डॉ. कहते हैं, अगर आपको लंबे समय से डायबिटीज की दिक्कत है और ये कंट्रोल में नहीं रहती है तो इससे आंखों की रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में आंख के भीतर रक्तस्राव के कारण भी आपको तैरते हुए काले धब्बों की तरह दिखाई दे सकते हैं। इसलिए डायबिटीज से पीड़ित लोगों को आंखों की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए।

अगर नजर के किसी हिस्से में अचानक काला पर्दा, परछाई या धुंधला दिखाई देने लगे, तो यह गंभीर चेतावनी हो सकती है। रेटिना के अपनी जगह से अलग होने की स्थिति में नजर के एक हिस्से में पर्दा जैसा अनुभव हो सकता है। यह आपात स्थिति मानी जाती है क्योंकि इलाज में देरी से स्थायी रूप से दृष्टि हानि का खतरा बढ़ सकता है।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें