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Sleep Problem: क्या आपके लिए भी अच्छी नींद पाना हो गया है मुश्किल? जानिए क्या है इसकी असली वजह, कैसे पाएं आराम

Sun, 12 Jan 2025 07:46 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

अनिद्रा क्या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण है या इसकी वजह से आपको कोई गंभीर बीमारी हो सकती है? नींद की समस्याओं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है, आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।
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नींद न आने की समस्या - फोटो : Freepik.com
अच्छी सेहत के लिए पौष्टिक आहार और नियमित व्यायाम जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है रोज रात में अच्छी और गहरी नींद लेना। तमाम अध्ययनों से पता चलता है कि वयस्कों को रोजाना रात में कम से कम 6-9 घंटे की गहरी नींद जरूर लेनी चाहिए। एक रात भी अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो अगले दिन सेहत पर इसका दुष्प्रभाव हो सकता है। क्या आप अच्छी नींद ले पा रहे हैं?

ये सवाल इसलिए क्योंकि हाल के वर्षों में नींद न आने की समस्या (अनिद्रा) के मामलों में काफी वृद्धि हुई है। वयस्कों से लेकर बुजुर्ग तक सभी आयु के लोगों को इसका शिकार देखा जा रहा है। अनिद्रा क्या किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का कारण है या इसकी वजह से आपको कोई गंभीर बीमारी हो सकती है? नींद की समस्याओं से छुटकारा कैसे पाया जा सकता है, आइए इन सबके बारे में विस्तार से समझते हैं।
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नींद विकारों की समस्या - फोटो : Freepik.com
नींद न आने की समस्या (अनिद्रा)

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की सेहत को ठीक बनाए रखने के लिए अच्छी नींद की जरूरत होती है। नींद के दौरान शरीर में कई प्रकार की रासायनिक क्रियाएं होती हैं, हार्मोन्स उत्पादित होते हैं जो आपको स्वस्थ रखने और तरोताजा बनाए रखने में मदद करते हैं। हालांकि आधुनिक जीवनशैली, तनाव और अन्य कई कारकों के कारण बहुत से लोग नींद न आने की समस्या से जूझ रहे हैं।

यह समस्या न केवल थकावट का कारण बनती है, बल्कि गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का रूप भी ले सकती है। दीर्घकालिक रूप में इसके कारण हापरटेंशन और अवसाद जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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नींद की गोलियों - फोटो : Freepik.com
नींद की गोलियों या  'मेलाटोनिन की गोलियों' की न बनाएं आदत

अक्सर लोग नींद की समस्याओं को दूर करने के लिए 'मेलाटोनिन' टेबलेट लेना शुरू कर देते हैं। 

मेलाटोनिन एक हार्मोन है जो आपका मस्तिष्क अंधेरे के प्रति प्रतिक्रिया में पैदा करता है। यह आपके सर्कैडियन रिदम (आंतरिक घड़ी) और नींद में मदद करता है। बाजार में मेलाटोनिन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए कई टेबलेट मौजूद हैं। यह सप्लीमेंट मस्तिष्क में पीनियल ग्रंथि द्वारा स्वाभाविक रूप से उत्पादित हार्मोन का एक सिंथेटिक वर्जन होते हैं जो नींद लाने में मददगार हो सकते हैं। 

हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, इस सप्लीमेंट पर निर्भर होने से बचना चाहिए। नई दिल्ली स्थित एक अस्पताल में स्लीप संबंधित श्वसन विकारों की डॉक्टर नीतू जैन कहती हैं, अनिद्रा की समस्या में मेलाटोनिन का सहारा नहीं लेना चाहिए। आप पहले ये समझने की कोशिश करिए कि नींद न आने की वजह क्या है और उसमें कैसे सुधार किया जा सकता है?

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अनिद्रा की समस्या - फोटो : Freepik.com
नींद न आने की समस्या कई तरह से नुकसानदायक

नींद विकारों की समस्या कई प्रकार से आपकी शारीरक और मानसिक सेहत को प्रभावित करने वाली हो सकती है। अनिद्रा की दिक्कत बने रहने के कारण थकान और ऊर्जा की कमी तो होती ही है साथ ही आपकी प्रतिरोधक क्षमता कमजोर होने,मोटापा और हृदय रोग की समस्या, ब्लड प्रेशर और डायबिटीज का जोखिम भी बढ़ जाता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर भी नींद की कमी के दुष्प्रभाव हो सकते हैं। इसके कारण आपको एकाग्रता और याददाश्त कमजोर होने, अवसाद और चिड़चिड़ापन की समस्या होने, उत्पादकता में कम का जोखिम रहता है। लंबे समय तक नींद की दिक्कत बने रहने के कारण डिमेंशिया और अल्जाइमर जैसी बीमारियों का खतरा भी बढ़ जाता है।
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नींद में कैसे सुधार करें? - फोटो : adobe stock
कैसे पाएं आराम?

विशेषज्ञ कहते हैं, दवाओं पर निर्भर होने की जगह स्लीप हाइजीन में सुधार करें। इसके लिए रोज सोने का एक समय रखना, अपने दिमाग को आराम देने वाले उपाय जैसे मेडिटेशन-अच्छे संगीत सुनना, शरीरिक रूप से सक्रिय रहना और सोने से कम से कम एक घंटे पहले स्क्रीन या डिवाइस से दूर रहना शामिल है।

समय पर न सोना और जागना, काम के घंटे बदलना या रात को देर तक काम करना नींद के चक्र को प्रभावित करता है। मोबाइल-कंप्यूटर जैसे उपकरणों से निकलने वाली नीली रोशनी मेलाटोनिन हार्मोन के उत्पादन को बाधित करती है, जिससे नींद नहीं आती। इनमें सुधार जरूरी हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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