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Alert: जापान की कुल आबादी से ज्यादा भारतीय इस रोग का शिकार, छींकते-छींकते खराब हो जाती है हालत

Tue, 11 Mar 2025 07:44 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

साल 2023 में जापान की आबादी 12.45 करोड़ थी। एक अनुमान के मुताबिक 134 मिलियन (13.4 करोड़) से अधिक भारतीय क्रोनिक साइनसाइटिस से पीड़ित हैं। ये स्थिति कई प्रकार की स्वास्थ्य जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है।
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साइनस का संक्रमण - फोटो : Freepik.com
श्वसन से संबंधित बीमारी हमेशा से एक गंभीर समस्या रही है, वैश्विक स्तर पर हर साल लाखों लोगों की इससे मौत हो जाती है। साइनस ऐसी ही एक समस्या है जिसके कारण स्वास्थ्य क्षेत्र पर अतिरिक्त दबाव बढ़ता जा रहा है। भारत में भी ये समस्या बढ़ती देखी जा रही है।

एक अनुमान के मुताबिक 134 मिलियन (13.4 करोड़) से अधिक भारतीय क्रोनिक साइनोसाइटिस से पीड़ित हैं। ये संख्या जापान की कुल आबादी से कहीं आधिक है। साल 2023 में जापान की आबादी 12.45 करोड़ थी।
साइनस (Sinus) हमारे सिर में स्थित वायु कक्ष (एयर कैविटी) होते हैं, जो नाक के चारों ओर मौजूद होते हैं। ये नाक में नमी बनाए रखते हैं और हानिकारक कणों को रोकने में मदद करते हैं। जब साइनस में सूजन या संक्रमण हो जाता है, तो इसे साइनोसाइटिस कहा जाता है। इससे चेहरे में दर्द, नाक बंद या बहना, लगातार छींक आने और कभी-कभी बुखार और अन्य लक्षण हो सकते हैं।

आमतौर पर सामान्य सर्दी के कारण ये समस्या हो सकती है। वायरस, बैक्टीरिया, फंगस और एलर्जी साइनोसाइटिस का कारण बन सकते हैं।
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साइनोसाइटिस की समस्या के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
साइनस के कारण हो सकती हैं कई तरह की दिक्कतें

साइनस कई प्रकार का हो सकता है। एक्यूट साइनोसाइटिस का संक्रमण 10-14 दिनों तक रहता है और अधिकतम 4 हफ्तों में ठीक हो जाता है, जबकि क्रोनिक साइनोसाइटिस के लक्षण 12 सप्ताह से अधिक समय तक बने रहते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सामान्य सर्दी-जुकाम के कारण साइनस में सूजन हो सकती है। जिन लोगों को पहले से ये बीमारी रही है उनमें ये समस्या साइनस को ट्रिगर कर सकती है। बैक्टीरियल संक्रमण के कारण साइनस में पस भर जाता है, वहीं धूल, पराग और धुआं के कारण भी साइनस की समस्या के बढ़ने का खतरा हो सकता है। 
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फ्लू, सर्दी-जुकाम के कारण साइनस की समस्या - फोटो : Freepik.com
साइनोसाइटिस के कारण क्या दिक्कतें होती हैं?

साइनोसाइटिस की स्थिति आपको कई प्रकार से प्रभावित करने वाली हो सकती है। इसके कारण सांस लेने में कठिनाई होती है। इसके साथ सिरदर्द और चेहरे में दर्द बना रह सकता है। साइनोसाइटिस में माथे, आंखों, गाल और नाक के आसपास दर्द होता है, ये इसकी मुख्य पहचान है।

संक्रमण की स्थिति बार-बार और लगातार छींक आते रहने, नाक से बलगम आने, गले में जलन और खांसी, बुखार और थकान की भी दिक्कत होने लगती है। साइनस बंद होने के कारण गंध और स्वाद की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

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पानी पीते रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
अगर आपको भी हो ये समस्या तो क्या करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिन लोगों को साइनोसाइटिस की दिक्कत होती है उन्हें कुछ बातों का गंभीरता से ध्यान देते रहना चाहिए। 
  • रोजाना गुनगुने पानी और नमक से गरारे आपको साइनस संक्रमण से बचा सकते हैं।
  • दिनभर में खूब पानी पिएं, ताकि बलगम पतला रहे और आसानी से बाहर निकल सके।
  • धूल और धुएं से बचाव के लिए मास्क पहनें और प्रदूषण वाले स्थानों से दूर रहें।
  • गर्म पानी से भाप लेने से नाक खुलती है और साइनस संक्रमण में राहत मिलती है।
  • धूम्रपान और शराब साइनस को अधिक प्रभावित कर सकते हैं। इससे भी दूरी बनाकर रखें।
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डॉक्टर की सलाह जरूरी - फोटो : Adobe stock
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, साइनस की समस्या आपकी जटिलताओं को बढ़ाने वाली हो सकती है। यदि साइनस बार-बार होता है और दवाओं से ठीक नहीं होता, तो डॉक्टर से संपर्क करें। प्रदूषण और एलर्जी से बचाव, नाक की सफाई और स्वस्थ जीवनशैली अपनाकर इससे बचा जा सकता है। एक अध्ययन के अनुसार, जिन लोगों को एलर्जी होती है उनमें साइनोसाइटिस होने की आशंका 40% अधिक होती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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