फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Kidney Problem: ये गलतियां करते हैं तो किडनी से धो बैठेंगे हाथ, जानिए किडनी को हेल्दी रखने के लिए क्या करें

Sun, 16 Mar 2025 08:00 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

किडनी से संबंधित बीमारियां एक गंभीर समस्या है, लेकिन सही जीवनशैली और समय पर पहचान से इसे रोका जा सकता है। यदि आप हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य जोखिम कारकों से परेशान हैं तो सावधान हो जाइए, इससे किडनी को नुकसान हो सकता है।
विज्ञापन
1 of 5
किडनी की बीमारियों का खतरा - फोटो : Freepik.com
किडनी (गुर्दे) हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक हैं। ये शरीर से विषैले पदार्थों (टॉक्सिन्स) और अतिरिक्त तरल पदार्थ को बाहर निकालने का काम करते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लाइफस्टाइल और आहार में गड़बड़ी के कारण वैसे तो संपूर्ण स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर होता है पर ये कम उम्र के लोगों में किडनी से संबंधित जानलेवा दुष्प्रभावों को बढ़ाती जा रही है।

युवा आबादी में किडनी से संबंधित बीमारियों का खतरा काफी तेजी से बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। किडनी की बीमारियों पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो इसके जानलेवा दुष्प्रभाव हो सकते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी से संबंधित बीमारियां एक गंभीर समस्या है, लेकिन सही जीवनशैली और समय पर पहचान से इसे रोका जा सकता है। यदि आप हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज या अन्य जोखिम कारकों से परेशान हैं, तो नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट करवाना जरूरी है। स्वस्थ आहार, पर्याप्त पानी, व्यायाम और धूम्रपान से बचाव से किडनी को लंबे समय तक स्वस्थ रखा जा सकता है।
विज्ञापन

2 of 5
युवाओं में किडनी की समस्या - फोटो : Adobe stock
किडनी डिजीज या किडनी फेलियर का खतरा

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी से संबंधित बीमारियां अगर शुरुआती चरण में न पहचानी जाएं, तो यह क्रॉनिक किडनी डिजीज या किडनी फेलियर का भी कारण बन सकती हैं। इसके जानलेवा  दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं।

द लैंसेंट में साल 2020 में प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में 85 करोड़ लोग किसी न किसी प्रकार की किडनी बीमारी से ग्रसित हैं। यदि किडनी 90% तक काम करना बंद कर दें तो डायलिसिस या किडनी ट्रांसप्लांट की आवश्यकता हो सकती है। इतना ही नहीं क्रॉनिक किडनी डिजीज से पीड़ित लोगों में हार्ट अटैक और स्ट्रोक का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में 2-4 गुना अधिक होता है।
विज्ञापन

3 of 5
डायबिटीज औऱ किडनी की बीमारी - फोटो : Adobe stock
किडनी रोगों की मुख्य वजह क्या हैं?

अमेरिकन डायबिटीज एसोसिएशन के अनुसार, टाइप-2 डायबिटीज वाले लोगों में किडनी फेलियर का खतरा 3 गुना अधिक होता है। असल में जब रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है, तो किडनी पर अधिक दबाव पड़ता है और वह धीरे-धीरे कमजोर हो जाती है। इसी तरह से 60% किडनी फेलियर के मामले हाई ब्लड प्रेशर से संबंधित होते हैं। उच्च रक्तचाप के कारण किडनी की रक्त वाहिकाएं संकरी या क्षतिग्रस्त हो जाती हैं, जिससे किडनी का रक्त संचार बाधित होता है।

न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन की रिपोर्ट के अनुसार, लंबे समय तक खुद से ही इन दवाओं के इस्तेमाल के कारण भी किडनी की समस्याओं का जोखिम बढ़ जाता है।

4 of 5
धूम्रपान की आदत है खतरनाक - फोटो : Freepik.com
धूम्रपान से तुरंत बना लें दूरी

धूम्रपान का नकारात्मक असर संपूर्ण स्वास्थ्य पर हो सकता है, पर इस आदत के कारण किडनी को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचने का खतरा हो सकता है। धूम्रपान आपके दिल और रक्त वाहिकाओं (कार्डियोवैस्कुलर सिस्टम) को नुकसान पहुंचती है, जिससे किडनी में रक्त का प्रवाह बाधित हो सकता है।

रक्त प्रवाह में होने वाली समस्याओं का जोखिम किडनी की सेहत के लिए भी बहुत हानिकारक माना जाता है। किडनी सहित संपूर्ण सेहत को ठीक रखने के लिए धूम्रपान से दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
ब्लड प्रेशर बढ़ने का किडनी पर असर - फोटो : Freepik.com
ब्लड प्रेशर और शुगर को कंट्रोल में रखना जरूरी

कई अध्ययनों में इस बात को लेकर चिंता जताई जाती रही है कि युवा आबादी में हाई ब्लड प्रेशर की समस्या बढ़ती जा रही है। समय के साथ उच्च रक्तचाप आपके पूरे शरीर में रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंचाने लगता है, इससे किडनी जैसे महत्वपूर्ण अंगों में रक्त की आपूर्ति कम हो जाती है। उच्च रक्तचाप के कारण आपकी किडनी में मौजूद छोटी फिल्टरिंग इकाइयां भी क्षतिग्रस्त होने लग जाती हैं जिससे किडनी का सामान्य कार्य बाधित होने लगता है।

इसी तरह से शुगर को कंट्रोल रखना भी किडनी को स्वस्थ रखने के लिए आवश्यक है।




--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें