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Health Alert: किचन में इस्तेमाल होने वाली ये चीजें कहीं आपको न बना दें कैंसर का मरीज? हो जाइए सावधान

Sat, 15 Mar 2025 02:37 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ बर्तनों से लेकर, रोजाना खान-पान की कई चीजों में ऐसे तत्वों की पहचान की गई है जिसके कारण आपको कैंसर का खतरा हो सकता है। आप भी तो इसका इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं?
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किचन में मौजूद कई चीजों में कैंसर वाले तत्व - फोटो : Adobe Stock
रसोईघरों को किसी भी घर का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है, यहीं से हमें भोजन के रूप में जीवित रहने के लिए आवश्यक ऊर्जा मिलती है। कई रिपोर्ट्स कहते रहे हैं कि भारतीय किचन प्राकृतिक उपचार का घरेलू केंद्र रहा है, क्योंकि इसमें मौजूद मसाले और खान-पान की चीजों में अद्भुत गुण होते हैं जो आपको गंभीर बीमारियों से बचाए रखने में मददगार हो सकते हैं।

पर क्या आप जानते हैं कि यही किचन समय के साथ कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का भी घर बनाता जा रहा है? कुछ अध्ययनों में स्वास्थ्य विशेषज्ञ सावधान करते हैं कि हमारी किचन में कई ऐसी चीजों की संख्या बढ़ती जा रही हैं जिनका अधिक इस्तेमाल कैंसर के जोखिमों को बढ़ा सकता है।

अगर आपकी किचन में भी ऐसी चीजें हैं और आप भी इनका लगातार इस्तेमाल करते रहे हैं तो सावधान हो जाइए, कहीं आप भी कैंसर का शिकार न हो जाएं?
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कैंसर का बढ़ता खतरा - फोटो : Adobe Stock
कैंसर के बढ़ते खतरे को लेकर अलर्ट

खाना पकाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले कुछ बर्तनों से लेकर, किचन में प्रयोग में लाई जाने वाली कई चीजों में ऐसे तत्वों की पहचान की गई है जिसके कारण आपको कैंसर का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हर साल लाखों लोगों की मौत का कारण बनने की वाली ये बीमारी साल-दर-साल बढ़ती ही जा रही है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की आवश्यकता है। कहीं आप भी तो इन चीजों का इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं?
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नॉन-स्टिक बर्तनों से सेहत को होने वाला नुकसान - फोटो : Adobe stock
नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल खतरनाक

रसोई में इस्तेमाल होने वाले नॉन-स्टिक कुकवेयर को कई अध्ययनों में सेहत के लिए नुकसानदायक बताया जाता रहा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि इस तरह के बर्तनों में परफ्लुओरोऑक्टेनोइक एसिड (PFOA) होता है, जो नॉन-स्टिक कोटिंग बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला रसायन है। अध्ययनों से पता चला है कि पीएफओए के कारण दीर्घकालिक रूप में कैंसर का जोखिम हो सकता है।

खाना पकाने के दौरान उच्च तापमान के संपर्क में आने पर इससे हानिकारक रसायन रिलीज होते हैं जो भले ही हमें दिखते न हों पर इससे शरीर को कई तरह से नुकसान होता है। भोजन के संपर्क में आकर ये रसायन हमारे शरीर में पहुंच जाते हैं। इसे हार्मोनल समस्याओं, प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी और संभावित रूप से कैंसर के जोखिमों को बढ़ाने वाला पाया गया है।


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प्लास्टिक और कैंसर का लिंक - फोटो : Amarujala.com
आप भी तो नहीं इस्तेमाल करते हैं प्लास्टिक वाली चीजें

क्या आपकी रसोई में भी प्लास्टिक के बर्तन, बोतल, कंटेनर या टिफिन हैं? अगर हां तो सावधान हो जाइए। प्लास्टिक की इन चीजों को बनाने में बिस्फेनॉल ए (बीपीए) नामक रसायन का इस्तेमाल होता रहा है जो सेहत को गंभीर रूप से क्षति पहुंचाने वाली हो सकती है। बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) एक औद्योगिक रसायन है जिसका उपयोग प्लास्टिक की चीजों के निर्माण में किया जाता है। फूड कंटेनर, दूध की बोतलें और प्लास्टिक की पानी की बोतलें भी इससे तैयार की जाती हैं।

मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट विश्वविद्यालय में जीवविज्ञान के प्रोफेसर एमेरिटस, आर. थॉमस जोलर कहते हैं, मस्तिष्क के विकास, थायरॉइड हार्मोन के साथ-साथ इसका प्रजनन स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर देखा गया है। इस रसायन के कारण कैंसर होने का जोखिम भी काफी बढ़ जाता है।

(प्लास्टिक की चीजें शरीर में बढ़ा रही हैं हानिकारक रसायन, प्रजनन क्षमता और दिमाग दोनों हो सकता है कमजोर)
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प्रोसेस्ड चीजें सेहत के लिए खतरनाक - फोटो : फ्रीपिक
फ्रोजन और प्रोसेस्ड फूड्स के नुकसान

दौड़ती-भागती आजकल की जिंदगी में फ्रोजन और प्रोसेस्ड फूड्स का इस्तेमाल भी बढ़ता जा रहा है। ये चीजें फटाफट खाने के लिए तैयार हो जाती हैं। हालांकि अध्ययनकर्ताओं ने पाया है कि इसमें  ट्रांस फैट और प्रिजर्वेटिव्स की अधिकता हो सकती है जो स्वास्थ्य के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। अगर आप इन चीजों का सेवन अक्सर करते रहते हैं तो इससे हृदय रोग और कुछ कैंसर के खतरा हो सकता है।



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स्रोत और संदर्भ
Does Teflon cause cancer?


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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