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UNICEF: बच्चों के सेहतमंद भविष्य के लिए जरूर लगवाएं ये टीके, जानलेवा बीमारियों-अपंगता से मिलेगी सुरक्षा

Mon, 09 Jan 2023 02:39 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बच्चों के लिए जरूरी है टीकाकरण - फोटो : Unicef
शिशु मृत्युदर लंबे समय से गंभीर वैश्विक चिंता का विषय रही है। बच्चों में कुपोषण के अलावा कई प्रकार की गंभीर और संक्रामक बीमारियों के चलते हर साल बड़ी संख्या में नवजात की मत्यु हो जाती है। हालांकि व्यापक टीकाकरण अभियान के चलते इसमें पिछले एक दशक में बेहतर सुधार देखा गया है। वैक्सीन, बचपन की गंभीर-घातक बीमारियों से बचाने के साथ शरीर में प्राकृतिक सुरक्षा को उत्तेजित करके भविष्य में भी बच्चों को सुरक्षित रखने में मददगार होते हैं।

यही कारण है कि स्वास्थ्य विशेषज्ञ बच्चों के टीकाकरण को लेकर विशेष जोर देते रहे हैं। टीकाकरण करा चुके बच्चे बीमारी से तेजी से और अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला कर सकते हैं।
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बच्चों का समय पर टीकाकरण बहुत आवश्यक - फोटो : UNICEF

भारत में बच्चों का टीकाकरण

भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां 80-90 के दशक में कई प्रकार की संक्रामक बीमारियों के चलते हर साल न सिर्फ हजारों बच्चों की मौत हो जाती थी, साथ ही पोलियो जैसे संक्रमण के चलते जीवन की गुणवत्ता भी प्रभावित हो जाती थी। हालांकि टीकाकरण को लेकर बढ़ी जागरूकता के चलते इनमें से ज्यादातर बीमारियों को अब काफी हद तक नियंत्रित कर लिया गया है।

यूनाइटेड नेशन्स इंटरनेशनल चिल्ड्रेन्स इमरजेंसी फंड (यूनिसेफ) निरंतर टीकाकरण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चला रहा है। आइए जानते हैं कि शिशुओं को कौन सी वैक्सीन जरूर लगवानी चाहिए? मात-पिता को इसको लेकर गंभीरता से ध्यान देने की आवश्यकता है।
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संक्रामक बीमारियों से बचाव के लिए टीकाकरण - फोटो : istock
बच्चों का टीकाकरण आवश्यक

कई गंभीर और संक्रामक बीमारियों से बचाव और इसके खिलाफ प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने के लिए जन्म के प्रथम माह से ही टीकाकरण की शुरुआत हो जाती है। सरकारी अस्पतालों में ज्यादातर वैक्सीन मुफ्त उपलब्ध हैं। पोलियो जैसे संक्रामक रोग से बचाने के लिए घर-घर जाकर ड्रॉप्स पिलाया जाता है। जन्म के समय ही टीकाकरण पुस्तिका दी जाती है जिसमें नियमित अंतराल पर बच्चे को कौन सी वैक्सीन लगनी है इसका विवरण होता है।

आइए जानते हैं कि बच्चों को गंभीर और जानलेवी बीमारियों से बचाने के लिए कौन से टीके दिए जाते हैं?

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खसरा से बचाने के लिए वैक्सीनेशन - फोटो : Pixabay
खसरा से बचाव के लिए टीकाकरण

बच्चे में खसरा के कारण मृ्त्यु का जोखिम अधिक होता है, इससे बचाने के लिए एमएमआर वैक्सीन की दो डोज बच्चों को दी जाती है। यह वैक्सीन खसरा, मम्स और रूबेला जैसे घातक और जानलेवा बीमारियों के जोखिम से बचाने में मददगार है। इसका पहला टीका 12-15 माह और दूसरा 4-6 साल के बीच दी जाती है। सभी बच्चों को यह टीका जरूर लगवाना चाहिए।
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सभी बच्चों का वैक्सीनेशन जरूरी - फोटो : iStock
हेपेटाइटिस-बी का टीका

हेपेटाइटिस बी, हेपेटाइटिस बी वायरस (एचबीवी) के कारण होने वाला जानलेवा संक्रमण है। इससे संक्रमण की स्थिति में लिवर की गंभीर बीमारियों का जोखिम होता है। डब्ल्यूएचओ के सुझावों के अनुसार शिशुओं को जन्म के बाद ही इसका टीका लगाना चाहिए। कम से कम 4 सप्ताह के अंतराल पर हेपेटाइटिस बी के टीके की दूसरी-तीसरी खुराक दी जाती है। यह जीवनभर के लिए इस गंभीर संक्रमण से मृत्यु के जोखिम को कम करने में सहायक है।
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बच्चों को पोलियो की खुराक - फोटो : iStock
ओरल पोलियो वैक्सीन

पोलियोमाइलाइटिस बच्चों में अपंगता का कारण बनने वाली बीमारी है। वैक्सीनेशन के व्यापक अभियान के परिणामस्वरूप भारत ने इस बीमारी पर विजय पा ली है। पोलियो से बचाव के लिए ओरल पोलियो वैक्सीन (ओपीवी) दी जाती है। पांच साल तक के बच्चों को दो बूंद वाली यह वैक्सीन गंभीर रोग के जोखिम से बचाने में मददगार है।
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नवजात का वैक्सीनेशन - फोटो : istock
रोटावायरस वैक्सीन

रोटावायरस, दुनियाभर में शिशुओं और छोटे बच्चों में गंभीर डायरिया का सबसे आम कारण है। रोटावायरस वैक्सीन रोटावायरस संक्रमण से बचाती है और भविष्य में इसके गंभीर रोग के जोखिम को कम करने में भी लाभकारी है। बच्चों को 6, 10 और 14 सप्ताह में यह टीका दिया जाता है। भारत में वैक्सीनेशन को लेकर बढ़ाई गई जागरूकता के चलते इस संक्रमण पर काफी हद तक नियंत्रण पा लिया गया है।



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नोट: यह लेख यूनिसेफ द्वारा साझा की गई जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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