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Health Alert: केरल में एक नई बीमारी को लेकर अलर्ट, कर देती है दिमाग में सूजन; 80% लोगों में नहीं दिखते लक्षण

Tue, 28 Apr 2026 08:18 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केरल में वेस्ट नाइल फीवर को लेकर अलर्ट जारी किया गया है। ये बीमारी मच्छरों के जरिए फैलती है और गंभीर मामलों में दिमाग में सूजन यानी ब्रेन इंफ्लेमेशन का कारण बन सकती है। आइए इस समस्या के बारे में आगे विस्तार से जान लेते हैं।
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केरल में हेल्थ अलर्ट - फोटो : Amarujala.com/AI
केरल इन दिनों फिर से एक संक्रामक बीमारी की चपेट में है। हाल के महीनों में यहां ब्रेन ईटिंग अमीबा, निपाह, अफ्रीकी स्वाइन फीवर और हेपेटाइटिस-ए संक्रमण के मामले तेजी से बढ़े थे। हालिया रिपोर्ट्स में यहां एक नई बीमारी को लेकर लोगों को सतर्क किया गया है।

स्वास्थ्य अधिकारियों ने केरल के कई हिस्सों में वेस्ट नाइल फीवर को लेकर लोगों को सावधान किया है। फिलहाल अभी किसी व्यक्ति में इस बीमारी की पुष्टि तो नहीं हुई है लेकिन कुछ संदिग्ध मामले जरूर सामने आए हैं जिसने चिंता बढ़ा दी है। अधिकारियों ने बताया कि सैंपल को जांच के लिए भेज दिया गया है। इसके नतीजे आने में कुछ दिनों का समय लगेगा, तब तक सभी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। पल्लीकारा, पोनेक्कारा और पल्लुरुथी जैसे जिन इलाकों में संदिग्ध मामले रिपोर्ट किए गए हैं, वहां पर जांच-पड़ताल बढ़ा दी गई है। 

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वेस्ट नाइल फीवर गंभीर स्थितियों में दिमाग में सूजन जैसी जटिलताओं का कारण बन सकता है। सबसे ज्यादा चिंता की बात ये है कि इस बीमारी के शिकार 80% लोगों में कोई लक्षण नजर नहीं आते हैं।
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मच्छरों के कारण होने वाली बीमारी - फोटो : Adobe Stock
केरल में वेस्ट नाइल फीवर के संदिग्ध मामले सामने आने के बाद स्वास्थ्य अधिकारियों ने अलर्ट जारी किया है। स्थानीय लोगों को संक्रमण के जोखिम को कम करने के लिए एहतियाती उपायों का पालन करने की सलाह दी गई है।

जान लीजिए क्या है ये बीमारी?

वेस्ट नाइल फीवर मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों में से एक है।
 
  • ये वायरल इन्फेक्शन है जो मुख्य रूप से क्यूलेक्स मच्छरों से फैलता है।
  • 80% मामलों में इसके कोई लक्षण दिखाई नहीं देते, जबकि 20% मामलों में हल्के फ्लू जैसी बीमारी होती है। 
  • ये संक्रमण गंभीर स्थितियों में न्यूरोलॉजिकल बीमारी का भी कारण बन सकता है, हालांकि ऐसे मामले 1% से भी कम रहे हैं। 
  • इस बीमारी को रोकने या बचाव के लिए कोई खास वैक्सीन या इलाज उपलब्ध नहीं है। बस इसके लक्षणों को नियंत्रित करने की कोशिश की जाती है।
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मच्छरों से होने वाली बीमारियां - फोटो : Freepik.com
कैसे फैलता है ये संक्रमण?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित पक्षियों से मच्छरों में पहुंचता है और फिर मच्छर के काटने से इंसानों में फैल सकता है। बरसात के मौसम में जलभराव, गंदगी में मच्छरों का खतरा बढ़ जाता है जो लोगों में संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकते हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों में गंभीर संक्रमण का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी रोग, कैंसर या फिर जिन लोगों की इम्युनिटी कमजोर होती है उनमें संक्रमण होने और इसके गंभीर रूप लेने का जोखिम अधिक हो सकता है।

मेडिकल रिपोर्ट्स में गर्भवती महिलाओं को भी खास सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है।

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वेस्ट नाइल फीवर के क्या लक्षण हैं? - फोटो : Adobe Stock
वेस्ट नाइल फीवर की क्या पहचान है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो ज्यादातर लोगों में इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं, पर संक्रमण के कारण मरीजों को हल्के बुखार, सिरदर्द, शरीर में दर्द और थकान जैसी समस्याएं होने लगती हैं।
 
  • कुछ लोगों को मांसपेशियों में दर्द, जी मिचलाने और उल्टी की दिक्कत हो सकती है।
  • त्वचा पर रैशेज लिम्फ नोड्स में सूजन और आंखों के पीछे दर्द बना रह सकता है।
  • गंभीर स्थितियों में ये भ्रम, दौरे जैसी समस्याएं भी पैदा कर सकता है।
  • संक्रमितों में लकवा और  कोमा होने का जोखिम भी देखा जाता रहा है।
  • यह संक्रमण जब नर्वस सिस्टम पर अटैक करता है तो इससे गर्दन में अकड़न, तेज सिरदर्द और दिमाग में सूजन का खतरा भी हो सकता है।
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मच्छरों से बचाव करते रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
इस बीमारी से बचाव के लिए क्या करें? 

वेस्ट नाइल फीवर से बचाव के लिए सबसे पहले मच्छरों से बचना जरूरी है।
 
  • घर के आसपास पानी जमा न होने दें। कूलर, गमले, टायर और टंकियों की नियमित सफाई करें। 
  • मच्छरदानी का उपयोग करें और खिड़कियों पर जाली लगाएं। 
  • बाहर जाते समय पूरे शरीर को ढकने वाले कपड़े पहनें।
  • मच्छर भगाने वाली क्रीम या रिपेलेंट का इस्तेमाल संक्रमण से बचाव में मदद करता है। 
  • यदि बुखार, सिरदर्द और कमजोरी लंबे समय तक बनी रहे, तो डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
  • इसका कोई विशेष वैक्सीन या एंटीवायरल इलाज उपलब्ध नहीं है। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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