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फ्लू और कोरोना साथ मिलकर शरीर को पहुंचा रहा है ज्यादा नुकसान, बढ़ जाता है मौत का खतरा

Sat, 28 Nov 2020 06:53 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना से टकरायेगा फ्लू का वायरस - फोटो : सोशल मीडिया

आने वाले समय में भारत में कोरोना के दुष्प्रभाव और भी भयानक हो सकते हैं। इसके पीछे मुख्य कारण यह है कि नवंबर में उत्तरी गोलार्ध में फ्लू की शुरूआत हो जाती है। गौरतलब है कि भारत भी उत्तरी गोलार्ध का ही हिस्सा है। ऐसे में यदि फ्लू और कोरोना का टकराव हुआ तो यह किसी विस्फोट से कम नहीं होगा। नवंबर से फैलने वाला फ्लू फरवरी तक गोलार्ध में बना रहता है। चीन और अमेरिका में तो अबतक ऐसे कुछ मामले भी सामने आए हैं जिसमें मरीज एकसाथ कोरोना और इंफ्लूएंजा वायरस से होने वाले ‘फ्लू’ का शिकार हुए हैं। अगली स्लाइड्स से जानते हैं इन दोनों वायरस के टकराने से इंसान पर किस तरह पड़ेगा प्रभाव।

 

 

 

 

 

 

  

 

 

 

 

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कोरोना और फ्लू दोनों एक से तरीकों से करते हैं शरीर को प्रभावित - फोटो : Amar Ujala

इस तरह होगा कोइंफेक्शन का परिणाम
वे चिकित्सक जो अबतक इस तरह के मामलों का इलाज कर चुके हैं, उनका कहना है कि कोरोना और फ्लू के वायरस में यह समानता है कि दोनों ही शरीर को इस तरह प्रभावित करते हैं कि रोगी को श्वास संबंधी समस्याओं और ब्लड- ऑक्सीजन लेवल में कमी की समस्याओं से जूझना पड़ता है। विदेश में इस तरह के मामले सामने आना शुरू हो चुके हैं। सामान्यत: दिसंबर और जनवरी माह में भारत में भी अधिकतर लोग, जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम है, फ्लू का शिकार हो जाते हैं।

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पहला वायरस कर देता है शरीर की रोग-प्रतिरोधक क्षमता को कम - फोटो : YouTube

इस तरह मिलते हैं वायरस
स्टेनफोर्ड हेल्थकेयर के संक्रमण विशेषज्ञ डीन विन्सलॉ के मुताबिक, यह एक बहुत छोटा अंतराल है जब एक वायरस के शरीर में मौजूद होने के वक्त ही छोटी सी जगह से दूसरा वायरस कोशिकाओं तक प्रवेश कर जाए। पहले वायरस ने वैसे ही मरीज की रोग- प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर ही दिया होता है, जिस कारण दूसरा वायरस आसानी से शरीर में प्रवेश कर सकता है। 

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वेंटीलेटर पर संभव हो पाएगा मरीज का इलाज - फोटो : facebook

मरने की संभावना हो जाती है दोगुनी
हाल ही में हुए एक शोध के अनुसार, यदि किसी व्यक्ति पर दोनों वायरस ने एक साथ हमला किया तो उसके मरने की संभावना एक सामान्य कोरोना मरीज के मुकाबले दोगुनी हो जाएगी। इस तरह के मरीजों का उपचार आईसीयू और वेंटीलेटर पर ही संभव हो पायेगा। चीन में भी जिन मरीजों का पर्यवेक्षण किया गया, उनकी स्थिति कुछ इसी तरह पाई गई। 

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मोटे लोगों को है खतरा - फोटो : iStock

इन लोगों को रहना होगा बचकर
बुजुर्गों के लिए ये कोइंफेक्शन किसी खतरे से खाली नहीं है। बुजुर्गों की रोग- प्रतिरोधक क्षमता बेहद कमजोर होती है। बहुत जरूरी है कि आने वाले दिनों में उनका अधिक ख्याल रखा जाए। वे लोग जो फेफड़ों के बीमारियों, कैंसर, मोटापे आदि से पीड़ित हैं, उनके लिए भी इस कोइंफेक्शन से बच पाना थोड़ा मुश्किल है।

 

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कराना होगे दो टेस्ट - फोटो : Pixabay
बचाव के उपाय
इस कोइंफेक्शन से बचने के लिए बहुत जरूरी है कि यदि लक्षण दिखते हैं तो कोरोना और फ्लू दोनों की अलग-अलग जांच कराई जाए क्योंकि दोनों के लक्षण भी लगभग सामान्य है। सामान्य निगरानी से दोनों में अंतर कर पाना संभव नहीं है। इसलिए बेहतर विकल्प यही है कि समय रहते दोनों की जांच करा ली जाए अन्यथा इस समस्या से जूझना आसान नहीं है।
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मास्क बचाएगा संक्रमण से - फोटो : pixabay

मास्क ही है हथियार
कोरोना की ही तरह है फ्लू भी एक वायरस है जे कि किसी के संपर्क में आने से या ठंडे वातावरण से फैलता है इसलिए बहुत जरूरी है कि सामाजिक दूरी का नियम ध्यान में रखा जाए और बिना मास्क के बाहर न निकला जाए। सर्दियों के दिनों में बहुत जरूरी है कि प्रतिदिन 10 से 15 मिनट धूप में बैठें और थोड़ी बहुत सर्दी को भी नजरअंदाज न करें।  

 

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