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Eye Diseases: आंखों में रहती है ड्राइनेस और अंधेरे में कम दिखता है? जानिए आखिर क्यों हो रही है ये दिक्कत

Wed, 12 Aug 2026 08:40 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

 विटामिन-ए की कमी को केवल आंखों की समस्या मानना सही नहीं होगा। इसकी गंभीर कमी होने पर आंखों में सूखापन, नाइट ब्लाइंडनेस और आगे चलकर कॉर्निया को गंभीर नुकसान तक हो सकता है। 
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आंखों में होने वाली दिक्कतों के बारे में जानिए - फोटो : Amarujala.com/AI
आंखों की बीमारियां अब केवल उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या भर नहीं रह गई हैं, कम उम्र के लोग भी इसका शिकार हो रहे हैं। लाइफस्टाइल और खान-पान में गड़बड़ी के साथ-साथ मोबाइल-लैपटॉप का बढ़ता इस्तेमाल आंखों के लिए मुश्किलें बढ़ाता जा रहा है। क्या आपको भी कुछ समय से कम दिख रहा है,  अंधेरे में अचानक रोशनी कम पड़ने पर किसी को चीजें साफ देखने में परेशानी होती है? और आंखों में अक्सर ड्राइनेस यानी सूखापन बना रहता है?  

कई बार हम इन संकेतों को थकान, मोबाइल या मौसम का असर समझकर टाल देते हैं। लेकिन कुछ मामलों में शरीर के भीतर किसी जरूरी पोषक तत्व की कमी भी इसकी वजह हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विटामिन-ए की कमी इन समस्याओं का एक बड़ा कारण हो सकती है। ये आंखों के लिए बहुत जरूरी विटामिन है, इसकी कमी होने पर आपके लिए कई तरह की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। विटामिन-ए की कमी आंखों के साथ-साथ शरीर के कई अन्य अंगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ाने वाला हो सकती है।
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विटामिन-ए क्यों जरूरी है? - फोटो : Freepik.com
अच्छी सेहत के लिए जरूरी है विटामिन-ए

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, विटामिन-ए हमारे पूरे शरीर को स्वस्थ रखने के लिए जरूरी है। इससे  शरीर की संक्रमणों से लड़ने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। बच्चों में इसका असर और गंभीर हो सकता है।  इस उम्र में शरीर के विकास और इम्यून सिस्टम के लिए पोषक तत्वों की जरूरत अधिक होती है, विटामिन-ए उनमें सबसे जरूरी है।

अच्छी बात ये है कि संतुलित डाइट के माध्यम से विटामिन-ए की जरूरत काफी हद तक पूरी की जा सकती है। गहरी हरी पत्तेदार सब्जियों से लेकर गाजर, शकरकंद, आम, अंडे, दूध और कुछ मछलियों में विटामिन-ए भरपूर मात्रा में पाई जाती है। 
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आंखों की दिक्कतों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
 विटामिन-ए आखिर शरीर के लिए इतना जरूरी क्यों है?

विटामिन-ए आंखों की रोशनी को ठीक बनाए रखने के लिए सबसे जरूरी है। इसके अलावा यह इम्यून सिस्टम के सामान्य कामकाज, कोशिकाओं की वृद्धि और विकास तथा प्रजनन से जुड़ी प्रक्रियाओं में भी भूमिका निभाता है। विटामिन-ए हृदय, फेफड़ों और दूसरे अंगों के सामान्य कामकाज में भी योगदान देता है।
 
  • विटामिन-ए की कमी के कारण नाइट ब्लाइंडनेस होना सबसे आम है।
  • असल में आंखों की रेटिना में प्रकाश को महसूस करने वाली प्रक्रिया के लिए विटामिन-ए जरूरी है। इसकी कमी होने पर अंधेरे में आंखों की क्षमता प्रभावित हो सकती है। 
  • हालांकि रात में कम दिखाई देना हमेशा विटामिन-ए की कमी के कारण ही हो, यह जरूरी नहीं है। 
  • आंखों की दूसरी समस्याएं भी इसका कारण हो सकती हैं। इसलिए लगातार ऐसा होने पर खुद से सप्लीमेंट लेने के बजाय डॉक्टर से जांच कराना बेहतर है।

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आंखों की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
आंखों में सूखापन का भी खतरा 

विटामिन-ए की गंभीर कमी आंखों की सतह को प्रभावित कर सकती है। इस स्थिति को जेरोफ्थैल्मिया कहा जाता है।
 
  • शुरुआत में आंखों की सतह पर सूखापन और बदलाव दिखाई दे सकते हैं। गंभीर कमी होने पर कॉर्निया में सूखापन, क्षति और अल्सरेशन जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती हैं। 
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विटामिन-ए की कमी का इलाज न मिलने पर कॉर्निया को नुकसान होने के साथ दृष्टि भी स्थायी रूप से प्रभावित हो सकती है।
  • यही कारण है कि आंखों में लगातार सूखापन, रात में देखने में परेशानी या दृष्टि में बदलाव को सामान्य मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
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इम्युनिटी मजबूत रखने के लिए विटामिन्स - फोटो : Freepik.com
विटामिन-ए की कमी के कारण और क्या दिक्कतें होती हैं?
 
  • विटामिन-ए शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली के सामान्य कामकाज में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसकी कमी होने पर शरीर संक्रमणों से सही तरीके से मुकाबला नहीं कर पाता है। 
  • विटामिन-ए शरीर की कोशिकाओं की वृद्धि और विकास में भूमिका निभाता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार विटामिन-ए की कमी बच्चों में वृद्धि की गति कम होने का कारण बन सकती है।
  • विटामिन-ए की कमी को एनीमिया से जोड़कर भी देखा जाता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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