नींद पूरी न होने के कारण हो सकती हैं गंभीर समस्याएं
- फोटो : Adobe stock
ये दावा सही है या नहीं?
डॉक्टर सत्यकांत कहते हैं, अस्पतालों में अक्सर ऐसे मरीज मिलते हैं जो कहते हैं कि वे वर्षों से सोए नहीं हैं। वास्तविकता यह होती है कि वे सोते तो हैं, लेकिन उनकी नींद बहुत हल्की होती है, बार-बार टूटती है और गहरी नींद का अनुभव नहीं हो पाता। परिणामस्वरूप व्यक्ति को लगता है कि वह पूरी रात जागता रहा। यह स्थिति अक्सर अनिद्रा, चिंता, अवसाद, लंबे समय के मानसिक तनाव, मानसिक उत्तेजना की अवस्थाओं या नशे के सेवन से जुड़ी होती है। कुछ मामलों में यह विश्वास इतना मजबूत हो जाता है कि मरीज जांच के बाद भी मानने को तैयार नहीं होता कि वह सोता है।
चिकित्सकीय दृष्टि से ऐसे मामलों में न मरीज की बात को मजाक में लेना चाहिए और न ही बिना मूल्यांकन उसे पूरी तरह सच मान लेना चाहिए। सही तरीका है ,नींद का विस्तृत इतिहास लेना, नींद का रिकॉर्ड बनवाना और मानसिक स्थिति का समुचित आकलन करना।
50 वर्षों से नींद न आने की बाद कोई शारीरिक सच्चाई नहीं, बल्कि एक मानसिक अनुभव हो सकता है।
--------------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।