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Vinod Kambli: क्यों बनता है ब्रेन में क्लॉट, क्या हैं इससे खतरे? पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली हो गए हैं शिकार

Thu, 16 Apr 2026 07:47 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पूर्व क्रिकेटर विनोद कांबली के ब्रेन में खून के थक्के बन गए हैं, जिससे ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ गया है। ये दिमाग में खून के संचार को बाधित कर बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।
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ब्रेन में खून के थक्के की समस्या - फोटो : Adobe stock
भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व खिलाड़ी विनोद कांबली लगातार कई प्रकार की स्वास्थ्य समस्याओं से जुझ रहे हैं। उनको लेकर सामने आ रही हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक उनके ब्रेन में खून के थक्के बन गए हैं, जिससे ब्रेन स्ट्रोक होने का खतरा बढ़ गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इन थक्कों को अब हटाया भी नहीं जा सकता है क्योंकि शुरुआती स्थिति में सावधानी नहीं बरती गई।

कांबली के पुराने दोस्त मार्कस कुटो ने बताया कि पिछले कई महीनों से उन्हें याददाश्त से संबंधित दिक्कतें भी हो रही हैं। उनकी याददाश्त अच्छी नहीं है, लेकिन पिछले छह महीनों में इसमें कोई गिरावट भी नहीं आई है। उन्हें ज्यादा कुछ याद नहीं रहता, लेकिन जब कोई बात क्लिक कर जाती है, तो उन्हें याद आ जाता है। वरना, उनके लिए यह मुश्किल हो जाता है।

फिलहाल कांबली की सेहत के लिए सबसे बड़ा खतरा ब्रेन में नोटिस किए गए ब्लड क्लॉट्स हैं, जो संभवत: दिमाग में खून के संचार को बाधित कर बड़ी समस्याओं का कारण बन सकते हैं।

आइए समझते हैं कि ब्रेन कॉल्टिंग होती क्यों है, ये कितना खतरनाक है?
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विनोद कांबली की सेहत - फोटो : ANI
ठीक नहीं रहती है कांबली की सेहत

गौरतलब है कि विनोद कांबली लंबे समय से कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं से परेशान रहे हैं। दिसंबर 2024 में अमर उजाला में प्रकाशित एक रिपोर्ट में हमने बताया था कि किस तरह से उन्हें खुद से चलने तक में परेशानी हो रही थी। उन्हें सहारा देकर चलाया जा रहा था। अब वह एक नई समस्या का शिकार हो गए हैं। 

मार्कस कुटो ने बताया कि डॉक्टर कह रहे हैं कि विनोद को ब्रेन स्ट्रोक का खतरा लगातार बना हुआ। उन्होंने शराब पीना छोड़ दिया है, लेकिन कभी-कभी वह लोगों से सिगरेट मांगते हैं। वे ऑटो ड्राइवरों से सिगरेट मांगते हैं और लोग खुशी-खुशी उन्हें सिगरेट दे देते हैं, यह सोचकर कि वे ‘विनोद कांबली’ की मदद कर रहे हैं। लेकिन उन्हें यह एहसास नहीं होता कि वे कितना नुकसान पहुंचा रहे हैं। 

आइए जानते हैं कि ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग की दिक्कत होती क्यों है?
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ब्रेन में खून के थक्के बनने की समस्या - फोटो : Adobe Stock
ब्लड क्लॉटिंग के बारे में जानिए

दिमाग में खून का थक्का बनना एक गंभीर मेडिकल इमरजेंसी है, जिसके कारण दिमाग तक खून और ऑक्सीजन का प्रवाह बाधित हो जाता है। ये क्लॉट इस्केमिक स्ट्रोक का कारण बन सकते हैं। इस प्रकार का स्ट्रोक दुनियाभर में वयस्कों में विकलांगता और मौत का मुख्य कारण है। 
 
  • नसों में क्लॉटिंग की वजह से दिमाग की कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है, जिससे कोशिकाएं डेड होने लगती हैं।
  • खून की सप्लाई में कुछ मिनटों की रुकावट भी दिमाग को ऐसा नुकसान पहुंचा सकती है जिसकी भरपाई मुमकिन न हो। 

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ब्रेन से संबंधित समस्याओं के कारण - फोटो : Adobe Stock
क्यों होती है क्लॉटिंग की दिक्कत?

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कुछ प्रकार की मेडिकल स्थितियां, जीवनशैली और आनुवंशिक कारकों के चलते खून के थक्कों की समस्या बढ़ जाती है। ये थक्के ब्रेन के अलावा शरीर में कई अन्य हिस्सों में भी हो सकते हैं।
 
  • एट्रियल फाइब्रिलेशन, हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल, हार्ट वाल्व की बीमारी, एथेरोस्क्लेरोसिस, मोटापा जैसे मेडिकल स्थितियां थक्कों का कारण बन सकती हैं। 
  • इसके अलावा लाइफस्टाइल की समस्याएं जैसे धूम्रपान-तंबाकू का सेवन, बहुत ज्यादा शराब पीना, शारीरिक रूप से सक्रिय न रहना, ट्रांस फैट और नमक ज्यादा खाना भी इस समस्या का कारण हो सकता है।
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ब्रेन क्लॉटिंग के कारण होने वाली दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
कैसे जानें कहीं आपको भी तो नहीं हो रही है क्लॉटिंग

ब्रेन में क्लॉटिंग होने के कारण आपको कई तरह की दिक्कतें होनी शुरू हो जाती हैं, जिसपर गंभीरता से ध्यान दिया जाना जरूरी है।
 
  • अचानक और तेज सिरदर्द होना संकेत है कि ब्रेन में खून का संचार बाधित हो रहा है। 
  • शरीर के एक तरफ सुन्न होना या लकवा मारना
  • धुंधला या दोहरी दृष्टि होना
  • शारीरिक संतुलन बिगड़ना, चलते समय चक्कर आना।
  • याददाश्त से जुड़ी समस्याएं
  • दौरे पड़ना (गंभीर मामलों स्ट्रोक के कारण)



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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