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क्या शाकाहारी लोग नहीं होते हैं कोरोना वायरस के शिकार?

Mon, 25 May 2020 05:38 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस - फोटो : पीटीआई
दुनियाभर में कोरोना वायरस महामारी का कहर जारी है। साथ ही झूठी और गुमराह करने वाली स्वास्थ्य सलाह भी व्यापक रूप से ऑनलाइन फैल रही हैं। हमने इनमें से कुछ सबसे हालिया उदाहरण लिए हैं और यह जाना है कि ये कहां से पैदा हुई हैं।

वे डॉक्टर जिन्होंने शाकाहारी बनने की सिफ़ारिश नहीं की
अक्सर ऐसे संदेश साझा होते हैं जिनमें आमतौर पर ठीक सलाह होती है, लेकिन इनमें अतिरिक्त दावे भी मिले होते हैं जो साफतौर पर गुमराह करने वाले होते हैं और ये नुकसानदेह भी हो सकते हैं। चूंकि, ये बार-बार एनक्रिप्टेड सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा किए जाते हैं ऐसे में इन्हें ट्रैक करना मुश्किल हो सकता है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
भारत के दो प्रमुख मेडिकल संस्थानों और एक प्रमुख भारतीय डॉक्टर ने व्हॉट्सएप ग्रुप्स पर बड़े पैमाने पर साझा किए गए एक ऐसे फर्जी संदेश की आलोचना की है जिसमें उनके नाम पर स्वास्थ्य सलाह दी गई है। इस संदेश में वायरस से बचने के लिए ली जाने वाली सावधानियों की एक लंबी सूची दी गई है। इनमें सामाजिक दूरी का पालन करने, भीड़भाड़ से बचने और साफ-सफाई रखने जैसी कई काम की चीजें शामिल हैं। लेकिन, इसमें शाकाहारी बनने की भी सलाह दी गई है। इसमें बेल्ट, अंगूठी या कलाई घड़ी पहनने से भी बचने की बात कही गई है। इनमें से किसी भी उपाय से वायरस से बचने में मदद मिलने का कोई प्रमाण नहीं है।

कोविड-19 को लेकर डब्ल्यूएचओ की पोषण संबंधी सलाह में प्रोटीन के साथ फल और सब्जियां लेने की बात कही गई है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : ANI
फ्लू वैक्सीन से कोविड-19 का जोखिम नहीं बढ़ता है
यह इस वजह से अहम है क्योंकि इसमें एक वास्तविक स्टडी की ओर इशारा किया गया है। फेसबुक पर बड़े पैमाने पर साझा की गई एक पोस्ट में दावा किया गया है कि अगर आपके कभी इंफ्लूएंजा टीका लगा है तो आपके कोविड-19 की चपेट में आने के ज्यादा आसार हैं। इस पोस्ट में साक्ष्य के तौर पर यूएस मिलिटरी की छापी गई स्टडी के बारे में बताया गया है। लेकिन, यह स्टडी अक्तूबर 2019 में छपी थी। उस वक्त तक कोविड-19 शुरू नहीं हुआ था। साथ ही इसमें इस्तेमाल किए गए आंकड़े 2017-18 के फ्लू सीजन के हैं।

इस बात के कोई साक्ष्य नहीं हैं कि फ्लू जैब (फ्लू की वैक्सीन) से आपके कोविड-19 के संपर्क में आने का जोखिम बढ़ जाता है। यूएस सेंटर्स फॉर डिसीज कंट्रोल की सलाह स्पष्ट हैः "इंफ्लूएंजा वैक्सीनेशन से लोगों के दूसरे रेस्पिरेटरी संक्रमणों की जद में आने के आसार बढ़ नहीं जाते हैं।"

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
लंबे वक्त तक फेस मास्क पहनना नुकसानदेह नहीं
एक और गुमराह करने वाला आर्टिकल सोशल मीडिया पर साझा किया जा रहा है। इसमें कहा गया है कि लंबे वक्त तक मास्क पहनना सेहत के लिए खतरनाक हो सकता है। यह दावा पहली बार स्पैनिश भाषा में ऑनलाइन सामने आया था। इसे दक्षिण और मध्य अमरीका में भी बड़े पैमाने पर साझा किया गया था।

बाद में इसका अनुवाद अंग्रेजी भाषी प्लेटफॉर्म्स पर भी आ गया। इनमें एक नाइजीरियाई न्यूज साइट भी शामिल थी जहाँ से यह 55,000 से ज्यादा बार फेसबुक पर साझा किया गया। आर्टिकल में दावा किया गया था कि ज्यादा लंबे वक्त तक मास्क पहनकर सांस लेने से कार्बन डाईऑक्साइड सांस के जरिए अंदर जाती है। इससे चक्कर आते हैं और शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। ऐसी सिफारिश की जाती है कि हर 10 मिनट में मास्क हटाना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन के डॉ। रिचर्ड मिहिगो ने बीबीसी को बताया कि ये दावे सही नहीं हैं और वास्तव में इन पर चलना खतरनाक हो सकता है। उन्होंने कहा, "नॉन-मेडिकल और मेडिकल मास्क बुने गए धागों से बने होते हैं। इनमें सांस लेने की उच्च क्षमता होती है। इन मास्क से आप सामान्य तरीके से सांस ले सकते हैं और ये कणों को इनसे गुजरकर अंदर जाने से रोकते हैं।"

उन्होंने यह भी कहा है कि मास्क हटाकर सांस लेने से नुकसानदेह असर से बचने की सलाह मानने से वास्तव में संक्रमण का जोखिम हो सकता है। ऐसी कुछ स्थितियां हैं जिनमें फेस मास्क पहनने की शायद सलाह न दी जाए। ये हैः
  • दो साल से कम उम्र के बच्चे जिनके फेफड़े पूरी तरह से विकसित नहीं हो पाए हैं
  • रेस्पिरेटरी बीमारियों वाले लोग जिन्हें सांस लेने में दिक्कत हो सकती है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
धूम्रपान से वायरस से बचने में मदद नहीं मिलती
यह दावा बार-बार आ रहा है। धूम्रपान करने वाले जरूर चाहते होंगे कि यह दावा सही हो। लेकिन, ऐसा है नहीं। इस बात के साक्ष्य नहीं हैं कि ये लोग कोविड-19 के कम जोखिम में हैं। लेकिन, इस तरह के आर्टिकल्स भरे पड़े हैं जिनमें कहा गया है कि धूम्रपान करने वालों को कोरोना होने का डर कम है। मिसाल के तौर पर, यूके मेल ऑनलाइन का यह आर्टिकल लीजिए। यह दसियों हजार बार साझा किया गया है। इसमें कहा गया है कि इस बात के ज्यादा साक्ष्य हैं कि स्मोकिंग से कोरोना वायरस का जोखिम कम हो सकता है। इसमें कहा गया है कि कई देशों में हुए अध्ययनों की एक समीक्षा से यह पता चलता है कि अस्पताल में भर्ती होने वाले कोविड-19 के मरीजों में धूम्रपान करने वालों की तादाद कम है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
इसमें यह भी कहा गया है कि एक्सपर्ट्स इसके बीच में संबंध ढूंढने की कोशिश कर रहे हैं। एक प्रमुख फ्रांसीसी हॉस्पिटल के कराए अध्ययन से यह पता चलता है कि निकोटिन कोविड-19 के संक्रमण को फैलने से रोकने की वजह हो सकती है। निकोटिन पैच और निकोटिन रिप्लेसमेंट थेरेपीज के कोरोना वायरस पर असर को लेकर रिसर्च जारी है। लेकिन, डब्ल्यूएचओ का कहना है, "कोविड-19 के इलाज या इसे रोकने में तंबाकू या निकोटिन के बीच लिंक की पुष्टि करने के लिहाज से अभी पर्याप्त जानकारी नहीं है।"
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
इसमें कहा गया है कि स्मोकिंग के साथ जुड़ी दूसरी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को देखते हुए धूम्रपान करने वाले लोग कोरोना वायरस से गंभीर रूप से बीमार होने के ज्यादा जोखिम में हैं। साथ ही इस बात की स्पष्ट मेडिकल सलाह है कि जो लोग स्मोकिंग करते हैं उन्हें मौजूदा महामारी के चलते इसे छोड़ देना चाहिए क्योंकि इससे उन्हें फेफड़ों की गंभीर बीमारी हो सकती है।
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