डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा किसी भी उम्र वालों में हो सकता है। कुछ जोखिम कारक जैसे आनुवांशिकता, मोटापा, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी आदि के कारण आपमें भी इस रोग के होने का जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकारों- टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज के बारे में चर्चा होती रही है, पर क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं?
इसे लेटेन्ट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन अडल्ट्स (लाडा) के रूप में भी जाना जाता है। यह डायबिटीज काफी धीमी गति से बढ़ता है। जिस तरह से नाम से स्पष्ट है, इसका जोखिम वयस्कों में अधिक देखा जाता रहा है।
अग्न्याशय के पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन न कर पाने के कारण यह डायबिटीज होता है। टाइप-2 की तुलना में, टाइप 1.5 डायबिटीज में आपकी बीटा कोशिकाएं काफी तेज़ी से काम करना बंद कर देती हैं। एक अनुमान के मुताबिक मधुमेह के शिकार 10 फीसदी लोगों में लाडा की समस्या हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञो का कहना है कि अधिकतर मामलों में इस प्रकार के डायबिटीज का सही निदान नहीं हो पाता है।