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Type 1.5 Diabetes: क्या आपको 'लाडा' डायबिटीज के बारे में पता है? जानिए क्यों होती है ये बीमारी

Thu, 06 Aug 2026 08:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप-1 और टाइप-2 से मिलते जुलते होते हैं। इस रोग का निदान वयस्कता के दौरान किया जाता है और टाइप-2 डायबिटीज की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है।
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डायबिटीज की समस्या - फोटो : Freepik.com
डायबिटीज वैश्विक स्तर पर बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा किसी भी उम्र वालों में हो सकता है। कुछ जोखिम कारक जैसे आनुवांशिकता, मोटापा, लाइफस्टाइल में गड़बड़ी आदि के कारण आपमें भी इस रोग के होने का जोखिम बढ़ जाता है। आमतौर पर डायबिटीज के दो प्रमुख प्रकारों- टाइप-1 डायबिटीज और टाइप-2 डायबिटीज के बारे में चर्चा होती रही है, पर क्या आप टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानते हैं?

इसे लेटेन्ट ऑटोइम्यून डायबिटीज इन अडल्ट्स (लाडा) के रूप में भी जाना जाता है। यह डायबिटीज काफी धीमी गति से बढ़ता है। जिस तरह से नाम से स्पष्ट है, इसका जोखिम वयस्कों में अधिक देखा जाता रहा है।

अग्न्याशय के पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन का उत्पादन न कर पाने के कारण यह डायबिटीज होता है। टाइप-2 की तुलना में, टाइप 1.5 डायबिटीज में  आपकी बीटा कोशिकाएं काफी तेज़ी से काम करना बंद कर देती हैं। एक अनुमान के मुताबिक मधुमेह के शिकार 10 फीसदी लोगों में लाडा की समस्या हो सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञो का कहना है कि अधिकतर मामलों में इस प्रकार के डायबिटीज का सही निदान नहीं हो पाता है।
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डायबिटीज 1.5 - फोटो : Freepik.com
टाइप 1.5 डायबिटीज के बारे में जानिए

टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण टाइप-1 और टाइप-2 से मिलते जुलते होते हैं। इस रोग का निदान वयस्कता के दौरान किया जाता है और टाइप-2 डायबिटीज की तरह धीरे-धीरे बढ़ता है।
 
  • हालांकि टाइप-2 डायबिटीज के विपरीत, लाडा एक ऑटोइम्यून बीमारी है और आहार-जीवन शैली में सुधार करने पर भी इसे ठीक नहीं किया जा सकता है।
  • यदि आपका वजन और जीवनशैली भी ठीक है फिर भी यदि आपमें टाइप-2 डायबिटीज का निदान किया गया है, तो संभव है कि यह असल में टाइप 1.5 डायबिटीज हो सकता है। 
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डायबिटीज का बढ़ता जोखिम - फोटो : Freepik.com
टाइप 1.5 डायबिटीज के कारण और इसकी पहचान

टाइप 1.5 डायबिटीज को समझने के लिए यह जानना होगा कि यह अन्य मुख्य प्रकार के डायबिटीज से कैसे अलग है?
 
  • टाइप 1 मधुमेह को एक ऑटोइम्यून स्थिति मानी जाती है क्योंकि यह आपके शरीर द्वारा स्वयं अग्नाशयी बीटा कोशिकाओं को नष्ट करने के कारण बनती है। ये कोशिकाएं शरीर को इंसुलिन बनाने में मदद करती हैं।
  • वहीं टाइप 2 डायबिटीज मुख्य रूप से शरीर द्वारा इंसुलिन के प्रतिरोध की समस्या है। इसमें या तो पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनता नहीं है या फिर शरीर इसका ठीक तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाती है। 

टाइप 1.5 डायबिटीज, इंसुलिन-उत्पादक कोशिकाओं के खिलाफ एंटीबॉडी के कारण अग्न्याशय को होने वाले नुकसान की वजह से होता है। यदि आपके परिवार में पहले किसी को ऑटोइम्यून बीमारियां रह चुकी हैं तो आपमें इस प्रकार के डायबिटीज के विकसित होने का खतरा हो सकता है। यदि टाइप 1.5 डायबिटीज वाला व्यक्ति मोटापे का शिकार है तो यह उसमें इंसुलिन प्रतिरोध का भी कारण बन सकती है। 

कैसे करें इसकी पहचान?

टाइप 1.5 डायबिटीज के लक्षण शुरुआत में बहुत स्पष्ट नहीं होते हैं। इसमें होने वाली दिक्कतें डायबिटीज के अन्य प्रकारों से मिलती जुलती हो सकती हैं। हालांकि यदि इसका समय पर निदान न किया जाए या फिर इसे अनुपचारित छोड़ दिया जाए तो यह समस्या डायबिटीज केटोएसिडोसिस का कारण बन सकती है। टाइप 1.5 डायबिटीज में भी अक्सर टाइप-2 डायबिटीज की तरह ही दिक्कतें हो सकती हैं।
 
  • बार-बार प्यास लगना
  • बार-बार पेशाब जाने की समस्या।
  • वजन घटना।
  • धुंधला दिखाई देना और झुनझुनी की समस्या।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Adobe stock
इस डायबिटीज से कैसे बचें?

टाइप 1.5 डायबिटीज के निदान में समय लग सकता है, अक्सर इसे टाइप-2 डायबिटीज मान लिया जाता है। टाइप 1.5 डायबिटीज वाले लोगों में भी कम से कम एक एंटीबॉडी का सकारात्मक परीक्षण हो सकता है, जो कि टाइप 1 मधुमेह वाले लोगों में होता है। चूंकि इस रोग में आपका शरीर इंसुलिन के उत्पादन को धीमा कर देता है, इसलिए आपको इंसुलिन इंजेक्शन की आवश्यकता हो सकती है। जिन लोगों में बिना इंसुलिन के साथ स्थिति कंट्रोल में नहीं रहती है, उन्हें हमेशा इंसुलिन लेना पड़ सकता है।

वर्तमान में टाइप 1.5 डायबिटीज से बचाव का कोई तरीका नहीं है। टाइप-1 डायबिटीज की तरह, इस स्थिति की में भी अनुवांशिक कारक भूमिका निभाते हैं। टाइप 1.5 डायबिटीज से होने वाली जटिलताओं को कम करने के लिए सही निदान और लक्षणों पर ध्यान देना सबसे जरूरी माना जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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