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Hypertension: बीपी के मरीजों को रोज-रोज दवा खाने से मिलेगी राहत, वैज्ञानिकों ने ढूंढ लिया इसका कारगर तरीका

Thu, 19 Feb 2026 05:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के लिए सिर्फ दवाइयों पर निर्भर रहना काफी नहीं है। सबसे पहले डाइट में बदलाव जरूरी है। नमक का सेवन कम करें, क्योंकि ज्यादा सोडियम बीपी बढ़ाता है। नियमित फिजिकल एक्टिविटी ब्लड प्रेशर को कंट्रोल करने में अहम भूमिका निभाती है।
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ब्लड प्रेशर की समस्या - फोटो : Amarujala.com
हाई ब्लड प्रेशर दुनियाभर में तेजी से बढ़ती गंभीर स्वास्थ्य समस्या है, इसका खतरा समय के साथ बढ़ता ही जा रहा है। विश्व स्वास्थ संगठन (डब्ल्यूएचओ) के आंकड़ों से पता चलता है कि 2024 में दुनियाभर में 30-79 साल की उम्र के 1.4 बिलियन (140 करोड़) वयस्कों को हाइपरटेंशन की समस्या थी। ये आंकड़ा इस आयु वाले कुल लोगों का करीब 33% है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चों में भी हाइपरटेंशन की दिक्कत बढ़ती जा रही है, जो कम उम्र में ही उन्हें कई प्रकार की क्रॉनिक बीमारियों का शिकार बनाने वाली हो सकती है।

हाइपरटेंशन के शिकार मरीजों को डॉक्टर नियमित रूप से दवा लेते रहने की सलाह देते हैं, ताकि उन्हें ब्लड प्रेशर बढ़ने के कारण होने वाली समस्याओं जैसे हार्ट अटैक, स्ट्रोक, किडनी और आंखों की दिक्कतों से बचाया जा सके। मरीजों को जीवनभर ये दवाएं लेनी पड़ सकती हैं।

ऐसे लोगों के लिए बड़ी राहत वाली खबर है। वैज्ञानिकों की टीम ने ऐसा तरीका ढूंढ लिया है जिसकी मदद से बिना दवाओं के भी आप ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकते है। शोधकर्ताओं ने बीपी की दवाओं का विकल्प तलाश लिया है।
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बिना दवाओं के कंट्रोल हो सकेगा ब्लड प्रेशर - फोटो : Adobe Stock Images
बिना दवाओं के कंट्रोल हो सकेगा ब्लड प्रेशर

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दशकों से हर दिन बिना गैप किए एक गोली खाते रहने को हाई बीपी का सबसे प्रभावी इलाज माना जाता रहा है। मरीजों को बीपी की दवाओं पर पूरी तरह निर्भर हो जाना पड़ता है। हालांकि अब ऐसे लोगों के लिए राहत वाली खबर सामने आ रही है। 
 
  • शोधकर्ताओं की टीम ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया है कि जल्द ही रोजाना बिना दवा लिए भी आप ब्लड प्रेशर को कंट्रोल में रख पाएंगे।
  • इसके लिए विकल्प के तौर पर एक इंजेक्शन की काफी चर्चा है, जिसे गोलियों की जगह साल में सिर्फ दो बार लेने से आप बीपी को कंट्रोल में रख पाएंगे।  
  • जिलेबेसिरन नाम के इस इंजेक्शन को विशेषज्ञ भविष्य के लिए काफी असरदार उपाय के तौर पर देख रहे हैं।
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इंजेक्शन से कंट्रोल होगा ब्लड प्रेशर - फोटो : Adobe Stock
हाइपरटेंशन और कई गंभीर समस्याओं का कम होगा खतरा

द लैंसेट जर्नल में इस इंजेक्शन से बीपी को मरीजों को होने वाले फायदों के बारे में जानकारी दी गई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज से हाइपरटेंशन को मैनेज करने का तरीका पूरी तरह बदल सकता है, खासकर ऐसे समय में जब दशकों से मौजूद दवाओं के बावजूद हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों की संख्या दुनियाभर में बढ़ती ही जा रही है।
  • माना जा रहा है कि जिलेबेसिरन इंजेक्शन लंबे समय तक हाइपरटेंशन को कंट्रोल में रखने में मददगार हो सकती है। 
  • इससे हार्ट अटैक और स्ट्रोक के साथ किडनी-आंख की समस्याओं के खतरे को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
  • हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को अगर बेहतर तरीके से कंट्रोल कर लिया जाए तो इसके कारण होने वाली बीमारियों का बोझ भी स्वास्थ्य सेवाओं से कम किया जा सकता है।

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जिलेबेसिरन बीपी इंजेक्शन (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
कैसे काम करेगी ये इंजेक्शन?

इस इंजेक्शन को लेकर साझा की गई जानकारियों के मुताबिक फिलहाल ये अपने लेट-स्टेज ग्लोबल ट्रायल में हैं।  साल में दो बार लगने वाले इस इंजेक्शन से हाई बीपी को आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
 
  • रोश और एल्नीलम फार्मास्यूटिकल्स द्वारा विकसित जिलेबेसिरन इंजेक्शन को साल में दो बार लगवाने की जरूरत होगी।
  • इसमें लिवर में एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को कम करने के लिए स्मॉल इंटरफेरिंग आरएनए (siRNA) टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल किया गया है। 
  • एंजियोटेंसिनोजेन एक प्रोटीन है जो ब्लड प्रेशर रेगुलेशन के लिए जरूरी है। 
  • एंजियोटेंसिनोजेन के उत्पादन को धीमा करके यह इंजेक्शन करीब छह महीने तक ब्लड प्रेशर कंट्रोल में रख सकती है।
  • मिड-स्टेज अच्छे नतीजों के बाद अब ये फेज 3 ट्रायल्स में है।
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ब्लड प्रेशर कंट्रोल करना जरूरी - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

विशेषज्ञ कहते हैं, शुरुआती ट्रायल्स से पता चलता है कि ये इंजेक्शन असरदार हो सकती है, लेकिन शोधकर्ताओं ने चेतावनी दी है कि हाइपरटेंशन जिंदगी भर चलने वाली बीमारी है और ये थेरेपी अभी क्लिनिकल जांच के तहत हैं। स्टैंडर्ड इलाज यानी रोजाना ली जाने वाली दवाओं की जगह लेने के लिए ये कितनी प्रभावी है, फिलहाल दावा नहीं किया जा सकता है।  

गौरतलब है कि द लैंसेट चाइल्ड एंड एडोलसेंट हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक वैश्विक विश्लेषण के अनुसार, पिछले दो दशकों में बच्चों और किशोरों में उच्च रक्तचाप के मामले लगभग दोगुना हो गए है। इसके कारण दिल की बीमारियों का खतरा भी बढ़ता जा रहा है, जिसको लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है। यहां पढ़ सकते हैं पूरी रिपोर्ट




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स्रोत:
New drug therapies for hypertension

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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