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Breast Cancer: ब्रेस्ट में होने वाली 80% से अधिक गांठ होती हैं नॉन-कैंसरस, जानें क्या कहती है स्टडी?

Wed, 18 Feb 2026 07:36 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Non-Cancerous Breast Lumps: आमतौर पर महिलाएं जब भी ब्रेस्ट में गांठ महसूस करती हैं तो सबसे पहले दिमाग में कैंसर का ख्याल आता है, जो स्वाभाविक भी है। मगर ध्यान देने वाली बात यह है कि सभी गांठ कैंसरस नहीं होते हैं। आइए इस लेख में इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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ब्रेस्ट कैंसर में होने वाली गांठें - फोटो : Amar Ujala
Breast Self-Examination Guide: अक्सर महिलाओं को अपने ब्रेस्ट में कोई गांठ महसूस होती है, तो सबसे पहला ख्याल 'ब्रेस्ट कैंसर' का आता है। यह डर स्वाभाविक है, लेकिन एक स्टडी के मुताबिक ब्रेस्ट में पाई जाने वाली लगभग 80 से 85 प्रतिशत गांठें 'नॉन-कैंसरस' होती हैं।

इसका मतलब है कि हर गांठ कैंसर नहीं होती। शरीर की कोशिकाओं द्वारा बनाई गई किसी भी गांठ को तकनीकी रूप से 'ट्यूमर' कहा जा सकता है, लेकिन इनमें से अधिकांश केवल ऊतकों की असामान्य वृद्धि या तरल पदार्थ से भरी थैलियां होती हैं। 

हेल्थ एक्सपर्ट्स के मुताबिक डरने के बजाय गांठ के लक्षणों को समझना और समय पर डॉक्टरी जांच कराना सबसे जरूरी है, क्योंकि शुरुआती पहचान ही सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है। इसलिए आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं और साथ ही ये भी जानेंगे कि कैंसरयुक्त गांठ की पहचान कैसे कर सकते हैं।
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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Adobe Stock
फाइब्रोसिस्टिक परिवर्तन और सिस्ट के कारण
ब्रेस्ट में गांठ होने का सबसे आम कारण 'फाइब्रोसिस्टिक परिवर्तन' है, जो लगभग 50-60% महिलाओं को प्रभावित करता है। यह कोई बीमारी नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलावों के प्रति शरीर की एक प्रतिक्रिया है। इसमें ओव्यूलेशन के दौरान हार्मोन के उतार-चढ़ाव से छोटे-छोटे तरल पदार्थ से भरे सिस्ट या रेशेदार गांठें बन जाती हैं। ये गांठें अक्सर मासिक धर्म से पहले कोमल या दर्दनाक महसूस हो सकती हैं, लेकिन ये पूरी तरह से गैर-कैंसरकारी होती हैं।

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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Adobe Stock
युवा महिलाओं में आम समस्या
18 से 35 वर्ष की महिलाओं में 'फाइब्रोएडेनोमा' सबसे अधिक देखा जाता है। इन्हें 'ब्रेस्ट माउस' भी कहा जाता है क्योंकि ये छूने पर त्वचा के नीचे रबर की तरह इधर-उधर खिसकते हैं। ये ठोस गांठें ग्रंथियों और रेशेदार ऊतकों से बनी होती हैं। हालांकि ये दर्द रहित होती हैं, लेकिन इनका आकार कभी-कभी बढ़ सकता है। अच्छी बात यह है कि फाइब्रोएडेनोमा से कैंसर का खतरा न के बराबर होता है और ये बिना किसी बड़े उपचार के भी रह सकते हैं।

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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com
कैसे करें कैंसरयुक्त गांठ की पहचान
भले ही अधिकांश गांठें सुरक्षित हों, लेकिन कैंसरकारी गांठों को पहचानना जीवन रक्षक हो सकता है। कैंसरयुक्त गांठ आमतौर पर बहुत सख्त, स्थिर (एक जगह जमी हुई) और दर्द रहित होती है। इसके अलावा, यदि निप्पल के आकार में बदलाव, खून जैसा डिस्चार्ज, या त्वचा में डिंपल (गड्ढे) जैसे लक्षण दिखें, तो यह खतरे का संकेत हो सकता है। शोध बताते हैं कि 50% कैंसर की गांठें ब्रेस्ट के ऊपरी बाहरी हिस्से में पाई जाती हैं, जो बगल की तरफ होता है।
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ब्रेस्ट कैंसर - फोटो : Freepik.com
बायोप्सी और नियमित जांच की भूमिका
किसी भी गांठ की प्रकृति जानने का सबसे सटीक तरीका 'बायोप्सी' है। डॉक्टर अल्ट्रासाउंड या मैमोग्राम के बाद अक्सर बायोप्सी की सलाह देते हैं ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि कोशिकाएं घातक नहीं हैं। ध्यान रखें 80% बायोप्सी के परिणाम भी गांठ को 'बेनाइन' ही बताते हैं। घबराने के बजाय हर महीने 'सेल्फ-ब्रेस्ट एग्जाम' करें और किसी भी नए बदलाव पर तुरंत डॉक्टर से मिलें। आपकी जागरूकता ही किसी भी संभावित खतरे को टालने का सबसे सशक्त तरीका है।

स्रोत और संदर्भ
Different Kinds of Breast Lumps


नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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