फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Tuberculosis: देश में टीबी के मामलों को लेकर सामने आई बड़ी जानकारी, अभी कितनी दूर है रोग के खात्मे का लक्ष्य?

Fri, 13 Dec 2024 07:55 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि भारत में टीबी के मामलों की दर कम हुई है। साल 2015 में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 237 लोगों को ये बीमारी थी ये  2023 में 17.7 प्रतिशत घटकर 195 हो गई है।
विज्ञापन
1 of 5
देश में टीबी के मामले - फोटो : Adobe stock
ट्यूबरकुलोसिस या क्षय रोग (टीबी) एक गंभीर समस्या है जो किसी भी उम्र के व्यक्ति को प्रभावित करने वाली हो सकती है। भारत सरकार साल 2025 तक टीबी रोग के उन्मूलन के लक्ष्य पर काम कर रही है, हालांकि जिस तरह से हाल के वर्षों में टीबी के रोगियों के मामले बढ़े हैं उससे ये लक्ष्य काफी कठिन सा नजर आता है। हालांकि देश में टीबी रोग को लेकर सामने आ रहे हालिया आंकड़े थोड़ी राहत देने वाले हैं।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने शुक्रवार को लोकसभा को बताया कि भारत में टीबी के मामलों की दर कम हुई है। साल 2015 में प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 237 लोगों को ये बीमारी थी जो 2023 में 17.7 प्रतिशत घटकर प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 195 हो गई है। हालांकि ये आंकड़े अब भी देश से टीबी के उन्मूलन के लक्ष्य से काफी दूर हैं।

संसद में एक सवाल का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि टीबी से होने वाली मौतों में भी 21.4 प्रतिशत की कमी आई है, जो 2015 में प्रति लाख जनसंख्या पर 28 से घटकर 2023 में प्रति लाख जनसंख्या पर 22 हो गई है। देश में इस रोग का रोकथाम के लिए किए गए प्रयास के अच्छे परिणाम देखने को मिल रहे हैं।
विज्ञापन

2 of 5
फेफड़े में संक्रमण की बीमारी (टीबी) - फोटो : Adobe Stock
ड्रग रिजेस्टेंस टीबी के इलाज में मिली सफलता

भारत सरकार लगातार देश से टीबी को खत्म करने की दिशा में काम कर रही है। स्वास्थ्य मंत्री ने बताया, देश में ड्रग रिजेस्टेंस टीबी का खतरा तेजी से बढ़ता देखा गया था, इसको लेकर साल 2021 में मौखिक दवा की शुरुआत की गई थी। इस पहल की मदद से ड्रग रिजेस्टेंस टीबी के उपचार की दिशा में बड़ी सफलता मिली है। ड्रग रेजिस्टेंस टीबी के उपचार की सफलता दर जो साल 2020 में 68 प्रतिशत थी वह इस दवा के बाद बढ़कर 2022 में 75 प्रतिशत हो गई है।

भारत सरकार ने 2025 तक टीबी को खत्म करने के उद्देश्य से एक राष्ट्रीय रणनीतिक योजना (2017-2025) लागू की है। मंत्रालय ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तत्वावधान में नेशनल ट्यूबरकुलोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम  (एनटीईपी) लागू किया है। 
विज्ञापन

3 of 5
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री - फोटो : ANI
क्या कहा स्वास्थ्य मंत्री ने?

देश में टीबी को खत्म करने के प्रयासों को लेकर स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, एनटीईपी ने भारत को टीबी मुक्त बनाने के लिए महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) में टीबी उन्मूलन को लेकर उठाए गए कदमों के अच्छे परिणाम देखे गए हैं। 

सरकार ने टीबी स्क्रीनिंग और उपचार सेवाओं के साथ आयुष्मान आरोग्य मंदिर को एकीकृत करने, टीबी मामलों की अधिसूचना और प्रबंधन के लिए प्रोत्साहन के साथ निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने जैसे तमाम प्रयास किए हैं। इसके साथ टीबी रोग को लेकर कलंक कम करने, सामुदायिक जागरूकता बढ़ाने और स्वास्थ्य संबंधी व्यवहार में सुधार लाने में काफी मदद मिली है।

4 of 5
टीबी का मामला - फोटो : Freepik.com
टीबी उन्मूलन का लक्ष्य अब भी दूर

तमाम प्रयासों की मदद से देश में टीबी के उपचार और इसके मामलों को कम करने में जरूर मदद मिली है पर ये अब भी देश से टीबी के खात्मे के लक्ष्य से काफी दूर है। 

फेफड़ों में होने वाले इस गंभीर संक्रमण के कारण साल 2023 में भारत में 25.37 लाख मामले दर्ज किए गए। इससे पहले 2022 में करीब 24.22 लाख लोगों में इस बीमारी का पता चला था। ज्यादातर मामले सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों द्वारा रिपोर्ट किए गए, निजी क्षेत्र में भी बड़ी संख्या में मामलों को निदान किया जा रहा है। इतना ही नहीं स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हो सकते हैं जिन्हें ये बीमारी तो है पर उनका निदान नहीं किया गया है जिससे संक्रमण के और भी बढ़ने का खतरा रहता है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
टीबी की समस्या - फोटो : Freepik.com
वैश्विक टीबी का लगभग 25% हिस्सा अकेले भारत से

टीबी को लेकर सामने आई जानकारियों से पता चलता है कि भारत में सामने आने वाले मामले अब भी वैश्विक टीबी का लगभग 25% हिस्सा है। स्वास्थ्य क्षेत्र में गंभीर व्यावसायिक जोखिमों को रेखांकित करते हुए एक अध्ययन में पाया गया कि भारत में सामान्य आबादी की तुलना में स्वास्थ्य कर्मियों के बीच टीबी के मामले बहुत अधिक हैं, क्योंकि स्वास्थ्यकर्मी मरीजों के संपर्क में अधिक रहते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, दो सप्ताह से अधिक समय तक अगर खांसी की दिक्कत बनी रहती है और कफ या खून आता है, सीने में दर्द, कमजोरी या थकान की समस्या रहती है तो ये टीबी का संकेत हो सकता है। इस तरह के संकेतों पर गंभीरता से ध्यान देना और उपचार प्राप्त करना बहुत जरूरी हो जाता है।



--------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें