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Tomato flu: कोविड-19 के बीच कई राज्यों में फैल रहा है यह दुर्लभ संक्रमण, जानिए इसके लक्षण और बचाव के तरीके

Fri, 13 May 2022 07:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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केरल में टोमैटो फ्लू का संक्रमण - फोटो : istock
भारत सहित दुनिया के तमाम देशों के लिए इस समय कोरोना महामारी बड़ी चुनौती बनी हुई है। ओमिक्रॉन वैरिएंट की संक्रामकता और वैश्विक स्तर पर बढ़ते इसके प्रसार को देखते हुए लोगों को लगातार संक्रमण से बचाव के उपाय करते रहने की सलाह दी जाती है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां स्थिति अब भी चिंताजनक बनी हुई है। कई राज्यों में संक्रमण के मामलों में रोजाना बढ़ोतरी रिपोर्ट की जा रही है।

केरल, कोरोना से सबसे प्रभावित राज्यों में से एक रहा है। स्वास्थ्य विभाग भले ही केरल में कोविड-19 महामारी को नियंत्रण में लाने में काफी हद तक सफल रहा हो, लेकिन अन्य रोगजनकों के कारण होने वाली संक्रामक बीमारियों ने राज्य के स्वास्थ्य प्रणाली की मुसीबतें बढ़ा रखी है।

कोरोना संक्रमण के जारी कहर के बीच राज्य में एक अन्य प्रकार के संक्रमण के बढ़ने की खबर है। कई अस्पतालों से सामने आ रही जानकारियों के मुताबिक केरल में टोमैटो फ्लू नामक एक दुर्लभ वायरल बीमारी तेजी से बढ़ रही है। अब तक राज्य में 146 मामलों की पुष्टि की जा चुकी है। टोमैटो फ्लू का प्रकोप दो सप्ताह पहले दक्षिणी कोल्लम जिले के कुछ क्षेत्रों से शुरू हुआ था, जोकि अब कर्नाटक और तमिलनाडु में भी बढ़ता नजर आ रहा है। आइए जानते हैं कि आखिर यह टोमैटो फ्लू किस तरह का संक्रमण है, साथ ही इससे सेहत को किस प्रकार का खतरा हो सकता है?
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टोमैटो फ्लू में शरीर पर लाल दाने - फोटो : Pixabay
टोमैटो फ्लू क्या है?

मेडिकल रिपोर्ट्स के मुताबिक इस वायरल संक्रमण में शरीर पर लाल रंग के छाले बनने लगते हैं, इसी वजह से इसे टोमैटो फ्लू नाम दिया गया है। यह एक दुर्लभ वायरल बीमारी और आंत पर हमला करने वाले शिगेला बैक्टीरिया के एक रूप के कारण यह संक्रमण होता है। पांच साल या उससे कम उम्र के बच्चों में इस संक्रमण के मामले सबसे अधिक देखने को मिलते हैं। इसमें संक्रमितों के शरीर पर छाले निकलने के साथ तेज बुखार और बदन में तेज दर्द की समस्या हो सकती है।
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संक्रमण में तेज बुखार की समस्या - फोटो : iStock
टोमैटो फ्लू के क्या लक्षण हैं?

टोमैटो फ्लू को टोमैटो फीवर के नाम से भी जाना जाता है। सामान्यतौर पर इसमें संक्रमितों की त्वचा पर चकत्ते, त्वचा में जलन और निर्जलीकरण जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। कुछ रिपोर्ट के अनुसार फ्लू में थकान, जोड़ों में दर्द, पेट में ऐंठन, मतली, उल्टी, दस्त, खांसी, छींक, नाक बहना, तेज बुखार और शरीर में दर्द भी हो सकता है। वहीं कुछ मामलों पैरों और हाथों के रंग में बदलाव भी देखा जा रहा है।

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टोमैटो फ्लू के बारे में जानिए - फोटो : istock
टोमैटो फ्लू क्यों होता है?

मीडिया रिपोर्ट्स से मिल रही जानकारियों के मुताबिक ज्यादातर संक्रमितों ने पहले फूड प्वाइजनिंग की शिकायत की थी। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों को पानी और भोजन की स्वच्छता को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बिना धुले फलों और सब्जियों के सेवन के कारण यह संक्रमण हो सकता है। शिगेला बैक्टीरिया के ऐसे स्थानों पर होने की संभावना अधिक होती है। 
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संक्रमितो का इलाज कैसे किया जाता है? - फोटो : Pixabay
टोमैटो फ्लू का क्या इलाज है?

केरल के डॉक्टर्स के मुताबिक अन्य प्रकार के फ्लू की ही तरह टोमैटो फ्लू भी संक्रामक होता है। जिन लोगों में संक्रमण की पुष्टि की जाती है उन्हें आइसोलेट कर देना चाहिए, क्योंकि यह एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में तेजी से फैल सकता है।

संक्रमितों को उचित आराम और स्वच्छता का विशेष ख्याल रखने की आवश्यकता होती है। संक्रमण कुछ समय बाद स्वत: ठीक हो जाता है, हालांकि इस दौरान तरल पदार्थ का सेवन  करके  निर्जलीकरण की समस्या से बचाव करते रहना बहुत आवश्यक हो जाता है।
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बच्चों में संक्रमण का जोखिम - फोटो : iStock
टोमैटो फ्लू  से बचाव कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक टोमैटो फ्लू से बचाव लिए स्वच्छ भोजन और पानी का सेवन करना, सब्जियों-फलों को खाने से पहले अच्छे से साफ करना बहुत आवश्यक होता है। तरल पदार्थ का सेवन लक्षणों को कम करने में मददगार है। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यदि इसके किसी भी लक्षण को लगातार नोटिस करते हैं तो डॉक्टर की सलाह लेना महत्वपूर्ण है।

रोगी के मलमूत्र के संपर्क के माध्यम से भी संक्रमण फैल सकता है।  गर्भवती महिलाओं, पांच साल से कम उम्र के बच्चों और कमजोर प्रतिरक्षा प्रणाली वाले लोगों में संक्रमण का खतरा अधिक होता है, इन्हें विशेष बचाव करते रहने की सलाह दी जाती है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला के  हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।
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