भारत सहित दुनिया के ज्यादातर हिस्सों से ओमिक्रॉन वैरिएंट की कम होती रफ्तार की खबरें मिल रही हैं। जनवरी की शुरुआत में जहां रोजाना ढाई लाख से ज्यादा लोगों में संक्रमण का निदान किया जा रहा था, वह आंकड़ा अब घटकर रोजाना 15 हजार के करीब आ गया है। ओमिक्रॉन के मामलों में कमी भले ही सुकून देने वाली है, हालांकि संक्रमण के बाद लॉन्ग कोविड के बढ़ते मामले लोगों की चिंता बढ़ाने वाले हैं। रिपोर्ट्स से पता चलता है कि भले ही ओमिक्रॉन से संक्रमण के लक्षण हल्के रहे हों, हालांकि कुछ लोगों में पोस्ट कोविड की समस्याएं देखने को मिल रही है। इतना ही नहीं लॉन्ग कोविड की समस्या कुछ ऐसे लोगों में अब भी बनी हुई है जो दूसरी लहर के दौरान डेल्टा से संक्रमित रह चुके थे।
पोस्ट-कोविड सिंड्रोम या लॉन्ग कोविड उन समस्याओं को संदर्भित करता है, जो कोरोना से ठीक होने के बाद भी बनी रहती हैं। कई लोगों में ठीक होने का 8-9 महीनों के बाद भी दर्द, कमजोरी, गंध-स्वाद की कमी जैसी दिक्कतें देखने को मिल रही हैं। शोध से पता चलता है कि अस्पताल में भर्ती हुए बिना संक्रमण से ठीक हुए लगभग 5-10 फीसदी और अस्पताल में भर्ती हुए लगभग 80 फीसदी लोगों में पोस्ट कोविड का खतरा हो सकता है। आइए जानते हैं कि इस तरह की दिक्कतों से खुद को किस प्रकार से सुरक्षित रखा जा सकता है?