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Eye Care: हल्की सी चोट या लापरवाही हमेशा के लिए छीन सकती है आंखों की रोशनी, डॉक्टर ने बताए बड़े काम के 6 टिप्स

Fri, 16 Jan 2026 08:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Eye Care Tips: जरा सी लापरवाही से आंखों में चोट लगने की आशंका रहती है। डॉक्टरों के मुताबिक, आंखों की चोट से कॉर्निया डैमेज, रेटिना इंजरी और यहां तक कि अंधेपन का भी खतरा हो सकता है।
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आंखों की देखभाल बहुत जरूरी - फोटो : Freepik.com
आंखें ईश्वर का अनमोल वरदान हैं, जिनकी मदद से हम दुनिया के खूबसूरत नजारों का आनंद ले पाते हैं। हालांकि गड़बड़ जीवनशैली, आहार में पोषक तत्वों की कमी, बढ़ते स्क्रीन टाइम, प्रदूषण और सुरक्षा के प्रति लापरवाही ने इस अंग को गंभीर नुकसान पहुंचाया है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में करोड़ों लोग किसी न किसी तरह की दृष्टि संबंधित समस्या से जूझ रहे हैं, जिनमें बड़ी संख्या कम उम्र के लोगों की भी है।
 
  • मोबाइल, लैपटॉप और टीवी का लंबे समय तक इस्तेमाल आंखों पर अतिरिक्त दबाव डालता है, जिससे ड्राई आईज, आंखों में जलन, धुंधला दिखने जैसी समस्याएं बढ़ रही हैं।
  • इसके अलावा खेल, कामकाज या सड़क दुर्घटनाओं के दौरान आंखों पर लगने वाली चोट गंभीर नुकसान पहुंचा सकती हैं, जिससे हमेशा के लिए रोशनी जाने का खतरा हो सकता है।

डॉक्टर कहते हैं, सभी लोगों को अपनी आंखों की देखभाल को लेकर अलर्ट रहना चाहिए। आंखों को पर्याप्त पोषण देने के साथ-साथ इन्हें बाहरी चोट से बचाना भी बहुत आवश्यक है।
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चिप्स के पैकेट में धमाका, चली गई आंख की रोशनी - फोटो : Adobe stock photos
चिप्स का पैकेट फटने से चली गई रोशनी

आंखों की चोट से संबंधित एक मामला इन दिनों सोशल मीडिया पर वायरल है।

ओडिशा के बलांगीर जिले में 8 साल के एक बच्चे की चिप्स के पैकेट में हुए धमाके के बाद एक आंख की रोशनी चली गई। बच्चे ने दुकान से चिप्स का पैकेट खरीदा था। शाम को उसकी मां किचन में गैस चूल्हे पर खाना बना रही थी, थोड़ी देर के लिए वो पानी लाने बाहर चली गईं। उसी दौरान बच्चा गैस चूल्हे के पास चला गया और अचानक पैकेट उसके हाथ से फिसलकर आग के संपर्क में आ गया। इससे जोरदार धमाके के साथ चिप्स का पैकेट फट गया जिससे आंख में गंभीर चोट आई।

धमाके से उसकी एक आंख की पुतली बाहर आ गई थी। डॉक्टर की रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि अब वह कभी देख नहीं पाएगा।
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आंखों की देखभाल जरूरी - फोटो : freepik.com
आंखों की देखभाल बहुत जरूरी

नेत्र रोग विशेषज्ञ कहते हैं, आंखें जितनी अनमोल हैं, उतनी ही नाजुक भी होती हैं। आंखों की चोट कॉर्निया डैमेज, रेटिना इंजरी और यहां तक कि अंधेपन का भी खतरा बढ़ाने वाली हो सकती है। इसलिए इनकी सुरक्षा और सही देखभाल को लेकर सभी लोगों को गंभीरता से ध्यान देना बेहद जरूरी है।

आइए आंखों की सुरक्षा के लिए 6 जरूरी टिप्स जान लेते हैं।


1. खेल के दौरान,फैक्ट्री में काम करते समय या दुर्घटना के दौरान आंखों में चोट लगने का खतरा ज्यादा होता है। नेशनल आई इंस्टीट्यूट के अनुसार 90% आंखों की चोटें सही सावधानी से रोकी जा सकती हैं। सेफ्टी गॉगल्स पहनना और बच्चों को निगरानी में रखना आंखों की रोशनी बचाने में अहम भूमिका निभाता है।

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आंखों की क्षति का खतरा - फोटो : Adobe Stock

2. वायु प्रदूषण में मौजूद धूल, धुआं और रसायनों के कण आंखों की बाहरी सतह कॉर्निया को नुकसान पहुंचाते हैं। प्रदूषित हवा से आंखों में जलन, ड्राई आईज और एलर्जी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। बाहर निकलते समय सनग्लास पहनें। इससे आंखों की सुरक्षा होती है।

3. लगातार मोबाइल, लैपटॉप और टीवी देखने से आंखों पर दबाव बढ़ता है। स्क्रीन टाइम बढ़ने से डिजिटल आई स्ट्रेन, सूखापन और धुंधली दृष्टि की समस्या होती है। 20-20-20 नियम यानी हर 20 मिनट में 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर देखना आंखों को आराम देता है। यह नियम आंखों की मांसपेशियों को रिलैक्स करता है और थकान कम करता है।

4. गंदे हाथों से आंखें छूने पर बैक्टीरिया और वायरस आसानी से संक्रमण फैला सकते हैं। कंजक्टिवाइटिस जैसे संक्रमण ज्यादातर हाथों के जरिए फैलते हैं। साफ पानी से आंख धोना और नियमित रूप से हाथ धोने की आदत आंखों को संक्रमण से सुरक्षित रखती है।
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आंखों को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें? - फोटो : Freepik.com

5. सूरज की किरणें भी आंखों के लिए हानिकारक होती हैं। लंबे समय तक यूवी किरणों के सीधे संपर्क में रहने से मोतियाबिंद और रेटिना डैमेज का खतरा बढ़ता है। तेज धूप में बिना चश्मे के बाहर निकलना आंखों की रोशनी को धीरे-धीरे कमजोर कर सकता है।

6. आंखों की सुरक्षा के लिए सही पोषण भी बेहद जरूरी है। विटामिन ए, सी, ई, ओमेगा-3 फैटी एसिड और जिंक आंखों की सेहत के लिए अहम माने जाते हैं। विटामिन-ए की कमी से नाइट ब्लाइंडनेस का खतरा बढ़ता है। हरी सब्जियां, गाजर, मछली, आंवला और नट्स आंखों की रोशनी बनाए रखने में मदद करते हैं।




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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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