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Three Drink Theory: क्या है थ्री ड्रिंक थ्योरी? जो हाइड्रेट रखने के साथ शरीर को करता है डिटाॅक्स

Fri, 11 Apr 2025 11:36 AM IST
शिवानी अवस्थी लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला

सार

आप हाइड्रेट रहने के लिए तरह-तरह के जूस पीती हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इनकी अधिक मात्रा शरीर में कैलोरी को बढ़ा देती है, जिसे आप ‘थ्री ड्रिंक थ्योरी’ से कंट्रोल कर सकती हैं।
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तीन तरह के तरल पदार्थ का सेवन - फोटो : adobe
प्रीता जैन
आहार विशेषज्ञ

गर्मी का मौसम शुरू हो गया है। धीरे-धीरे धूप अपने तेवर दिखाने लगी है। ऐसे में शरीर को अधिक हाइड्रेटेड रखना जरूरी है। गर्मी के मौसम में पसीने के जरिए शरीर से ज्यादा पानी निकलता है, जिससे डिहाइड्रेशन (निर्जलीकरण) होने से स्वास्थ्य पर विपरीत प्रभाव पड़ता है, इसलिए आपकी बॉडी का हाइड्रेटेड रहना आवश्यक है। हाइड्रेटेड रहने का मतलब है, अपने शरीर को पर्याप्त पानी देना। यह आपके शरीर की दैनिक जरूरतों को पूरा करने का तरीका है, जिससे आप स्वस्थ बने रह सकते हैं। जब आप हाइड्रेटेड रहते हैं तो आपकी किडनी सही ढंग से कार्य कर पाती है और आपके संपूर्ण शरीर को कई तरह के लाभ मिलते हैं, जैसे- ऊर्जा का स्तर बढ़ता है, प्रतिरक्षा प्रणाली मजबूत होती है, अंगों की सुरक्षा होती है और सिर दर्द तथा कब्ज जैसी समस्याएं भी कम होने लगती हैं। साथ ही हाइड्रेटेड रहने से शरीर की प्राकृतिक डिटॉक्सिफिकेशन प्रक्रिया को बढ़ावा मिलता है, जो संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए जरूरी है।
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तीन तरह के तरल पदार्थों का सेवन - फोटो : Adobe
सेल्स में फ्लूइड खत्म होता है

हमारे शरीर का 50-70 प्रतिशत वजन पानी के कारण होता है। सेल्स हमारे शरीर के बिल्डिंग यूनिट होते हैं, जिन्हें जिंदा रहने के लिए पानी की जरूरत होती है। पानी की कमी के कारण सेल्स में मौजूद फ्लूइड खत्म होने लगता है, जिसके कारण वे ठीक से फंक्शन नहीं कर पाते हैं। इसलिए शरीर में सही मात्रा में पानी मौजूद होना अत्यंत आवश्यक होता है। साथ ही पानी हमारी बॉडी से टॉक्सिन्स को बाहर निकालने और शरीर का तापमान नियंत्रित करने में भी मदद करता है। हर तरह की शारीरिक एक्टिविटी के दौरान पानी का इस्तेमाल होता है। इस वजह से खर्च हुए पानी की कमी को पूरा करना जरूरी है।

तीन तरह के तरल पदार्थों का सेवन

एक स्वस्थ व्यक्ति को दिन में 2-3 लीटर यानी 8-10 गिलास पानी पीना चाहिए। इसमें पानी के सभी स्रोतों को शामिल कर सकते हैं, जैसे सादा पानी, फल-सब्जियां और अन्य पेय पदार्थ। इस प्रक्रिया को अपनाने और हाइड्रेटेड रहने का एक प्रभावी तरीका है- ‘थ्री ड्रिंक थ्योरी’। इस थ्योरी के अनुसार, दिन भर में तीन प्रमुख प्रकार के तरल पदार्थों का सेवन किया जाना चाहिए, जिन में पहला है- पानी। यह शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण है। दूसरा है- फल-सब्जियां खाना (फ्रूट जूस एवं सूप), जो प्राकृतिक विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर होने के कारण शरीर को पोषण देते हैं। इसके बाद तीसरी चीज आती है आपकी पसंद यानी चाय या कॉफी। यह पाचन में मदद कर शरीर को आराम महसूस करती है। इन तीनों का संतुलित सेवन शरीर को हाइड्रेट तथा स्वस्थ रखने में मदद करता है।
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जूस - फोटो : Adobe
पहला स्टेप ‘पानी’

दिन भर में आपको 2-3 लीटर सादा पानी अवश्य पीना चाहिए। असल में, सादे पानी में शून्य कैलोरी यानी कोई कैलोरी नहीं होती, इसलिए यह वजन घटाने और नियंत्रित रखने के लिए एक अच्छा विकल्प है। कई लोग सादे पानी को सही मात्रा में नहीं पी पाते हैं, क्योंकि उसमें कोई स्वाद नहीं होता है। ऐसे में आप नींबू डालकर, शरबत बनाकर या फिर सौंफ और अजवाइन मिलाकर उसका पानी पी सकती हैं। इसके अलावा कुछ मात्रा में इंग्रेडिएंट्स, जैसे मेथी, पुदीना, तुलसी के पत्ते, लेमनग्रास, चिया सीड्स, दालचीनी आदि मिलाकर पानी पी सकती हैं, जो शरीर को ठंडा रखने, पोषण देने और पानी की मात्रा को पूरा करते हैं।

दूसरा है ‘जूस’

दिन भर में कुछ न कुछ खाने या पीने का मन तो करता ही है, जिस कारण आप चॉकलेट शेक जैसे अनहेल्दी ड्रिंक्स का सेवन कर लेती हैं। लेकिन थ्री ड्रिंक थ्योरी कहती है कि आप फल तथा सब्जियों के जूस और सूप का सेवन करें। गर्मी के मौसम में फल और सब्जियों का सही मात्रा में सेवन करने से शरीर में पानी की पर्याप्त मात्रा बनी रहती है।

आप इन फल-सब्जियों का जूस या सूप तो बनाकर पी ही सकती हैं, साथ में इनको कच्चा खाने से भी पानी की कमी दूर होती है। तरबूज, खरबूजा, नाशपाती, आम, संतरा, सेब, पपीता, अनानास, अंगूर, स्ट्रॉबेरी और ब्लूबेरी आदि फल पानी की मात्रा के लिए अच्छे माने जाते हैं, जिन्हें आपको अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। सब्जियों में खीरा, ककड़ी, मूली, गाजर, चुकंदर, टमाटर, पालक, तुरई, लौकी, शिमला मिर्च, भिंडी, पत्तागोभी, फूलगोभी, ब्रोकली, मशरूम, जलकुंभी, लेट्यूस पत्ता आदि में पानी की अच्छी मात्रा होती है। इनमें से कुछ को सलाद में रोजाना की डाइट में शामिल करें।

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तीसरा ‘आपकी पसंद’ - फोटो : Freepik.com
तीसरा ‘आपकी पसंद’

चाय-कॉफी या दूध आदि पेय पदार्थ भी शरीर को हाइड्रेटेड रखने में मदद करते हैं। यदि आपको सादा दूध पसंद नहीं है तो लस्सी या छाछ पीएं। आप दूध में हल्दी मिलाकर भी पी सकती हैं। चाय और कॉफी कैफीन युक्त पेय भी दैनिक जल सेवन में थोड़ा योगदान दे सकते हैं, बस ध्यान रखना चाहिए कि दिन भर 2-3 कप चाय और कॉफी से अधिक न पीएं तथा कैफीन 300-400 मिलीग्राम से अधिक न हो। ऐसा इसलिए कि कैफीन युक्त पदार्थों का अधिक सेवन करने से बार-बार मूत्र आने से हाइड्रेटेड रहना मुश्किल हो जाता है और बेचैनी तथा घबराहट हो सकती है।

पर्याप्त हाइड्रेशन के संकेत

कई लोग समझ ही नहीं पाते कि वे हाइड्रेटेड हैं या नहीं। हालांकि कुछ संकेत इस ओर इशारा करते हैं, जैसे कि अगर आपको बार-बार प्यास नहीं लगती है तो यह एक संकेत है कि आप पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थ ले रही हैं। हल्का पीला या रंगहीन पेशाब हाइड्रेट होने का संकेत है। साथ ही जब आप पूरी तरह हाइड्रेटेड रहती हैं तो आपको अधिक ऊर्जा महसूस होती है, मांसपेशियों में ऐंठन कम होती है, सिर दर्द नहीं होता है, चक्कर नहीं आते हैं और त्वचा पर एक अलग ही प्रकार का ग्लो नजर आता है, जो संकेत होता है कि आप पूरी तरह हाइड्रेटेड हैं।
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ध्यान रखने योग्य बातें - फोटो : Freepik.com
ध्यान रखने योग्य बातें

आप यह तो समझ गईं कि शरीर का हाइड्रेटेड रहना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे में थ्री ड्रिंक थ्योरी को अपने दैनिक आहार में शामिल कर शरीर को हाइड्रेट रख स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। ध्यान रखें, मीठे पेय, सोडा और शराब जैसे पेय पदार्थों के सेवन से बचें। साथ ही अपने पानी में इलेक्ट्रोलाइट्स मिलाने से भी बचें, क्योंकि इन ड्रिंक्स में चीनी की मात्रा और कृत्रिम खाद्य रंग जैसे अस्वास्थ्यकर तत्व ज्यादा होते हैं, जो हितकर नहीं हैं। इसलिए आप अपने साथ पानी की एक बोतल रखें और दिन भर उससे पानी पीती रहें। वहीं उम्र बढ़ने के साथ यदि भूख-प्यास कम हो रही है तो ऐसे खाद्य-पेय पदार्थ अपनी रोजमर्रा के आहार में शामिल करें, जो मौसमी हों, आसानी से उपलब्ध हों और जिनमें पानी की मात्रा अधिक हो। इनके सेवन से आप डिहाइड्रेशन की समस्या से बच सकती हैं।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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