मरीजों की संख्या बढ़ेगी?
मिगुएल अराजो मानते हैं कि अगर कोविड-19 पर मौसम, नमी और तापमान का वही असर पड़ता है, जैसा कि अन्य वायरस पर तो इसका मतलब है कि अलग-अलग समय में कोरोना के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ेगी। एक अन्य स्टडी के मुताबिक कोविड-19 ऐसे देश और इलाकों में तेजी से फैला है, जहां औसत तापमान 5 से 11 डिग्री सेल्सियस रहता है। और नमी आमतौर पर कम रहती है। लेकिन उष्णकटिबंधीय देशों में भी खासी संख्या में कोरोना मरीज देखने को मिले हैं।
एशिया में तापमान यूरोपीय और अमरीकी देशों के मुकाबले कहीं ज्यादा है। फिर भी नया कोरोना वायरस यहां तेजी से फैल रहा है। लिहाजा कहना मुश्किल है कि ज्यादा तापमान होने पर कोविड-19 कमजोर पड़ जाएगा। फिलहाल कोरोना वायरस इंसानों के संपर्क के कारण बढ़ रहा है। जैसे ही मौसम बदलेगा, इंसान का बर्ताव भी बदलेगा। तब हो सकता है कि कोरोना पर भी इसका असर पड़े।
मिसाल के लिए यूरोप में खसरा का वायरस स्कूल जाने वाले बच्चों में होता है। लेकिन जैसे ही बच्चों के स्कूल की छुट्टियां होती हैं, बच्चों का मिलना-जुलना कम होता है, वायरस भी कमजोर पड़ जाता है। चीन में 25 जनवरी को लूनर नए साल का जश्न मनाने के लिए बड़े पैमाने पर लोग वुहान में जमा हुए थे। और वहीं से ये वायरस तेजी से फैला।