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Prevention of Blindness Week 2020: इन 5 आदतों को अपनाने से 60 की उम्र के बाद भी रहेगी आंखों की रोशनी बरकरार

Sun, 05 Apr 2020 02:36 PM IST
नवनीत राठौर लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
हाल के कुछ वर्षों में भागदौड़ भरी जिंदगी और हमारी दिनचर्या में ऐसा बदलाव आ चुका है कि इसका सीधा असर हमारे स्वास्थ्य पर पड़ रहा है। हमारे खानपान और कमजोरी का असर आंखों की रोशनी पर भी पड़ता है। यही कारण है कि पहले के दौर में जहां बुजुर्गों को चश्मे की जरूरत नहीं पड़ती थी, आज की जेनरेशन में बचपन में ही चश्मे की जरूरत होने लगी है। आंखों की रोशनी का कमजोर होना आज के समय में एक गंभीर विषय बन गया है, जिस बारे में सोचना बहुत ही जरूरी है।

आंखों की रोशनी के बारे में जागरूकता के उद्देश्य से हर साल 1 से 7 अप्रैल को ब्लाइंडनेस वीक के रूप में मनाया जाता है। इस सप्ताह के दौरान आंखों की देखभाल और आंखों से जुड़ी बीमारियों से बचाव पर जोर दिया जाता है। विशेषज्ञ बताते हैं कि आंखों का अच्छे से ख्याल रखा जाए और नियमित जांच करवाई जाए तो बुढ़ापे में भी आंखों की रोशनी बरकरार रहेगी। हम आपको आंखों की देखभाल के लिए कुछ जरूरी तरीकों के बारे में बता रहे हैं...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
खानपान पर ध्यान
अगर इंसान का खानपान सही रहे तो किसी भी तरह की कोई बीमारी नहीं होगी। पौष्टिक और संतुलित आहार के माध्यम से इंसान स्वस्थ रहते हुए लंबे जीवन का सफर तय कर सकता है। आंखों के स्वास्थ्य के लिए विटामिन सी, विटामिन ई, ओमेगा -3 फैटी एसिड, ल्यूटिन और जस्ता जैसे पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। इन पोषक तत्वों की आवश्यकता पूरी करने के लिए आपको अपने आहार में हरी पत्तेदार सब्जियां, मछली, अंडे, घी, नट्स, दाल, बीन्स संतरे और अन्य खट्टे फलों को शामिल करना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
धूम्रपान से दूरी
धूम्रपान यानी स्मोकिंग शरीर को कई तरह से नुकसान पहुंचा सकता है। यह आपके फेफड़े समेत आंखों की रोशनी के लिए बेहद हानिकारक है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि धूम्रपान करने से ड्राई आई, मैक्यूलर डिजनरेशन, डायबिटिक रेटिनोपैथी, आई सिंड्रोम और मोतियाबिंद जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। नियमित रूप से धूम्रपान करने वाले लोगों को आंखों से जुड़ी समस्याएं जरूर होती हैं। इसलिए आंखों की सेहत के लिए धूम्रपान से दूरी बनाए रखें।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
UV किरणों से आंखों की रक्षा
तेज धूप में बाहर निकलते वक्त आंखों को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से बचाना चाहिए। इन हानिकारक किरणों के संपर्क में आने से मैक्यूलर डिजनरेशन और मोतियाबिंद का खतरा हो सकता है। इन किरणों से बचने के लिए खासकर गर्मी के मौसम में आपको यूवी प्रोटेक्टर चश्मे का उपयोग करना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
लैपटॉप या फोन ज्यादा चलाएं
लैपटॉप या फोन की स्क्रीन पर ज्यादा समय बिताने से आंखों की रोशनी कम हो सकती है। बहुत देर कंप्यूटर और मोबाइल की स्क्रीन देखने के कारण आपकी नजर धुंधली हो सकती है। साथ ही सिरदर्द और कंधे में दर्द समेत कई स्वास्थ्य समस्याएं हो सकती हैं। अगर आपको लैपटॉप पर ज्यादा देर तक काम करना है तो एंटी-ग्लेयर स्क्रीन का इस्तेमाल करें। हर दो घंटे के बाद आपको कम से कम 15 मिनट का ब्रेक लेना चाहिए।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया
नियमित रूप से आंखों की जांच
आंखों की सुरक्षा के लिए आपको नियमित रूप से जांच करवानी चाहिए। ऐसा करने से आपकी आंखों की रोशनी का भी पता चलेगा और आने वाली समस्याओं से निपटने में मदद मिलेेगी।
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