Talking to Yourself Psychology: अकेले में खुद से बातें करना एक ऐसा व्यवहार है जिसे समाज में अक्सर अजीब या यहां तक कि पागलपन का संकेत माना जाता है। मगर मनोवैज्ञानिकों के अनुसार यह आदत पागलपन नहीं, बल्कि एक सामान्य और प्रभावी मानसिक क्रिया है, जो कई मायनों में हमारी स्मार्टनेस और समस्या-समाधान के क्षमता को बढ़ाती है। इसे अक्सर सेल्फ-टॉक या इनर स्पीच कहा जाता है।
जब हम खुद से बात करते हैं तो हम अपने विचारों को व्यवस्थित कर रहे होते हैं, समस्याओं को कई दृष्टिकोणों से देख रहे होते हैं, और अपने अगले कदम की योजना बना रहे होते हैं। यह क्रिया मस्तिष्क को उस जानकारी को तेजी से संसाधित करने में मदद करती है जो हमारे दिमाग के अंदर बिखरी हुई होती है। यह बच्चों में संज्ञानात्मक विकास का भी एक नेचुरल हिस्सा है। इसलिए यह आदत अक्सर अधिक एकाग्रता और आंतरिक मार्गदर्शन का संकेत होती है।