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Postpartum Depression: नई मां में दिख रहे हैं ये बदलाव? जानें पोस्टपार्टम डिप्रेशन के गंभीर लक्षण

Wed, 08 Jul 2026 03:08 PM IST
Shruti Gaur हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Symptoms of Postpartum Depression: अगर आपके घर में भी किसी महिला ने बच्चे को जन्म दिया है, तो ऐसी महिला का खास ध्यान रखें। ताकि वो पोस्टपार्टम डिप्रेशन का शिकार न होने पाएं। 
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
Symptoms of Postpartum Depression: बच्चे का जन्म किसी भी परिवार के लिए खुशी का पल होता है, लेकिन मां के लिए यह समय शारीरिक और मानसिक दोनों तरह के बड़े बदलावों से भरा होता है। डिलीवरी के बाद हार्मोन में बदलाव, नींद की कमी, थकान और नवजात की देखभाल की जिम्मेदारी कई महिलाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर सकती है। 

कुछ महिलाओं को शुरुआती दिनों में हल्का मूड स्विंग या उदासी महसूस होती है, जिसे सामान्य माना जाता है। लेकिन यदि उदासी, चिंता, निराशा या तनाव लंबे समय तक बना रहे और रोजमर्रा की जिंदगी पर असर डालने लगे, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। समय रहते इसके लक्षणों को पहचानना और उचित इलाज कराना बेहद जरूरी है।

परिवार का सहयोग, भावनात्मक समर्थन और डॉक्टर से समय पर सलाह नई मां को इस स्थिति से बाहर निकलने में मदद कर सकती है। आइए जानते हैं पोस्टपार्टम डिप्रेशन के गंभीर लक्षण और इससे बचाव के उपाय।

 
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है?

पोस्टपार्टम डिप्रेशन (PPD) एक मानसिक स्वास्थ्य स्थिति है, जो बच्चे के जन्म के बाद कुछ महिलाओं में विकसित हो सकती है। यह सामान्य "बेबी ब्लूज" से अलग होता है। बेबी ब्लूज आमतौर पर कुछ दिनों में ठीक हो जाते हैं, जबकि पोस्टपार्टम डिप्रेशन के लक्षण हफ्तों या महीनों तक बने रह सकते हैं और इलाज की जरूरत पड़ सकती है।

 
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
 पोस्टपार्टम डिप्रेशन के गंभीर लक्षण

 1. लगातार उदासी और निराशा महसूस होना

अगर नई मां कई दिनों या हफ्तों तक लगातार उदास रहती है, बिना वजह रोती है या उसे किसी भी काम में खुशी नहीं मिलती, तो यह पोस्टपार्टम डिप्रेशन का संकेत हो सकता है। यह स्थिति धीरे-धीरे दैनिक जीवन को प्रभावित कर सकती है।

 2. अत्यधिक चिंता और घबराहट

बच्चे की सेहत को लेकर सामान्य चिंता स्वाभाविक है, लेकिन अगर महिला हर समय बेचैनी, घबराहट या डर महसूस करे और उसे नियंत्रित न कर पाए, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

 

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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
 3. नींद और भूख में बदलाव

पोस्टपार्टम डिप्रेशन से पीड़ित महिला को जरूरत से ज्यादा नींद आ सकती है या बिल्कुल नींद नहीं आती। इसी तरह भूख बहुत कम या बहुत ज्यादा लगने की समस्या भी हो सकती है।

 4. बच्चे से जुड़ाव महसूस न होना

कुछ महिलाओं को अपने नवजात से भावनात्मक जुड़ाव महसूस करने में कठिनाई हो सकती है। वे बच्चे की देखभाल में रुचि कम दिखा सकती हैं या खुद को दोषी महसूस कर सकती हैं। यह भी पोस्टपार्टम डिप्रेशन का एक महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।

 5. खुद को नुकसान पहुंचाने या आत्महत्या जैसे विचार आना

अगर किसी महिला के मन में खुद को नुकसान पहुंचाने, जीवन समाप्त करने या बच्चे को नुकसान पहुंचाने जैसे विचार आते हैं, तो यह गंभीर मानसिक स्वास्थ्य आपातस्थिति हो सकती है। ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर या मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।

 
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
 पोस्टपार्टम डिप्रेशन का खतरा किन महिलाओं में ज्यादा होता है?
 
  •  पहले से डिप्रेशन या एंग्जायटी का इतिहास होना।
  •  परिवार से पर्याप्त भावनात्मक सहयोग न मिलना।
  •  आर्थिक या पारिवारिक तनाव।
  •  समय से पहले या जटिल प्रसव होना।
  •  जुड़वां या अधिक बच्चों का जन्म होना।
  • नींद की लगातार कमी और अत्यधिक थकान।

 
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पोस्टपार्टम डिप्रेशन क्या है? - फोटो : AI
 पोस्टपार्टम डिप्रेशन से बचाव के उपाय
 
  • नई मां को पर्याप्त आराम और नींद लेने का मौका दें।
  • संतुलित और पौष्टिक आहार दें।
  • परिवार और साथी भावनात्मक सहयोग करें।
  •  मां को अपनी भावनाएं खुलकर साझा करने के लिए प्रोत्साहित करें।
  •  अगर लक्षण दो सप्ताह से अधिक बने रहें या गंभीर हों, तो मनोचिकित्सक या डॉक्टर से सलाह लें।
  •  नियमित फॉलो-अप और मानसिक स्वास्थ्य पर ध्यान दें।

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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